बाजार में फिर मीठी हुई चीनी, 30 फ़ीसदी की गिरावट, 47 रुपये किलों हुआ भाव
चीनी की एक्स-मिल कीमत 30% घटी, खुदरा बाजार में राहत
निष्कर्ष भारत संवाददाता नई दिल्ली। चीनी के दाम में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। सरकार की सख्ती के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमत में करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है। 18 अगस्त को मिल से निकलते समय चीनी का भाव जहां 67 रुपये प्रति किलो था, वहीं सोमवार को यह घटकर 47 रुपये प्रति किलो रह गया। हालांकि, कीमतों में यह गिरावट अभी खुदरा बाजार तक पूरी तरह नहीं पहुंची है।
खुदरा बाजार में शक्कर अब भी 60 रुपये प्रति किलो से ज्यादा के भाव पर बिक रही है। ऐसे में थोक और मिल स्तर पर कीमत घटने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिल पाई है। कारोबारियों के मुताबिक, पुराने स्टॉक की वजह से खुदरा कीमतों में कमी आने में कुछ और दिन लग सकते हैं।
चीनी के दाम घटे, लेकिन बाजार में असर बाकी
शक्कर की एक्स-मिल कीमत में करीब 20 रुपये प्रति किलो की कमी आई है। 18 अगस्त को यह भाव 67 रुपये प्रति किलो था, जो मंगलवार को 47 रुपये प्रति किलो रह गया। यानी कुछ ही दिनों में मिल स्तर पर चीनी लगभग 30 प्रतिशत सस्ती हुई है।
इस गिरावट का सीधा असर अभी दुकानों पर दिखाई नहीं दे रहा है। खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को चीनी के लिए अब भी 60 रुपये से अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। कीमतों में अंतर की सबसे बड़ी वजह पुराने स्टॉक को बताया जा रहा है।
पुराने स्टॉक के कारण चीनी सस्ती होने में देरी
खुदरा कारोबारियों ने जब चीनी महंगे भाव पर खरीदी थी, तब उसका बाजार भाव अलग था। अब यदि वे उसी स्टॉक को कम कीमत पर बेचते हैं तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए कारोबारी मौजूदा स्टॉक को पुरानी कीमत पर ही निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
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बाजार में जैसे-जैसे पुराना स्टॉक खत्म होगा और कम कीमत पर नया माल दुकानदारों तक पहुंचेगा, खुदरा कीमतों में भी गिरावट आने की उम्मीद है।
10 दिन में चीनी के भाव में दिख सकता है बदलाव
सूत्रों के अनुसार खुदरा बाजार में चीनी की कीमत घटने का असर दिखने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं। इसका मतलब है कि एक्स-मिल स्तर पर आई गिरावट का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लगेगा।
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रविवार को खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव करीब 64.23 रुपये प्रति किलोग्राम था। वहीं थोक बाजार में यह लगभग 59.72 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि मिल, थोक और खुदरा बाजार के बीच कीमतों का अंतर अभी बना हुआ है।
चीनी बाजार में कीमतों की तीन तस्वीर
मौजूदा स्थिति को तीन स्तरों पर समझा जा सकता है। मिल से निकलने वाली चीनी का भाव सबसे पहले कम हुआ है। इसके बाद थोक बाजार में कीमतों में बदलाव दिखाई देगा और अंत में इसका असर खुदरा बाजार तक पहुंचेगा।

पुराना स्टॉक इस पूरी प्रक्रिया को धीमा कर रहा है। इसलिए मिल स्तर पर आई तेज गिरावट के बावजूद दुकानों पर कीमतों में उसी अनुपात में कमी नहीं दिख रही है।
सरकार की सख्ती का असर
चीनी की कीमतों में अचानक आई गिरावट को सरकार की सख्ती से जोड़कर देखा जा रहा है। कीमतों पर नियंत्रण रखने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद एक्स-मिल भाव में कमी आई है।
मिल स्तर पर कीमत घटने से बाजार में आगे चलकर खुदरा कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि, उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत कब मिलेगी, यह पुराने स्टॉक के खत्म होने और नए स्टॉक की खरीद कीमत पर निर्भर करेगा।
उपभोक्ताओं को कब मिलेगी राहत?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चीनी के दाम आम लोगों के लिए कब कम होंगे। मौजूदा संकेतों के मुताबिक खुदरा बाजार में तत्काल बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। कारोबारियों के पुराने स्टॉक के खत्म होने के बाद नई खरीद कम कीमत पर होने लगेगी तो दुकानों पर भी भाव नीचे आ सकते हैं।

यदि थोक और एक्स-मिल कीमतों में मौजूदा गिरावट बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिल सकता है। हालांकि, बाजार की वास्तविक कीमत मांग, आपूर्ति और नए स्टॉक की खरीद दर पर भी निर्भर करेगी।
फिलहाल चीनी के बाजार में तस्वीर साफ है—मिल स्तर पर कीमत तेजी से नीचे आई है, लेकिन खुदरा बाजार को इसका फायदा मिलने में अभी समय लगेगा। अगले करीब 10 दिनों में बाजार में नए स्टॉक की आवक बढ़ने के साथ चीनी के खुदरा भाव में कमी दिखाई देने की उम्मीद है।
