जदयू से आर-पार की तैयारी में अनंत सिंह….किसी भी हाल में नीरज को समर्थन नहीं, हम अनुज के साथ, घमासान जारी

अनंत सिंह

अनंत सिंह ने नीरज कुमार के बजाय डॉ. अनुज सिंह का साथ दिया

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार की सियासत में एक बार फिर जदयू के भीतर खींचतान की चर्चा तेज हो गई है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने साफ कर दिया है कि वह विधान परिषद चुनाव में जदयू के एमएलसी नीरज कुमार का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान किया है। अनंत सिंह के इस रुख से पार्टी के भीतर चल रही सियासी रस्साकशी एक बार फिर सामने आ गई है।

अनंत सिंह का कहना है कि नीरज कुमार ने पिछले विधानसभा चुनावों में उनका साथ नहीं दिया था। ऐसे में वह भी इस चुनाव में नीरज कुमार की मदद नहीं करेंगे। उनके इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक तल्खी अब जदयू के लिए नई चुनौती बन सकती है।

अनंत सिंह ने कहा- हम अनुज के साथ

अनंत सिंह ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि वह डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं। जदयू कार्यालय में 7 सितंबर को हुई बैठक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने ऐसी किसी विशेष बात से इनकार किया।

नीरज कुमार का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने विधानसभा चुनाव में उनका विरोध किया, उस समय पार्टी की ओर से कोई बैठक नहीं हुई थी। अनंत सिंह ने नीरज कुमार के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब यह कहा गया था कि व्यक्ति से बड़ी पार्टी होती है, तो फिर अब व्यक्ति को इतना महत्व क्यों दिया जा रहा है। इस बयान से स्पष्ट है कि अनंत सिंह फिलहाल अपने रुख से पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

अनंत सिंह ने समर्थकों से भी मांगा अनुज का साथ

अनंत सिंह का यह रुख अचानक सामने नहीं आया है। 3 सितंबर 2026 को वह बाढ़ के दौरे पर गए थे। उस दौरान उनके साथ डॉ. अनुज सिंह भी मौजूद थे, जो पटना स्नातक विधान परिषद सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने नीरज कुमार के समर्थन से साफ इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि एक ही दल में रहने के बावजूद नीरज कुमार ने चुनाव में उनकी मदद नहीं की, इसलिए वह भी इस चुनाव में उनकी सहायता नहीं करेंगे।

इसी दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा की सभी 26 पंचायतों के समर्थकों से डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने की अपील की। इस घोषणा के बाद जदयू के भीतर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई।

16 नवंबर को होना है बड़ा सियासी मुकाबला

बिहार विधान परिषद की आठ सीटें 16 नवंबर 2026 को खाली हो रही हैं। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक कोटे की सीटें शामिल हैं। नीरज कुमार की सीट भी इनमें शामिल है। ऐसे में विधान परिषद चुनाव से पहले अनंत सिंह का नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर सामने आना जदयू के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

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हालांकि, चुनाव में समर्थन का वास्तविक असर कितना होगा, यह परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अनंत सिंह के समर्थक डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में किस तरह सक्रिय होते हैं और जदयू संगठन इस असहमति को किस तरीके से संभालता है।

नीरज और अनंत की पुरानी अदावत फिर चर्चा में

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक मतभेद नए नहीं हैं। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से तल्खी रही है। इसकी एक बड़ी वजह 2015 का विधानसभा चुनाव भी रहा है। 24 जून 2015 को पटना के तत्कालीन एसएसपी विकास वैभव ने पुटुस हत्याकांड के मामले में जदयू विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव हुए। जदयू ने उस समय मोकामा से अनंत सिंह को टिकट नहीं दिया और नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया।

अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और नीरज कुमार को 18,348 वोटों के अंतर से हरा दिया। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी काफी तीखी रही थी।

