बिहार में महिलाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल: छात्र नेता दिलीप कुमार ने सख्त कानून और स्पीडी ट्रायल की मांग की

छात्र नेता दिलीप कुमार

बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष और छात्र नेता दिलीप कुमार ने गुरुवार को पटना स्थित वीरचंद पटेल पथ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की।

नशे के खिलाफ जनजागरूकता से ही मिलेगा समाधान – छात्र नेता दिलीप कुमार

पटना। बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में लगातार सामने आ रही दुष्कर्म, दुर्व्यवहार और हत्या की घटनाओं ने समाज को झकझोर दिया है। इसी मुद्दे को लेकर बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष और छात्र नेता दिलीप कुमार ने गुरुवार को पटना स्थित वीरचंद पटेल पथ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की।

स्पीडी ट्रायल और फांसी की सजा की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिलीप कुमार ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे जघन्य अपराधों पर रोक लगाने के लिए सरकार को सख्त कानून लागू करने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि दुष्कर्म के मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए, ताकि अपराधियों में कानून का डर पैदा हो सके।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के सभी जिलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाना चाहिए। साथ ही न्यायालयों में खाली पड़े जजों के पदों को तुरंत भरा जाए और जजों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा संभव हो सके।

लगातार बढ़ रही हैं अपराध की घटनाएं

छात्र नेता ने हाल के कुछ गंभीर मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ समय पहले दरभंगा में 4-5 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई थी। वहीं नालंदा में एक दलित लड़की के साथ रेप के बाद हत्या का मामला सामने आया था। इसके अलावा हाल ही में नालंदा की एक महिला के साथ दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने समाज में आक्रोश पैदा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि पूर्णिया, कटिहार, सिवान समेत राज्य के लगभग सभी जिलों में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। लगातार बढ़ते अपराधों के कारण महिलाएं और लड़कियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

छात्राओं और कामकाजी महिलाओं में डर का माहौल

दिलीप कुमार ने कहा कि जो लड़कियां घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रही हैं, खासकर गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं, उनके मन में भय का माहौल बना हुआ है। देर शाम बाहर निकलना या अकेले सफर करना उनके लिए जोखिम भरा हो गया है।

उन्होंने कहा कि अपराधियों के मन में कानून का कोई भय नहीं रह गया है, जो इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में सरकार को कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।

पुलिस की जवाबदेही तय करने की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। दिलीप कुमार ने कहा कि कई मामलों में पुलिस की लापरवाही सामने आती है, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनकी जवाबदेही तय की जाए।

नशे पर रोक और जागरूकता अभियान की जरूरत

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में बढ़ते अपराधों के पीछे नशे की भूमिका भी अहम है। सूखे नशे (ड्रग्स) की खरीद-बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए। इसके साथ ही समाज में जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है।

दिलीप कुमार ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज के लोगों, बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों को भी आगे आकर इस समस्या के समाधान में योगदान देना होगा।

अपराधियों का सामाजिक बहिष्कार जरूरी

उन्होंने सुझाव दिया कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध करने वालों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। इससे समाज में एक कड़ा संदेश जाएगा और अपराधियों के मन में डर पैदा होगा।

सरकार से सख्त कदम उठाने की अपील

नीतीश कुमार

छात्र नेता ने सरकार से अपील की कि वह महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील और गंभीर बने। सख्त कानून बनाकर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि अपराधियों का मनोबल टूट सके और राज्य में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये लोग रहे मौजूद

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिलीप कुमार के साथ नेहा परवीन, सहबाज, राजेश, दीपक और प्रवीण भी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।

बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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