बांका में फर्जी आधार सेंटर पर छापा, बंद कमरे में चल रहा था कारोबार, पुलिस आते ही फरार
बांका में बंद कमरे में आधार सेंटर, अधिकारी पहुंचे तो युवक फरार
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (बांका)। बांका में फर्जी आधार सेंटर का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। बांका शहर के मसूरिया मोहल्ले में एक बंद कमरे के अंदर कथित तौर पर आधार से जुड़े काम किए जा रहे थे। मामले की जानकारी मिलने पर आधार के जिला प्रबंधक प्रियरंजन जांच के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही कमरे में मौजूद युवक लैपटॉप और आधार से जुड़ा अन्य सामान लेकर फरार हो गए।
बांका अधिकारी के पहुंचने तक कमरे में कोई मौजूद नहीं था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कमरे में आधार से जुड़ा काम करने वाले युवक कौन थे और उनके पास आधार से संबंधित सेवाएं देने की अनुमति थी या नहीं। जिला प्रबंधक पूरे मामले की जांच में जुटे हैं।
बांका के मसूरिया मोहल्ले में बंद कमरे का मामला
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले तीन-चार दिनों से काले रंग की एक गाड़ी से तीन युवक मसूरिया मोहल्ले में आ रहे थे। बताया गया कि ये युवक एक बंद कमरे में बैठकर लोगों के आधार बनाने और उससे जुड़े अन्य काम कर रहे थे।
मोहल्ले के अधिकांश लोगों को इस सेंटर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। लोगों को यह भी स्पष्ट नहीं था कि जिस स्थान पर आधार से संबंधित काम किया जा रहा है, वह अधिकृत आधार केंद्र है या नहीं।

कमरे में लगातार कुछ लोगों की आवाजाही होने के बाद इसकी जानकारी अधिकारियों तक पहुंची। इसके बाद बांका के आधार के जिला प्रबंधक प्रियरंजन ने मौके पर जाकर मामले की जांच करने का फैसला किया।
अधिकारी पहुंचे तो लैपटॉप लेकर भागे युवक
जिला प्रबंधक के मौके पर पहुंचने की जानकारी जैसे ही कमरे के अंदर मौजूद युवकों को हुई, वे वहां से निकलने की तैयारी में जुट गए। बताया जा रहा है कि युवकों ने लैपटॉप और आधार से जुड़े अन्य उपकरणों को समेटा और मौके से फरार हो गए।
जब जिला प्रबंधक कमरे तक पहुंचे तो वहां कोई संचालक मौजूद नहीं था। अधिकारी को मौके पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला, जो सेंटर के संचालन या वहां किए जा रहे आधार संबंधी कार्यों के बारे में जानकारी दे सके।
इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। अब जांच का मुख्य बिंदु यही है कि वहां किस तरह की सेवाएं दी जा रही थीं और उन सेवाओं के लिए संचालकों के पास जरूरी अनुमति थी या नहीं।
फर्जी आधार सेंटर की जांच में जुटे अधिकारी
मामले की जानकारी मिलने के बाद आधार के जिला प्रबंधक प्रियरंजन ने जांच शुरू कर दी है। बांका में अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मसूरिया मोहल्ले में संचालित इस सेंटर से किन लोगों का आधार संबंधी काम किया जा रहा था।
जांच में सेंटर में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों और वहां होने वाली गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सेंटर चलाने वाले युवक कौन थे और वे बांका के रहने वाले हैं या किसी दूसरे स्थान से यहां आए थे। फिलहाल जांच पूरी नहीं होने के कारण सेंटर के संचालन से जुड़े लोगों की पहचान सामने नहीं आई है।
आधार सेंटर अधिकृत था या नहीं, यही बड़ा सवाल
मसूरिया मोहल्ले में सामने आए इस मामले में सबसे बड़ा सवाल सेंटर की वैधता को लेकर है। आधार से जुड़े काम के लिए अधिकृत केंद्रों और ऑपरेटरों की व्यवस्था होती है। ऐसे में किसी बंद कमरे में बिना स्पष्ट पहचान और अनुमति के आधार संबंधी काम किए जाने की सूचना गंभीर मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों को भी इस सेंटर के अधिकृत होने की जानकारी नहीं थी। इसी वजह से अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि वहां वास्तव में कौन-कौन से काम किए जा रहे थे।
यदि जांच में यह सामने आता है कि बिना अनुमति आधार से जुड़ी सेवाएं दी जा रही थीं, तो मामले में संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
काले रंग की गाड़ी से आते थे तीन युवक
स्थानीय लोगों ने बताया कि तीनों युवक पिछले कुछ दिनों से काले रंग की एक गाड़ी से इलाके में पहुंचते थे। वे सीधे बंद कमरे में जाते और वहीं लोगों के आधार से जुड़े काम करते थे।
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मोहल्ले के लोगों के मुताबिक यह गतिविधि लंबे समय से नहीं चल रही थी और पिछले तीन-चार दिनों से ही युवकों को वहां देखा जा रहा था। कम समय में ही अधिकारियों तक इसकी सूचना पहुंच गई।
अब जांच एजेंसी और संबंधित अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन युवकों ने किन लोगों का आधार संबंधी काम किया और इस काम के लिए उनके पास किस तरह के उपकरण थे।
बांका में जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
अधिकारी के पहुंचने से पहले युवकों के लैपटॉप समेत अन्य सामान लेकर भाग जाने के कारण मौके से तत्काल कोई उपकरण बरामद नहीं हो सका। ऐसे में जांच के लिए स्थानीय स्तर पर जुटाई जा रही जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

जिला प्रबंधक मामले से जुड़े तथ्यों को इकट्ठा कर रहे हैं। सेंटर में आने वाले लोगों, स्थानीय लोगों और वहां इस्तेमाल किए जाने वाले संसाधनों से संबंधित जानकारी जुटाई जा सकती है।
फिलहाल यह मामला जांच के स्तर पर है। सेंटर संचालकों की पहचान, उनकी अनुमति और वहां किए जा रहे आधार संबंधी कार्यों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
यह पूरा मामला बांका मसूरिया मोहल्ले में सामने आए इस मामले ने आधार से जुड़े कामकाज की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कथित सेंटर चलाने वाले युवकों तक अधिकारी कब पहुंच पाते हैं।
अमन कुमार की रिपोर्ट
