आलिया भट्ट और शरवरी की ‘अल्फा’ में दमदार एक्शन, लेकिन कमजोर कहानी ने रोकी उड़ान
यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म 'अल्फा' आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है।
Alpha Review in Hindi: यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म ‘अल्फा’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। लंबे समय से इस फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा थी, क्योंकि पहली बार स्पाई यूनिवर्स की कमान दो महिला एजेंटों के हाथों में दिखाई गई है। आलिया भट्ट और शरवरी की जोड़ी, बॉबी देओल का दमदार विलेन अवतार और बड़े पैमाने पर फिल्माए गए एक्शन सीक्वेंस इस फिल्म को खास बनाते हैं। हालांकि, शानदार विजुअल्स और हाई-ऑक्टेन एक्शन के बावजूद फिल्म की कमजोर कहानी और ढीला स्क्रीनप्ले इसे उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचा पाते, जिसकी दर्शकों को उम्मीद थी।
बड़े पैमाने पर शुरू होती है कहानी
करीब 140 मिनट लंबी फिल्म की शुरुआत वर्ष 1999 से होती है। भारतीय सेना के दो अधिकारी विक्रांत कौल और फतेह सिंह लाखावत देश के लिए एक ऐसी गुप्त स्पेशल फोर्स तैयार करने का सपना देखते हैं, जो सामान्य सैनिकों से कई गुना ज्यादा ताकतवर हो। इसी सोच से ‘टीम अल्फा’ का जन्म होता है।
इस मिशन के तहत एक विशेष ‘अल्फा सीरम’ तैयार किया जाता है, जो इंसान की ताकत, रिफ्लेक्स और रिकवरी क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। लेकिन कहानी उस समय नया मोड़ लेती है, जब विक्रांत अपनी गर्भवती पत्नी की जान बचाने के लिए यही सीरम उसे दे देता है। यही फैसला आगे चलकर उसकी जिंदगी बदल देता है।
फतेह सिंह लाखावत इस फैसले का विरोध करता है। उसका मानना होता है कि यह सीरम केवल सेना के लिए था और इसका निजी इस्तेमाल देश के साथ विश्वासघात है। इसके बाद वह विक्रांत की नवजात बेटी को उससे अलग कर देता है और उसे यह विश्वास दिला देता है कि उसकी बेटी अब जीवित नहीं है।
दो बहनों की कहानी बनती है फिल्म की सबसे बड़ी कड़ी
समय बीतने के साथ वही बच्ची सीता बनकर बड़ी होती है, जिसका किरदार आलिया भट्ट ने निभाया है। सीता बचपन से ही फतेह सिंह की निगरानी में एक बेहद खतरनाक स्पाई एजेंट के रूप में तैयार होती है। वह बिना सवाल किए देश के दुश्मनों के खिलाफ मिशन पूरे करती रहती है।

दूसरी ओर स्पेन में पली-बढ़ी दुर्गा, जिसका किरदार शरवरी निभाती हैं, कहानी में नई परत जोड़ती है। दोनों बहनों का आमना-सामना फिल्म का अहम मोड़ बनता है। इसके बाद कहानी ‘ऑपरेशन ओडिसी’ नाम के रहस्यमयी मिशन की ओर बढ़ती है, जहां कई पुराने राज खुलते हैं।
फिल्म का क्लाइमैक्स इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द घूमता है कि आखिर फतेह सिंह का असली मकसद क्या है, ऑपरेशन ओडिसी का रहस्य क्या है और क्या सीता अपने गुरु के खिलाफ खड़ी हो पाएगी।
आलिया भट्ट ने एक्शन में दिखाई पूरी ताकत
फिल्म में आलिया भट्ट ने एक्शन प्रधान भूमिका निभाई है और साफ नजर आता है कि उन्होंने इस किरदार के लिए कड़ी मेहनत की है। फाइट सीक्वेंस, स्टंट और फिजिकल परफॉर्मेंस में उनका आत्मविश्वास दिखाई देता है। कई एक्शन दृश्यों में वह पूरी तरह किरदार में नजर आती हैं।

हालांकि, जहां फिल्म भावनात्मक गहराई मांगती है, वहां उनका किरदार उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाता। कहानी और स्क्रीनप्ले भी उनके इमोशनल सफर को मजबूत बनाने में सफल नहीं होते।
शरवरी ने सीमित स्क्रीन टाइम में छोड़ी छाप
शरवरी को फिल्म में अपेक्षाकृत कम स्क्रीन स्पेस मिला है, लेकिन जितनी देर भी वह पर्दे पर रहती हैं, अपने किरदार के साथ न्याय करती हैं। उनका एक्शन और स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावशाली है।