अनंत सिंह के जेल जाने के बाद बदले समीकरण

2015 के विधानसभा चुनाव के बाद अनंत सिंह का जदयू से रिश्ता टूट गया। करीब दो साल बाद नवंबर 2017 में वह जेल से बाहर आए। इसके बाद उनकी राजनीतिक नजदीकी राष्ट्रीय जनता दल से बढ़ी।

2019 के लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह ने अपनी पत्नी नीलम देवी को मुंगेर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा। उनका मुकाबला जदयू के ललन सिंह से हुआ, लेकिन नीलम देवी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी रही।

AK-47 मामले के बाद और बढ़ी तल्खी

अगस्त 2019 में अनंत सिंह के पैतृक आवास लदमा से एके-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने का मामला सामने आया। इसके बाद उन पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया और उन्होंने दिल्ली की अदालत में सरेंडर किया। इस घटनाक्रम के बाद नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर कई बार राजनीतिक हमला किया। सार्वजनिक बयानों और इंटरव्यू में दोनों नेताओं के बीच कटाक्ष का दौर भी देखने को मिला। यही पुरानी राजनीतिक तल्खी अब एक बार फिर विधान परिषद चुनाव के बहाने चर्चा में है।

2025 में JDU में वापसी के बाद भी नहीं थमी खटास

2025 के विधानसभा चुनाव से पहले अनंत सिंह एक बार फिर जदयू में लौट आए। पार्टी ने उन्हें मोकामा से चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि, नीरज कुमार ने उनके समर्थन में प्रचार नहीं किया। उस समय नीरज कुमार ने कहा था कि वह आपराधिक चरित्र वाले व्यक्ति के समर्थन में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। इस बयान ने दोनों नेताओं के बीच पहले से मौजूद मतभेद को फिर सामने ला दिया था।

अब अनंत सिंह उसी पुराने घटनाक्रम का हवाला देते हुए नीरज कुमार के समर्थन से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब नीरज ने उनका साथ नहीं दिया तो अब वह भी नीरज के लिए समर्थन नहीं देंगे।

7 सितंबर की बैठक से सुलझी नहीं बात?

विवाद को शांत करने के लिए जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और मंत्री श्रवण कुमार की मौजूदगी में 7 सितंबर को अनंत सिंह और नीरज कुमार की बैठक हुई थी। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। बैठक करीब 32 मिनट तक चली। बैठक खत्म होने के बाद अनंत सिंह पत्रकारों से बातचीत किए बिना वहां से निकल गए। दूसरी ओर नीरज कुमार और मंत्री श्रवण कुमार ने पार्टी के भीतर किसी बड़े मतभेद से इनकार किया। श्रवण कुमार ने कहा कि संगठन और एनडीए में कोई मनमुटाव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जदयू विधान परिषद की सभी आठ सीटों पर जीत हासिल करेगा।

अनंत सिंह के रुख से बढ़ी पार्टी की चुनौती

बैठक के बावजूद अनंत सिंह का सार्वजनिक रूप से डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में खड़ा होना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। एक तरफ जदयू संगठन नीरज कुमार की जीत के लिए समर्थन जुटाने में लगा है, वहीं मोकामा के प्रभावशाली विधायक का अलग उम्मीदवार के पक्ष में जाना चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि, इसे जदयू के भीतर बड़े टूट या विद्रोह के तौर पर देखना अभी जल्दबाजी होगी। पार्टी नेतृत्व लगातार संगठनात्मक एकजुटता का दावा कर रहा है। लेकिन अनंत सिंह के लगातार दिए जा रहे बयान यह जरूर बताते हैं कि नीरज कुमार को लेकर उनकी नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में विधान परिषद चुनाव का प्रचार तेज होने के साथ यह विवाद और स्पष्ट हो सकता है। अब देखना होगा कि अनंत सिंह का समर्थन डॉ. अनुज सिंह के लिए कितना प्रभावी साबित होता है और जदयू नेतृत्व इस राजनीतिक चुनौती से किस तरह निपटता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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