अरब सागर में भारत-पाक नौसैनिक जहाज टकराए, भारत ने पाक राजनयिक को किया तलब, बढ़ा विवाद
अरब सागर में भारत-पाक नौसैनिक जहाज टकराए, भारत ने जताया विरोध
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। अरब सागर भारत-पाक जहाज टक्कर की घटना के बाद दोनों देशों के बीच समुद्री मोर्चे पर कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के एक जहाज के बीच टक्कर हुई। भारतीय पक्ष के मुताबिक, पाकिस्तान नौसेना का जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया और इस दौरान असुरक्षित तथा गैर-पेशेवर तरीके से मैन्युवरिंग की गई। इसके बाद दोनों जहाजों के बीच संपर्क हुआ। घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
अरब सागर घटना के बाद भारत ने मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाया। विदेश मंत्रालय ने 16 सितंबर को नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया और समुद्र में पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के व्यवहार को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने इस घटना को दोनों देशों के बीच मौजूद समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में गंभीरता से लिया है।
अरब सागर में कैसे हुई जहाजों की टक्कर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अरब सागर में भारतीय नौसेना का युद्धपोत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियमित निगरानी मिशन पर तैनात था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत की ओर आया। भारतीय पक्ष के मुताबिक, पाकिस्तानी जहाज ने सुरक्षित दूरी बनाए रखने के बजाय ऐसा मैन्युवर किया जिसे असुरक्षित और गैर-पेशेवर माना गया।
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अरब सागर में दोनों जहाजों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रह गई और अंततः उनकी टक्कर हो गई। फिलहाल सार्वजनिक रूप से दोनों जहाजों के नाम और घटना की सटीक लोकेशन जैसी विस्तृत तकनीकी जानकारी सामने नहीं आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार टक्कर से किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
भारत ने पाकिस्तानी राजनयिक को किया तलब
अरब सागर घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया। भारत ने उनके सामने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के आचरण को अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर बताया। नई दिल्ली की ओर से कहा गया कि समुद्र में सैन्य इकाइयों को एक-दूसरे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए पर्याप्त दूरी और सावधानी बनाए रखनी चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान के संबंधित अधिकारियों तक अपनी आपत्ति पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी राजनयिक को कहा है। इसके साथ ही इस्लामाबाद में भारत के कार्यवाहक राजदूत को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया।
1991 के समझौते का दिया गया हवाला
भारत ने इस घटना के संदर्भ में अप्रैल 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते के आर्टिकल 10 का हवाला दिया है। यह समझौता सैन्य अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही से जुड़ी गतिविधियों के बारे में अग्रिम सूचना देने और गलतफहमी तथा दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए किया गया था।

आर्टिकल 10 में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के संचालन को लेकर सुरक्षा प्रावधान हैं। भारतीय पक्ष के अनुसार, दोनों देशों की नौसैनिक इकाइयों को एक-दूसरे से कम से कम तीन नॉटिकल मील की दूरी बनाए रखनी चाहिए। तीन नॉटिकल मील लगभग 5.56 किलोमीटर के बराबर होता है।
भारत की आपत्ति सिर्फ टक्कर तक सीमित नहीं
नई दिल्ली की आपत्ति केवल इस बात को लेकर नहीं है कि दोनों जहाज आपस में टकराए। भारत ने इस घटना को समुद्र में मौजूद द्विपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में भी उठाया है। अरब सागर पर भारतीय पक्ष का कहना है कि सैन्य जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्र में संचालन के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों और आपसी समझौतों का पालन करना चाहिए।
इस तरह के प्रावधानों का उद्देश्य समुद्र में दोनों देशों की सैन्य इकाइयों के बीच अचानक संपर्क, गलतफहमी और दुर्घटना की संभावना को कम करना है। इसलिए किसी भी कथित उल्लंघन को भारत ने कूटनीतिक माध्यम से पाकिस्तान के सामने उठाया है।
अरब सागर में पुरानी घटना से जुड़ता है मामला
भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में ऐसी घटना पहली बार नहीं है। जून 2011 में भी भारतीय नौसेना के INS Godavari और पाकिस्तान नौसेना के PNS Babur से जुड़ी एक घटना सामने आई थी। उस समय भारत ने पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज पर जोखिम भरी मैन्युवरिंग का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज कराया था।
भारत के विदेश मंत्रालय के 2011 के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उस मामले में भारत ने पाकिस्तान के सामने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में नौवहन सुरक्षा से जुड़े नियमों और 1991 के समझौते के आर्टिकल 10 का उल्लेख किया था।
मौजूदा घटना में भी सुरक्षा दूरी और जहाजों की मैन्युवरिंग का मुद्दा प्रमुख है। हालांकि, दोनों घटनाओं के परिस्थितिगत विवरण अलग हैं और मौजूदा मामले में संबंधित जहाजों के नाम तथा अन्य तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण माहौल
भारत और पाकिस्तान के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे माहौल में दोनों देशों की सैन्य इकाइयों से जुड़ी कोई भी अप्रत्याशित घटना कूटनीतिक स्तर पर तत्काल ध्यान खींचती है। अरब सागर दोनों देशों के लिए रणनीतिक और समुद्री दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां नौसैनिक गतिविधियां लगातार होती रहती हैं।

मौजूदा घटना में भारत ने सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनयिक माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को समुद्र में सावधानी बरतने और मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करने की बात कही गई है।
घटना के बाद भारत ने क्या कहा
भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया है कि समुद्र में दोनों देशों की सैन्य इकाइयों को उचित सावधानी बरतनी चाहिए। जहाजों को सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच लागू द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करना चाहिए।
भारत का कहना है कि ऐसी सावधानियों से भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। फिलहाल टक्कर के कारण किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन घटना को लेकर कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
आगे क्या होगा, इस पर नजर
अरब सागर में हुई इस घटना के बाद अब निगाह पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, घटना को लेकर भारत ने अपना विरोध दर्ज करा दिया है। दूसरी ओर, सार्वजनिक रूप से घटना से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सामने नहीं आए हैं।
इस घटना का केंद्र समुद्री सुरक्षा, सैन्य जहाजों के बीच सुरक्षित दूरी और 1991 के द्विपक्षीय समझौते में निर्धारित प्रावधान हैं। दोनों देशों के लिए चुनौती यह होगी कि ऐसी घटनाओं को दोहराने से रोकने के लिए समुद्र में सैन्य इकाइयों के संचालन के दौरान आवश्यक सावधानियां सुनिश्चित की जाएं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
