पटना में ऑटो पर नया नियम लागू, जोन और कलर कोड से चलेंगे ऑटो, बिना रजिस्ट्रेशन दौड़े तो होगी कार्रवाई
पटना में ऑटो परमिट की नई व्यवस्था, जोन-रूट से होगा परिचालन
निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। पटना में रोजाना लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाने के लिए ऑटो और ई-रिक्शा के परिचालन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। पटना के साथ दानापुर, खगौल और फुलवारीशरीफ नगर परिषद क्षेत्रों में भी ऑटो का परिचालन अब जोन और रूट आधारित परमिट व्यवस्था के तहत करने की योजना है। इसके साथ ही वाहनों की पहचान के लिए कलर कोड भी लागू किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि ऑटो के बेतरतीब परिचालन और सड़क पर कहीं भी रुककर सवारी बैठाने की आदत से ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है। नई व्यवस्था के जरिए वाहनों की संख्या और उनके रूट को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी, ताकि सड़कों पर अनावश्यक दबाव कम हो और यातायात सुचारु हो सके।
जोन चुन सकेंगे ऑटो चालक
पटना ऑटो परमिट नियम की नई व्यवस्था में चालकों को अपनी सुविधा के अनुसार एक जोन चुनने का विकल्प मिलेगा। इसके साथ ही चुने गए जोन में अधिकतम तीन रूट के लिए आवेदन किया जा सकेगा। इसके लिए विशेष मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके माध्यम से पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
अगर किसी रूट पर निर्धारित क्षमता से ज्यादा आवेदन आते हैं तो सभी आवेदनों को उसी रूट पर परमिट नहीं दिया जाएगा। अतिरिक्त आवेदकों को उपलब्ध दूसरे रूट पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी। इससे एक ही मार्ग पर जरूरत से ज्यादा ऑटो जमा होने की स्थिति को रोकने में मदद मिलेगी।
26 प्रमुख मार्गों की तय होगी क्षमता
प्रशासन ने शहर के 26 प्रमुख मार्गों की क्षमता का आकलन कर लिया है। इन मार्गों पर करीब 24 हजार ऑटो को नियमित परमिट देने की योजना है। रूट की क्षमता के अनुसार ही वाहनों की संख्या तय की जाएगी।

इसके अलावा करीब चार हजार ऑटो को फ्री परमिट दिए जाने की योजना है। इन वाहनों को किसी एक रूट तक सीमित नहीं रखा जाएगा और ये जरूरत के अनुसार अलग-अलग मार्गों पर जा सकेंगे। हालांकि इन फ्री परमिट वाले ऑटो का इस्तेमाल सामान्य यात्री परिवहन के लिए नहीं किया जाएगा।
पटना में फ्री परमिट वाहनों के इस्तेमाल पर शर्त
फ्री परमिट वाले लगभग चार हजार ऑटो का इस्तेमाल मरीजों और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन वाहनों से सामान्य यात्रियों को बैठाकर व्यावसायिक परिचालन की अनुमति नहीं होगी।
यदि नियमों की अनदेखी कर इन वाहनों का इस्तेमाल सामान्य यात्री ढोने में किया गया तो संबंधित वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य आपात परिस्थितियों में लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
बिना रजिस्ट्रेशन ऑटो पर कसेगा शिकंजा
नई व्यवस्था में बिना रजिस्ट्रेशन सड़क पर चल रहे ऑटो और ई-रिक्शा पर भी कार्रवाई की तैयारी है। प्रशासन ऐसे वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही नाबालिगों के ऑटो या ई-रिक्शा चलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने वालों पर भी सख्ती की जाएगी। जरूरत पड़ने पर नियम तोड़ने वाले वाहनों को जब्त किया जा सकता है। प्रशासन का कहना है कि सड़क पर अवैध पार्किंग और अनियंत्रित वाहन खड़े होने से यातायात व्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है।
चौराहों पर बढ़ेगी ट्रैफिक जवानों की तैनाती
पटना के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक जवानों की संख्या बढ़ाने का निर्देश भी दिया गया है। इसका मकसद व्यस्त समय में यातायात को नियंत्रित करना और वाहन चालकों द्वारा नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई करना है।
देखिये ख़बर हमारे यूट्यूब चैनल पर भी: Sanjay Singh पर इल्ज़ाम लगाने वाले अपने गिरेबान में झाँक ले,मंत्री ने कर दिया मानहानि का मुकदमा…
ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर भी रोक रहेगी। अधिकारियों का मानना है कि ट्रैफिक जवानों को ड्यूटी के दौरान पूरी तरह सड़क और वाहनों की आवाजाही पर ध्यान देना चाहिए। इससे चौराहों पर निगरानी बेहतर होने की उम्मीद है।
16 लाख ई-चालान का भी मुद्दा
बैठक में लंबित ई-चालान का मामला भी सामने आया। डीटीओ उपेंद्र पाल के अनुसार वर्ष 2022 से अब तक करीब 16 लाख ई-चालान लंबित हैं, जिनका जुर्माना अभी तक जमा नहीं किया गया है।
अब ऐसे वाहन मालिकों और चालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है, जिन्होंने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के बाद जुर्माना जमा नहीं किया है। गंभीर मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
पटना में तय होंगे ऑटो के स्टॉपेज
ऑटो और सिटी बसों के अचानक सड़क पर रुककर सवारी बैठाने की समस्या को खत्म करने के लिए निर्धारित स्टॉपेज बनाए जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत सिटी बस और ऑटो को यात्रियों को बैठाने और उतारने के लिए तय स्थानों पर ही रुकना होगा।

अधिकारियों का मानना है कि सड़क के बीच या चौराहों के पास अचानक ऑटो रोकने से पीछे चल रहे वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है और कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। निर्धारित स्टॉपेज से इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
जोन, रूट और कलर कोड से बदलेगा परिचालन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पटना की सड़कों पर ऑटो परिचालन का तरीका पहले की तुलना में अलग दिखाई देगा। वाहनों के लिए जोन और रूट निर्धारित होंगे। कलर कोड के जरिए भी वाहनों की पहचान आसान बनाने की तैयारी है।
इसे भी पढ़िए…बिहार में भारी बारिश, 3 दिन का अलर्ट; पटना भी प्रभावित, पूर्वानुमान जारी
प्रशासन का लक्ष्य केवल ऑटो की संख्या नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि पूरे यातायात तंत्र को व्यवस्थित करना है। यदि परमिट व्यवस्था, निर्धारित रूट और स्टॉपेज प्रभावी तरीके से लागू होते हैं तो व्यस्त इलाकों में वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है।
दानापुर, खगौल और फुलवारीशरीफ में भी असर
इस व्यवस्था का असर केवल पटना नगर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। दानापुर, खगौल और फुलवारीशरीफ नगर परिषद क्षेत्र भी प्रस्तावित व्यवस्था में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भी ऑटो और ई-रिक्शा के परिचालन को व्यवस्थित करने की तैयारी है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से पूरी व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मोबाइल ऐप, परमिट, रूट क्षमता, स्टॉपेज और कलर कोड से जुड़े प्रावधान लागू होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।
प्रशासन की कोशिश है कि ऑटो परिचालन में मनमानी खत्म हो, सड़क पर वाहनों का दबाव नियंत्रित रहे और आम लोगों को रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिले। नई व्यवस्था सफल रही तो पटना की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
