बंगाल की पूर्व सीएम की भतीजी ने की आत्महत्या, शिक्षक भर्ती में गई थी नौकरी, लटकी मिली लाश

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बंगाल में ममता बनर्जी की रिश्तेदार ब्रिस्टी मुखर्जी का शव मिला

निष्कर्ष भारत संवाददाता कोलकता। ब्रिस्टी मुखर्जी मौत का मामला पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चचेरे भाई की बेटी ब्रिस्टी मुखर्जी का शव मंगलवार सुबह रामपुरहाट थाना क्षेत्र के कुसुम्बा गांव स्थित उनके घर में लटका मिला। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, शव सुबह करीब 9 बजे घर की दूसरी मंजिल पर स्थित एक कमरे में पाया गया।

घटना की जानकारी परिवार की ओर से पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद रामपुरहाट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेज दिया। पुलिस फिलहाल मौत के कारणों और घटना से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच कर रही है।

बंगाल में घटना के बाद पुलिस जांच तेज

बंगाल में ब्रिस्टी मुखर्जी की मौत को लेकर पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। घटनास्थल की जांच के साथ परिवार के सदस्यों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस ने घटना को लेकर किसी निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

नौकरी गंवाने के बाद चर्चा में आई थीं ब्रिस्टी

28 वर्षीय ब्रिस्टी मुखर्जी का नाम पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शिक्षक भर्ती मामले से भी जुड़ा रहा था। उन्हें मार्च 2023 में बोलपुर के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारी के तौर पर नौकरी मिली थी।

बाद में राज्य में हुई शिक्षक भर्ती की जांच और अदालती कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में नियुक्तियां रद्द कर दी गईं। इसी क्रम में ब्रिस्टी का नाम भी नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों की सूची में शामिल था।

बंगाल शिक्षक भर्ती मामले का असर

पश्चिम बंगाल में शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े मामले में लंबे समय से जांच और कानूनी कार्रवाई चलती रही है। आरोप था कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने कथित अनियमित तरीकों और नकद लेन-देन के जरिए नौकरी हासिल की थी।

करीब 26 हजार शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां अदालत के आदेश के बाद रद्द की गई थीं। कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां भी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला बरकरार रहा।

सूची में 608वें स्थान पर था नाम

अदालती फैसले के बाद नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों की सूची में ब्रिस्टी मुखर्जी का नाम 608वें स्थान पर बताया गया था। सूत्रों के अनुसार, नौकरी जाने के बाद वह कथित तौर पर मानसिक तनाव में रह रही थीं।

हालांकि, परिवार की ओर से इस दावे को अलग तरीके से बताया गया है। परिवार का कहना है कि ब्रिस्टी ने स्वास्थ्य कारणों से नौकरी ज्वाइन करने के एक दिन बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए उनकी नौकरी को लेकर सामने आई अलग-अलग जानकारियों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही हो सकेगी।

ममता बनर्जी के परिवार से राजनीतिक जुड़ाव

ब्रिस्टी मुखर्जी के पिता निहार मुखर्जी ममता बनर्जी के मामा के बेटे बताए जाते हैं। वह स्थानीय स्तर पर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेता हैं। इसी वजह से ब्रिस्टी की मौत की खबर सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक नजरिए से भी चर्चा में आ गया है।

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हालांकि, मौत और शिक्षक भर्ती मामले के बीच सीधे संबंध की कोई आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

बंगाल का चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाला

पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती से जुड़ा मामला वर्ष 2016 में राज्य स्तरीय चयन परीक्षा के बाद सामने आया था। मामले में नौकरियों के बदले कथित तौर पर नकद राशि लेने के आरोप लगे थे। जांच आगे बढ़ने के साथ यह मामला राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया।

मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत सत्तारूढ़ दल के एक विधायक तथा आयोग और शिक्षा बोर्ड से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी। जांच एजेंसियों की ओर से आरोप पत्र भी दाखिल किए गए।

अदालती फैसले के बाद रद्द हुईं नियुक्तियां

शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े कई मुद्दे आए। इसके बाद बड़ी संख्या में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने का फैसला हुआ।

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इस फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा, जिनकी नौकरी चली गई। इसके बाद नौकरी गंवाने वाले लोगों के भविष्य और उनके सामने पैदा हुई आर्थिक तथा सामाजिक चुनौतियों को लेकर भी चर्चा हुई।

मौत की वजह पर अभी तस्वीर साफ नहीं

ब्रिस्टी मुखर्जी की मौत को लेकर अभी कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले उनकी स्थिति कैसी थी और क्या कोई ऐसा कारण था, जिसने उन्हें इस कदम के लिए मजबूर किया।

घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

बंगाल में राजनीतिक चर्चा भी तेज

ब्रिस्टी मुखर्जी के परिवार का राजनीतिक संबंध और उनका नाम शिक्षक भर्ती मामले से जुड़ा होने के कारण उनकी मौत की खबर ने बंगाल की राजनीति में भी चर्चा पैदा कर दी है। हालांकि, किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस जांच के परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।

फिलहाल रामपुरहाट पुलिस घटना की जांच कर रही है। परिवार, स्थानीय लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों से जानकारी जुटाई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

ब्रिस्टी मुखर्जी की मौत ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती विवाद की ओर ध्यान खींचा है। लेकिन उनकी मौत और भर्ती मामले के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट