जंतर-मंतर हिंसा के बाद सख्त एक्शन! प्रदर्शन में हिंसा करने वालों के पासपोर्ट रद्द करने पर विचार, दिल्ली पुलिस की बड़ी तैयारी

जंतर-मंतर हिंसा

नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। हिंसा में शामिल पाए गए लोगों के पासपोर्ट रद्द करने पर भी विचार किया जा रहा है।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है। पुलिस उन लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है जो जांच में प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमले में सीधे तौर पर शामिल पाए जाएंगे। इसी क्रम में ऐसे आरोपियों के पासपोर्ट रद्द कराने या पासपोर्ट संबंधी कार्रवाई शुरू करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में हिंसक प्रदर्शनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से एक निवारक उपाय के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।

क्या हुआ था जंतर-मंतर पर?

जानकारी के अनुसार, नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कई दिनों से जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। अधिकांश दिनों तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बुधवार रात स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद हालात बिगड़ गए।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, डंडों और अन्य वस्तुओं से हमला किया तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया।

घायल पुलिस अधिकारी ने क्या बताया?

घटना में घायल हुए इंस्पेक्टर नंद किशोर सिंह ने बताया कि वह ड्यूटी पर जा रहे थे, तभी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मौजूद थे। उनके अनुसार, वहां लगभग 4,000 से 5,000 लोगों की भीड़ थी, जो सरकार और पुलिस के खिलाफ नारे लगा रही थी।

उन्होंने बताया कि भीड़ के कुछ लोगों ने उन पर लाठियों, डंडों, पत्थरों और अन्य नुकीली वस्तुओं से हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि वह वर्दी में थे, इसके बावजूद उन पर हमला किया गया। किसी तरह वहां से निकलकर उन्होंने अपनी जान बचाई। इस हमले में उन्हें चोटें आईं और बाद में उनका उपचार कराया गया।

पुलिस ने शुरू की पहचान की प्रक्रिया

दिल्ली पुलिस ने हिंसा के बाद जांच तेज कर दी है। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके अलावा ड्रोन फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, मीडिया क्लिप और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है ताकि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की भूमिका हिंसा, पथराव, पुलिस पर हमला या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में सामने आएगी, उनके खिलाफ भारतीय कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी, आपराधिक मुकदमा और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी अपनाई जाएंगी।

पासपोर्ट रद्द करने पर क्यों हो रहा विचार?

सूत्रों के अनुसार, जांच में हिंसा के मुख्य आरोपियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ पासपोर्ट संबंधी कार्रवाई की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सभी नागरिकों को है, लेकिन हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सुरक्षा बलों पर हमला किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

हालांकि, किसी व्यक्ति का पासपोर्ट रद्द या निरस्त करने की प्रक्रिया संबंधित कानूनों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के अधीन होती है। केवल पुलिस के विचार से पासपोर्ट स्वतः रद्द नहीं हो जाता। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा में अंतर

लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन जब किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़, पथराव या सुरक्षा बलों पर हमला होता है, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति हिंसक घटनाओं में शामिल नहीं है, तो उसके खिलाफ केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। जांच का उद्देश्य वास्तविक दोषियों की पहचान करना होता है।

आगे क्या होगा?

दिल्ली पुलिस फिलहाल घटना की विस्तृत जांच कर रही है। हिंसा से जुड़े सभी वीडियो, डिजिटल साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों की भूमिका के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने पुलिस पर हमला किया, दंगा फैलाया या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, तो उसके खिलाफ भारतीय दंड कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, आवश्यकता पड़ने पर पासपोर्ट से संबंधित वैधानिक कार्रवाई के लिए भी संबंधित प्राधिकरण से संपर्क किया जा सकता है।

जंतर-मंतर पर नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि लोकतांत्रिक विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। दिल्ली पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंसा में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर लिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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