पटना: जेडीयू ऑफिस में डिप्टी सीएम विजय चौधरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, ‘3C नीति पर कोई समझौता नहीं’

डिप्टी सीएम विजय चौधरी

पटना में जेडीयू (JDU) कार्यालय में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने राज्य सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को लेकर विस्तार से बात की।

पटना में जेडीयू (JDU) कार्यालय में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने राज्य सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने अल्पसंख्यक समाज को एकजुट रखने पर जोर देते हुए कहा कि मौजूदा सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर काम कर रही है और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

अल्पसंख्यक समाज को भरोसा देने की कोशिश

डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का उद्देश्य हर वर्ग को साथ लेकर चलना है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की नीतियां समावेशी हैं और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों की पूरी सुरक्षा की जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विजय चौधरी ने कहा कि मौजूदा सरकार मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व में प्रभावी ढंग से काम कर रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार का रास्ता पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा तय किए गए सिद्धांतों पर आधारित है।

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार उन्हीं नीतियों और सिद्धांतों का पालन कर रही है, जो पहले से स्थापित हैं। विकास और सामाजिक समरसता हमारी प्राथमिकता है।”

‘3C नीति’ पर सख्त रुख

डिप्टी सीएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में “3C नीति” (Crime, Corruption, Communalism) पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

विजय चौधरी ने कहा, “3C हमारी सरकार की रीढ़ है। अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है, और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।”

विपक्ष पर लगाया आरोप

डिप्टी सीएम ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकारें केवल “माहौल बनाने” का काम करती थीं, खासकर अल्पसंख्यक समाज के मुद्दे पर। उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार के पहले अल्पसंख्यकों के लिए ठोस काम नहीं हुए।

उन्होंने कहा, “आज जो विकास दिख रहा है, वह जमीनी स्तर पर काम करने का नतीजा है, न कि सिर्फ बयानबाजी का।”

CAA और वक्फ कानून पर सफाई

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और वक्फ संशोधन कानून को लेकर भी सवाल उठे। इस पर विजय चौधरी ने कहा कि इन मुद्दों पर देशभर में बेवजह हंगामा किया गया।

उन्होंने कहा, “पिछले आठ वर्षों में किसी भी अल्पसंख्यक की नागरिकता नहीं छीनी गई है। लोगों को इन मुद्दों पर गुमराह किया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पारदर्शिता और कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है।

मतदाता सूची और SIR पर स्थिति स्पष्ट

मतदाता सूची और SIR (Special Intensive Revision) को लेकर फैल रही अफवाहों पर भी डिप्टी सीएम ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से गलत प्रचार है कि अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे।

विजय चौधरी ने कहा, “किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होगा। विपक्ष जानबूझकर भ्रम फैला रहा है ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके।”

टोपी विवाद पर हल्का तंज

मुख्यमंत्री के जनता दरबार में टोपी नहीं पहनने को लेकर उठे विवाद पर विजय चौधरी ने हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “अगर टोपी से सरकार का प्रदर्शन मापा जाता है, तो हमें 2-4 टोपी पहना दीजिए।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का मूल्यांकन उसके काम और प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए, न कि प्रतीकों के आधार पर।

2025 के जनादेश का सम्मान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में विजय चौधरी ने कहा कि 2025 के चुनाव में जनता ने एक बार फिर Nitish Kumar के नेतृत्व पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस बात को दोहरा चुके हैं कि सरकार उसी जनादेश के अनुसार काम कर रही है।

उन्होंने कहा, “जनता का विश्वास हमारे लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। हम उसी के अनुरूप नीतियां बना रहे हैं और लागू कर रहे हैं।”

पटना में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बिहार सरकार ने साफ संदेश देने की कोशिश की है कि वह समावेशी विकास, कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर प्रतिबद्ध है। डिप्टी सीएम विजय चौधरी के बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ अपनी नीतियों को मजबूती से आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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