कैमूर में रिटायर्ड आर्मी कैप्टन से 3 लाख की साइबर ठगी, साइबर थाना ने दो महीने में वापस कराई पूरी रकम

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कैमूर में साइबर ठगों ने रिटायर्ड आर्मी कैप्टन के खाते से उड़ाए ₹3 लाख, साइबर थाना की दो महीने की कार्रवाई के बाद पूरी रकम वापस।

निष्कर्ष भारत संवाददाता कैमूर: बिहार के कैमूर में बढ़ते साइबर अपराध के बीच कैमूर से राहत देने वाली खबर सामने आई है। साइबर ठगों के हाथों करीब 3 लाख बिहार के कैमूर में बढ़ते साइबर अपराध के बीच कैमूर से राहत देने वाली खबर सामने आई है।

साइबर ठगों के हाथों करीब 3 लाख आर्मी कैप्टन की रकम कैमूर साइबर थाना की कार्रवाई के बाद वापस करा दी गई है। करीब दो महीने तक चली तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया के बाद साइबर थाना की टीम ने पीड़ित के खाते में पूरी रकम वापस कराने में सफलता हासिल की।

रकम वापस मिलने के बाद रिटायर्ड कैप्टन ने साइबर डीएसपी नीतू सिंह समेत साइबर थाना की पूरी टीम का आभार जताया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते साइबर थाना की मदद नहीं मिलती तो उनकी मेहनत की कमाई पूरी तरह चली जाती।

बैंक अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने किया फोन

मामला कैमूर जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के परामलपुर गांव का है। यहां रहने वाले रिटायर्ड आर्मी कैप्टन परमा सिंह साइबर ठगी का शिकार हो गए थे।

जानकारी के मुताबिक, 27 जुलाई को परमा सिंह अपने बैंक खाते से जुड़ी एक समस्या के समाधान के लिए भभुआ स्थित SBI शाखा जाने वाले थे। इसी दौरान कथित तौर पर उन्हें एक फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को SBI का अधिकारी बताया।

कॉल करने वाले ने कैप्टन को उनके बैंक खाते से जुड़ी समस्या दूर करने का भरोसा दिया। इसके बाद उन्हें मोबाइल पर एक लिंक खोलकर कुछ प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया।

परमा सिंह ने फोन करने वाले व्यक्ति को बैंक अधिकारी समझकर बताए गए तरीके के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी शुरू कर दी।

लिंक खोलते ही खाते से निकल गए करीब 3 लाख रुपये

साइबर ठगों ने जिस तरीके से कैप्टन को अपने जाल में फंसाया, उसमें लिंक के जरिए उनसे कथित तौर पर कुछ प्रक्रियाएं कराई गईं। इसी दौरान उनके बैंक खाते से करीब तीन लाख रुपये निकाल लिए गए।

लेनदेन होने के कुछ देर बाद जब परमा सिंह को संदेह हुआ और उन्होंने उसी मोबाइल नंबर पर दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो फोन बंद मिला।

इसके बाद उन्हें समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। उनके खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बिना देर किए बैंक से संपर्क किया।

बैंक पहुंचकर कराया खाता बंद

ठगी का पता चलते ही परमा सिंह भगवानपुर स्थित SBI शाखा पहुंचे और बैंक अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने तत्काल अपने बैंक खाते को बंद कराया, ताकि आगे किसी तरह का अनधिकृत लेनदेन न हो सके।

इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत भभुआ साइबर थाना में दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया और ठगी गई रकम की रिकवरी के लिए कार्रवाई शुरू की।

साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती समय में शिकायत करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मामले में भी बैंक और साइबर थाना को समय पर जानकारी मिलने के बाद रकम की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की गई।

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दो महीने की कार्रवाई के बाद वापस मिली रकम

शिकायत मिलने के बाद कैमूर साइबर थाना की टीम ने मामले से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू की। बैंकिंग लेनदेन और रकम की आवाजाही से संबंधित जानकारी जुटाने के साथ आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई।

लगातार कार्रवाई और तकनीकी प्रक्रिया के बाद करीब दो महीने के भीतर रिटायर्ड कैप्टन के तीन लाख रुपये वापस कराने में पुलिस को सफलता मिली।

रकम वापस खाते में आने के बाद परमा सिंह ने साइबर डीएसपी नीतू सिंह और पूरी साइबर थाना टीम का धन्यवाद किया।

उन्होंने पुलिस की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि यदि समय पर साइबर थाना का सहयोग नहीं मिलता तो सेना में नौकरी के दौरान मेहनत से कमाई गई रकम पूरी तरह लुट सकती थी।

रिटायर्ड कैप्टन ने पुलिस टीम का जताया आभार

परमा सिंह ने पुलिस की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि सेना के जवान जिस तरह देश की सेवा करते हैं, उसी तरह पुलिस भी आम नागरिकों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करती है।

उन्होंने साइबर थाना की टीम के प्रति आभार जताया और लोगों से भी साइबर अपराध को लेकर सतर्क रहने की अपील की।

कैमूर साइबर थाना की इस कार्रवाई से उन लोगों को भी राहत की उम्मीद जगी है, जो साइबर ठगी के बाद अपनी रकम वापस पाने के लिए पुलिस और संबंधित एजेंसियों से मदद की उम्मीद करते हैं।

साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सावधान

यह घटना एक बार फिर बताती है कि साइबर ठग किस तरह बैंक अधिकारी बनकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ठग अक्सर बैंक खाता बंद होने, KYC अपडेट, बैंक खाते में समस्या या किसी अन्य तकनीकी परेशानी का हवाला देकर लोगों को फोन करते हैं।

इसके बाद उन्हें किसी लिंक पर क्लिक करने, मोबाइल पर कोई ऐप डाउनलोड करने या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए कहा जा सकता है।

ऐसे किसी भी कॉल पर बैंक अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। OTP, PIN, CVV, ATM कार्ड की जानकारी, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य संवेदनशील बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से भी बचना जरूरी है। बैंक खाते से अनधिकृत रकम निकलने की स्थिति में तुरंत बैंक से संपर्क करने के साथ साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

कैमूर साइबर थाना की कार्रवाई से मिली राहत

कैमूर में रिटायर्ड आर्मी कैप्टन से हुई साइबर ठगी के मामले में दो कैमूर महीने के भीतर तीन लाख रुपये वापस कराया जाना पीड़ित के लिए बड़ी राहत है। साथ ही यह मामला लोगों को यह संदेश भी देता है कि साइबर ठगी होने के बाद घबराने के बजाय तुरंत बैंक और साइबर पुलिस को सूचना देना जरूरी है।

साइबर ठगी कैमूर के मामलों में समय पर शिकायत मिलने से रकम की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है। कैमूर साइबर थाना की कार्रवाई के बाद अब लोगों से भी ऑनलाइन बैंकिंग और अनजान कॉल को लेकर अधिक सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

बैंक अधिकारी बनकर आए फोन और लिंक के झांसे में आकर रिटायर्ड कैप्टन के खाते से करीब 3 लाख रुपये निकल गए थे। शिकायत के बाद साइबर थाना की लगातार कार्रवाई से दो महीने में पूरी रकम वापस मिल गई।

Nishkarsh Bharat

पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट

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