पटना में बंद कमरे में हुई नीतीश-ललन की मुलाकात, UCC पर मंथन; क्या बिहार में होगा बड़ा खेला?
नीतीश और ललन सिंह की 10 मिनट की मुलाकात, UCC पर बढ़ा सस्पेंस
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में नीतीश और ललन सिंह मुलाकात ने बिहार की सियासत में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बिहार एनडीए में सामने आ रहे अलग-अलग रुख के बीच मंगलवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के पटना स्थित आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई।
मुलाकात के बाद नीतीश कुमार वहां से वापस लौट गए। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से बातचीत के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि इस संक्षिप्त मुलाकात को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा UCC और जदयू के रुख को लेकर है।
नीतीश-ललन की अचानक हुई मुलाकात ने बढ़ाया सियासी सस्पेंस
जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार अपने आवास पर बैठक करने के बाद सीधे ललन सिंह के घर पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। करीब 10 मिनट बाद नीतीश कुमार वहां से निकल गए।
समय भले ही कम रहा, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। खासकर इसलिए कि पिछले कुछ दिनों से बिहार में UCC को लेकर एनडीए के भीतर अलग-अलग आवाजें सामने आ रही हैं।
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हालांकि, केवल मुलाकात के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि दोनों नेताओं ने किस मुद्दे पर चर्चा की। आधिकारिक तौर पर बातचीत का एजेंडा सामने नहीं आया है। ऐसे में UCC समेत दूसरे राजनीतिक और नीतिगत विषयों पर चर्चा की संभावना को फिलहाल सियासी कयास के तौर पर ही देखा जा रहा है।
नीतीश के सामने UCC पर बड़ा सवाल
UCC को लेकर बिहार की राजनीति पहले ही गरम है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 से पहले भाजपा और एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य बताए जाने की बात कही है। इसके बाद बिहार में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के रुख को लेकर बहस शुरू हो गई है।

जदयू ने बिहार में UCC लागू करने के सवाल पर अपनी असहमति स्पष्ट की है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से कहा गया है कि बिहार में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा। ऐसे में नीतीश कुमार और ललन सिंह की मुलाकात को UCC के मौजूदा विवाद से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि बैठक में UCC ही मुख्य विषय था।
जदयू पहले ही बता चुका है अपना रुख
UCC को लेकर जदयू का रुख हाल के दिनों में स्पष्ट रूप से सामने आया है। पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा है कि बिहार में समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में पार्टी के रुख और बिहार में इसे लागू करने के सवाल को अलग-अलग तरीके से देखा गया है।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा के भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पार्टी का पक्ष रखने की बात कही गई है। ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच इस विषय पर चर्चा स्वाभाविक रूप से राजनीतिक महत्व रखती है। इसी पृष्ठभूमि में नीतीश की ललन सिंह से मुलाकात ने अटकलों को और बढ़ा दिया है।
ललन सिंह से नीतीश की मुलाकात क्यों अहम?
ललन सिंह जदयू के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार का उनके आवास जाकर मिलना राजनीतिक रूप से सामान्य संगठनात्मक संवाद भी हो सकता है। लेकिन जिस समय यह मुलाकात हुई, उसने इसे लेकर अतिरिक्त राजनीतिक चर्चा पैदा कर दी है।
बिहार में एक तरफ UCC को लेकर भाजपा का रुख सामने है, तो दूसरी तरफ जदयू ने इस मुद्दे पर अलग राय रखी है। इसके अलावा राजद ने भी जदयू को एनडीए से अलग होकर अपने साथ आने का राजनीतिक न्योता दिया है। ऐसे माहौल में जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं की बंद कमरे में हुई बातचीत को लेकर स्वाभाविक तौर पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिक गई हैं।
राजद के ऑफर से भी गर्म है बिहार की सियासत
UCC विवाद के बीच राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने जदयू को अपने साथ आने का खुला प्रस्ताव दिया है। उन्होंने UCC का विरोध करते हुए राजद और जदयू के साथ मिलकर सरकार बनाने की बात कही है। राजद के इस बयान ने पहले से चल रही राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। हालांकि, जदयू की ओर से इस प्रस्ताव को स्वीकार करने या गठबंधन बदलने का कोई संकेत सामने नहीं आया है।
इसलिए मौजूदा स्थिति में इसे राजद की राजनीतिक पहल के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा। नीतीश कुमार या जदयू की ओर से गठबंधन को लेकर कोई नया निर्णय सामने आने तक किसी बड़े बदलाव की अटकलों को निश्चित राजनीतिक घटनाक्रम नहीं माना जा सकता।
एनडीए में सहयोगी दलों के अलग-अलग सुर
बिहार एनडीए में UCC को लेकर सभी सहयोगी दलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। भाजपा इस मुद्दे के समर्थन में है, जबकि जदयू ने बिहार में इसके विरोध की बात कही है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि पहले UCC का ड्राफ्ट सार्वजनिक होना चाहिए। उसके बाद सभी पक्षों के हितों को देखते हुए पार्टी अपना रुख तय करेगी। राष्ट्रीय लोक मोर्चा का रुख भी व्यापक विचार-विमर्श के पक्ष में दिखाई दे रहा है, जबकि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का रुख अपेक्षाकृत सकारात्मक बताया जा रहा है। इस तरह एनडीए के भीतर UCC पर एकमत तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।
क्या बिहार में होगा कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव?
नीतीश ललन सिंह मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। लेकिन फिलहाल इसका जवाब केवल अटकलों तक सीमित है।

करीब 10 मिनट की बातचीत के बाद दोनों नेताओं की ओर से कोई ऐसा बयान नहीं आया है, जिससे यह संकेत मिले कि किसी बड़े राजनीतिक फैसले पर चर्चा हुई है। इसलिए इस मुलाकात को सीधे तौर पर गठबंधन में बदलाव या किसी नए राजनीतिक समीकरण से जोड़ना जल्दबाजी होगी। फिर भी, मौजूदा राजनीतिक माहौल में छोटी से छोटी गतिविधि भी चर्चा का विषय बन रही है।
अब जदयू के अगले कदम पर नजर
मुलाकात के बाद राजनीतिक नजरें अब जदयू के अगले कदम पर टिक गई हैं। UCC को लेकर पार्टी का रुख पहले से स्पष्ट है और संजय झा के स्तर पर केंद्र से बातचीत की बात भी कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यदि जदयू की ओर से UCC पर कोई नया बयान आता है, तो उसकी अहमियत बढ़ जाएगी।
साथ ही राजद के ऑफर और एनडीए के भीतर सहयोगी दलों के अलग-अलग रुख के बीच नीतीश कुमार की रणनीति भी बिहार की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बनी रहेगी। फिलहाल नीतीश कुमार और ललन सिंह की बंद कमरे में हुई 10 मिनट की मुलाकात ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं, लेकिन इन सवालों के जवाब अभी सामने आना बाकी है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
