पटना यूनिवर्सिटी विवाद: छात्र नेता शांतनु शेखर का वीडियो संदेश, आज करेंगे आत्मसमर्पण का ऐलान
शांतनु शेखर से जुड़ा पटना यूनिवर्सिटी विवाद अब और गहराता जा रहा है।
पटना: शांतनु शेखर से जुड़ा पटना यूनिवर्सिटी विवाद अब और गहराता जा रहा है। 30 मार्च को हुए हंगामे के बाद दर्ज FIR और पुलिस कार्रवाई के बीच छात्र राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच फरार बताए जा रहे छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
30 मार्च को पटना यूनिवर्सिटी में नए प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन (कला संकाय) के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए थे।

कार्यक्रम के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और ‘गो बैक’ के नारे लगाए। पुलिस के अनुसार, इस दौरान छात्रों ने न केवल नारेबाजी की बल्कि पुलिस के काम में बाधा डालते हुए बदतमीजी और हाथापाई भी की।
FIR और गिरफ्तारी
घटना के बाद पटना पुलिस ने छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर समेत 6 छात्रों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अनुराग कुमार को नौबतपुर से और काउंसलर मोहम्मद एहसानुल्लाह को अशोक राजपथ से गिरफ्तार कर लिया है। वहीं शांतनु शेखर सहित अन्य आरोपी छात्र फरार बताए जा रहे थे।
शांतनु शेखर का वीडियो संदेश
वीडियो संदेश में शांतनु शेखर ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन यह सोचता है कि SIT और IB की टीम लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या उनका एनकाउंटर करा दिया जाएगा, तो वे इसके लिए भी तैयार हैं।

उन्होंने कहा, “अगर छात्रों के हक की बात करना आपको पसंद नहीं है, तो मुझे गोली मार दीजिए। मैं न सरकार से डरता हूं और न प्रशासन से।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों की जायज मांगों को दबाने के लिए दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है, जो पूरी तरह गलत और अलोकतांत्रिक है।
RSS पर भी टिप्पणी

शांतनु शेखर ने अपने बयान में उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा का नाम लेते हुए कहा कि वे पटना यूनिवर्सिटी को RSS का केंद्र नहीं बनने देंगे। उनका कहना है कि छात्र राजनीति को दबाने की कोशिश की जा रही है।
छात्रों के अधिकारों की लड़ाई का दावा
उन्होंने अपने संदेश में साफ कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ छात्रों की नहीं बल्कि पूरे छात्र समुदाय के सम्मान और अधिकारों की है। उनका दावा है कि प्रशासन छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है, जबकि वे केवल न्याय और अधिकार की मांग कर रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
शांतनु ने कहा कि पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है, लेकिन उन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्होंने इसे छात्रों को डराने की रणनीति बताया।
उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी निर्दोष छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को तुरंत वापस लिया जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार ऐसा करती है तो वे स्वयं कानून का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण करेंगे।
9 अप्रैल को आत्मसमर्पण का ऐलान
महत्वपूर्ण बात यह है कि 9 अप्रैल, जो NSUI स्थापना दिवस भी है, के मौके पर शांतनु शेखर ने कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम यह संदेश देने के लिए है कि छात्र नेतृत्व डरता नहीं है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखता है।
उन्होंने कहा, “जब तक हमारे साथियों को न्याय नहीं मिलेगा, हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हम हर छात्र के हक के लिए अंत तक खड़े रहेंगे।”
राजनीतिक और छात्र संगठनों में हलचल
इस पूरे मामले ने बिहार की छात्र राजनीति को गरमा दिया है। जहां एक तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं छात्र संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में देख रहे हैं।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें 9 अप्रैल पर टिकी हैं, जब शांतनु शेखर कोर्ट में आत्मसमर्पण करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में न्यायालय और प्रशासन आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या छात्रों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
