ईंट भट्ठा मालिकों को बड़ी राहत, वन टाइम सेटलमेंट करने पर नहीं लगेगा ब्याज
ईंट भट्ठा मालिकों को राहत, मूल राशि जमा कर बकाया होगा खत्म
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। ईंट भट्ठा मालिकों के लिए बिहार सरकार ने बड़ी राहत का फैसला लिया है। बिहार कैबिनेट ने खान एवं भूतत्व विभाग से जुड़े बकाये की वसूली के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी है। इस व्यवस्था के तहत 2024-25 तक बकाया रखने वाले ईंट भट्ठा मालिकों को ब्याज की राशि जमा करने से राहत मिलेगी। उन्हें निर्धारित बकाये की मूल राशि जमा करनी होगी, जिसके बाद उन्हें बकायेदारों की सूची से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार के इस फैसले से उन ईंट भट्ठा कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके खिलाफ विभागीय बकाये को लेकर वसूली की कार्रवाई चल रही है। योजना का उद्देश्य लंबे समय से लंबित बकाये की वसूली करना और संबंधित मामलों का तेजी से निपटारा करना है।
ईंट भट्ठा कारोबारियों के लिए क्या है योजना
वन टाइम सेटलमेंट योजना के तहत 2024-25 तक खान एवं भूतत्व विभाग की राशि बकाया रखने वाले ईंट भट्ठा मालिकों को एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत बकाया राशि जमा करनी होगी। इसमें कुल बकाये में शामिल ब्याज की राशि को छोड़कर मूल राशि जमा करने का प्रावधान किया गया है।

यानी जिन कारोबारियों पर विभाग का पैसा बकाया है, उन्हें योजना की शर्तों के अनुसार मूल राशि चुकानी होगी। मूल राशि जमा होने के बाद संबंधित बकायेदार के खिलाफ लोक मांग से जुड़ा बकाया नहीं रहने की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
ब्याज की रकम से मिलेगी राहत
इस योजना का सबसे अहम पहलू ब्याज की राशि को लेकर है। बकाया रकम की वसूली के दौरान मूल राशि के साथ ब्याज भी जुड़ता रहा है। नई व्यवस्था में ब्याज की राशि को छोड़कर शेष मूल राशि जमा करने का प्रावधान किया गया है।
इससे उन ईंट भट्ठा संचालकों पर वित्तीय बोझ कम हो सकता है, जिनके ऊपर लंबे समय से विभागीय बकाया चला आ रहा है। हालांकि, योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित कारोबारी को तय अवधि के भीतर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
तीन महीने तक लागू रहेगी वन टाइम योजना
सरकार की ओर से लाई गई वन टाइम सेटलमेंट योजना की अवधि तीन महीने तय की गई है। इसका मतलब है कि पात्र ईंट भट्ठा मालिकों को इसी अवधि के भीतर योजना का लाभ उठाते हुए बकाया मूल राशि जमा करनी होगी।
तीन महीने की सीमित अवधि तय किए जाने से कारोबारियों के लिए समय पर आवेदन और भुगतान करना महत्वपूर्ण होगा। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद योजना के तहत मिलने वाली राहत का लाभ उपलब्ध रहेगा या नहीं, यह सरकार की आगे की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
ईंट भट्ठा मालिकों को कैसे मिलेगा बकाया से छुटकारा
योजना के तहत मूल राशि जमा करने के बाद संबंधित मामले की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मौजूदा व्यवस्था में जिन मामलों में बकाया राशि को लेकर कार्रवाई चल रही है, उनमें नीलाम पत्र पदाधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
मूल राशि जमा होने के बाद नीलाम पत्र पदाधिकारी यह रिपोर्ट करेंगे कि संबंधित देनदार पर अब कोई लोक मांग बकाया नहीं है। इसके बाद नीलाम पत्र पदाधिकारी की ओर से संबंधित नीलाम पत्रवाद के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इससे बकाये को लेकर चल रहे मामलों को समाप्त करने का रास्ता साफ होगा और संबंधित कारोबारी को विभागीय बकाये के मामले में राहत मिल सकेगी।
सरकार को भी राजस्व मिलने की उम्मीद
वन टाइम सेटलमेंट योजना केवल ईंट भट्ठा कारोबारियों को राहत देने तक सीमित नहीं है। सरकार के लिए भी इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य लंबित राजस्व की वसूली करना है।
लंबे समय से बकाया मामलों में ब्याज और अन्य प्रक्रियाओं के कारण वसूली में समय लग सकता है। ऐसे में मूल राशि जमा कराने की व्यवस्था से सरकार को कम समय में लंबित राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

इस योजना के जरिए सरकार एक तरफ पुराने बकाये की वसूली करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ लंबित नीलाम पत्र मामलों के निपटारे का रास्ता भी आसान हो सकता है।
कारोबारियों के लिए एकमुश्त भुगतान का मौका
ईंट भट्ठा कारोबार से जुड़े लोगों के लिए यह योजना बकाये के निपटारे का एकमुश्त अवसर उपलब्ध कराती है। लंबे समय से बकाया राशि को लेकर चल रही कार्रवाई के बीच मूल रकम जमा कर मामले को खत्म कराने का रास्ता मिल सकता है।
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योजना की तीन महीने की अवधि को देखते हुए पात्र कारोबारियों को समय सीमा और भुगतान से जुड़ी शर्तों पर विशेष ध्यान देना होगा। बकाया राशि की सही जानकारी और संबंधित विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही योजना का लाभ लिया जा सकेगा।
बिहार में ईंट भट्ठा कारोबार को राहत
ईंट भट्ठा उद्योग निर्माण क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण कारोबार है और इससे बड़ी संख्या में लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहते हैं। ऐसे में बकाया राशि को लेकर लंबे समय से चल रही कार्रवाई का असर कारोबारियों पर भी पड़ सकता है।
सरकार की नई वन टाइम सेटलमेंट योजना से पुराने बकाये के मामलों को निपटाने का अवसर मिलेगा। योजना के तहत ब्याज को छोड़कर मूल राशि जमा करने की व्यवस्था से कारोबारियों को वित्तीय राहत मिलने की संभावना है।
फिलहाल योजना की अवधि तीन महीने रखी गई है। अब यह देखना होगा कि इस अवधि में कितने ईंट भट्ठा मालिक बकाया मूल राशि जमा कर योजना का लाभ लेते हैं और सरकार को इससे कितना लंबित राजस्व प्राप्त होता है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