आलिया और शरवरी के बीच फिल्माया गया पहला फाइट सीक्वेंस फिल्म के सबसे बेहतरीन हिस्सों में गिना जा सकता है। दोनों कलाकारों की ऊर्जा और कैमरा वर्क इस दृश्य को खास बनाते हैं।
बॉबी देओल बने फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
अगर फिल्म में सबसे ज्यादा कोई प्रभावित करता है तो वह हैं बॉबी देओल। फतेह सिंह लाखावत के किरदार में उनका शांत लेकिन खतरनाक अंदाज कहानी को मजबूती देता है।

उनका अभिनय संवादों से ज्यादा आंखों और हावभाव के जरिए असर छोड़ता है। इंटरवल के बाद उनके किरदार से जुड़ा बड़ा खुलासा फिल्म में नई जान डाल देता है। यही हिस्सा फिल्म को कुछ समय के लिए रोमांचक स्पाई थ्रिलर का एहसास कराता है।
अनिल कपूर का संतुलित अभिनय
अनिल कपूर विक्रांत कौल की भूमिका में सधे हुए नजर आते हैं। उनका किरदार कहानी की नींव तैयार करता है। हालांकि उन्हें बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला, लेकिन जितना मिला उसमें उन्होंने प्रभाव छोड़ा।

फिल्म के अंतिम हिस्से में ऋतिक रोशन का कैमियो भी रखा गया है, जो यशराज स्पाई यूनिवर्स के प्रशंसकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज साबित हो सकता है। यह कैमियो आने वाली फिल्मों के लिए उत्सुकता भी पैदा करता है।
डायरेक्शन में दिखा बड़ा विजन
निर्देशक शिव रवैल ने फिल्म को इंटरनेशनल स्पाई थ्रिलर जैसा लुक देने की पूरी कोशिश की है। बड़े सेट, विदेशी लोकेशन, हाई क्वालिटी सिनेमैटोग्राफी और स्टाइलिश एक्शन फिल्म को विजुअली शानदार बनाते हैं।
सेपिया टोन और बड़े पैमाने पर शूट किए गए एक्शन सीक्वेंस दर्शकों को प्रभावित करते हैं। कई दृश्य हॉलीवुड शैली की फिल्मों की याद दिलाते हैं।
लेकिन जहां निर्देशन मजबूत नजर आता है, वहीं कहानी और स्क्रीनप्ले कमजोर पड़ जाते हैं। कई घटनाएं बिना पर्याप्त आधार के तेजी से आगे बढ़ती हैं, जिससे दर्शक किरदारों से पूरी तरह जुड़ नहीं पाते।
स्क्रीनप्ले बना सबसे बड़ी कमजोरी
फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष इसकी राइटिंग है। कहानी का कॉन्सेप्ट नया और दिलचस्प है, लेकिन उसे प्रभावशाली तरीके से पेश नहीं किया गया।
कई ट्विस्ट ऐसे हैं जो कागज पर बेहतर लग सकते थे, लेकिन स्क्रीन पर अपेक्षित रोमांच पैदा नहीं कर पाते। कुछ जगहों पर स्पाई एजेंट्स को जरूरत से ज्यादा सुपरह्यूमन दिखाया गया है, जिससे कहानी वास्तविकता से दूर जाती महसूस होती है।
पहला हाफ अपेक्षाकृत धीमा है और कई हिस्सों में फिल्म अपनी पकड़ खो देती है। इंटरवल के बाद कहानी जरूर बेहतर होती है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले अंत तक फिल्म की गति बनाए रखने में सफल नहीं होता।
म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर एक्शन दृश्यों को मजबूती देता है और स्पाई थ्रिलर वाला माहौल बनाने में मदद करता है।
हालांकि, गानों की बात करें तो कोई भी गीत ऐसा नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद लंबे समय तक याद रह सके। संगीत कहानी का सहायक जरूर बनता है, लेकिन अलग पहचान नहीं बना पाता।
क्या ‘अल्फा’ देखने लायक है?
‘अल्फा’ एक ऐसी फिल्म है, जिसमें बड़े पैमाने का एक्शन, शानदार सिनेमैटोग्राफी और दमदार कलाकार मौजूद हैं। बॉबी देओल का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है, जबकि आलिया भट्ट ने भी एक्शन रोल में अपनी क्षमता साबित करने की कोशिश की है।
हालांकि, यदि आप एक ऐसी स्पाई थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें कहानी, भावनाएं और रोमांच बराबरी से मौजूद हों, तो यह फिल्म पूरी तरह संतुष्ट नहीं करती। इंटरवल के बाद फिल्म कुछ समय के लिए रफ्तार पकड़ती है, लेकिन कमजोर लेखन उसकी सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।
Alpha Movie Review Final Verdict
अगर आप यशराज स्पाई यूनिवर्स के प्रशंसक हैं, बड़े पर्दे पर स्टाइलिश एक्शन और शानदार विजुअल्स देखना पसंद करते हैं, तो ‘अल्फा’ एक बार जरूर देखी जा सकती है। लेकिन यदि आपकी प्राथमिकता मजबूत कहानी, गहरी भावनाएं और लगातार रोमांच है, तो यह फिल्म आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
रेटिंग: 3/5 स्टार
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
