बिहार में चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र का बड़ा बदलाव, अब हर 15 दिन में मिलेगा बिक्री कोटा
चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
निष्कर्ष भारत संवाददाता-पटना: बिहार समेत पूरे देश में चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में इसकी नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी की बिक्री और आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब तक चीनी मिलों को पूरे महीने के लिए एकमुश्त बिक्री कोटा दिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब उन्हें पाक्षिक यानी हर 15 दिन के आधार पर बिक्री कोटा आवंटित किया जाएगा।
यह नई व्यवस्था सितंबर से लागू हो गई है। इसके तहत सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए बिहार को 25,665 टन चीनी का कोटा निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि पाक्षिक कोटा व्यवस्था लागू होने से बाजार में मांग और आपूर्ति पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और जमाखोरी की संभावना पर भी अंकुश लगेगा।
जुलाई और अगस्त की तुलना में बदली सितंबर की व्यवस्था
पिछले दो महीनों में बिहार को मासिक आधार पर चीनी का कोटा दिया गया था। जुलाई में राज्य के लिए 48,257 टन चीनी का कोटा निर्धारित किया गया था, जबकि अगस्त में यह बढ़ाकर 61,027 टन कर दिया गया था।
सितंबर से व्यवस्था बदलने के कारण अब पूरे महीने की जगह पहले 15 दिनों के लिए अलग से कोटा जारी किया गया है। सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए बिहार को 25,665 टन चीनी आवंटित की गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी केंद्र सरकार ने इसी नई व्यवस्था को लागू किया है। जुलाई में पूरे देश के लिए 22 लाख टन, अगस्त में 22.50 लाख टन चीनी का कोटा तय किया गया था। वहीं, सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए देशभर में 13 लाख टन चीनी का बिक्री कोटा निर्धारित किया गया है।
पहले सप्ताह में 40 प्रतिशत चीनी बेचना होगा जरूरी
नई व्यवस्था में सिर्फ कोटा देने का तरीका ही नहीं बदला गया है, बल्कि चीनी मिलों के लिए बिक्री और डिस्पैच को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं।
अब चीनी मिलों को आवंटित पाक्षिक कोटे का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह के दौरान बेचना अनिवार्य होगा। बाकी चीनी की बिक्री अगले सप्ताह में की जाएगी।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि बिक्री केवल कागजों तक सीमित न रहे। नई व्यवस्था के अनुसार, बिक्री के बाद मिलों को अधिकतम सात दिनों के भीतर चीनी की डिस्पैच करनी होगी। इससे उन स्थितियों पर रोक लगाने की उम्मीद है, जहां बिक्री तो पहले दर्ज कर दी जाती थी लेकिन वास्तविक रूप से चीनी बाजार तक पहुंचने में काफी देरी होती थी।
अगस्त में ज्यादा कोटा मिलने के बावजूद बढ़ी थीं कीमतें
बिहार में पिछले कुछ समय से चीनी की कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई थी। खास बात यह रही कि अगस्त में जुलाई की तुलना में राज्य को ज्यादा चीनी का कोटा मिला था, लेकिन इसके बावजूद बाजार में कीमतों पर दबाव देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार, बाजार में पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद जमाखोरी और सप्लाई में देरी जैसी समस्याओं के कारण चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति बनी। हालात ऐसे बने कि अगस्त के दौरान प्रशासन को बाजार की स्थिति पर नजर रखने के लिए छापेमारी तक करनी पड़ी।
सरकार का मानना है कि केवल अधिक कोटा आवंटित कर देने से कीमतों पर नियंत्रण नहीं पाया जा सकता। यह भी जरूरी है कि आवंटित चीनी समय पर बाजार तक पहुंचे और उसका वास्तविक उठाव तथा वितरण लगातार होता रहे।
मासिक कोटा व्यवस्था में सामने आई थीं कई खामियां
अब तक लागू मासिक कोटा व्यवस्था में कई तरह की समस्याएं सामने आने की बात कही गई। चीनी मिलों को पूरे महीने के लिए एकमुश्त बिक्री कोटा दिया जाता था। जांच के दौरान कुछ मामलों में मिलों के पास घोषित स्टॉक से अधिक चीनी उपलब्ध होने की बात सामने आई।
वहीं, कुछ मिलों द्वारा निर्धारित मासिक कोटे के मुकाबले कम बिक्री किए जाने की शिकायतें भी सामने आईं। कई मामलों में महीने की शुरुआत में कागजों पर बिक्री दर्ज कर ली गई, लेकिन खरीदारों ने चीनी का वास्तविक उठाव महीने के अंतिम दिनों में किया।
इस तरह बाजार में कागजों पर तो चीनी बिक चुकी होती थी, लेकिन वास्तविक आपूर्ति समय पर नहीं हो पाती थी। इसका सीधा असर बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर पड़ता था।
नई पाक्षिक व्यवस्था से होगी बेहतर निगरानी
केंद्र सरकार की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य चीनी की मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखना है। हर 15 दिन में कोटा तय होने से सरकार बाजार की स्थिति की लगातार समीक्षा कर सकेगी।
अगर किसी राज्य या क्षेत्र में अचानक चीनी की मांग बढ़ती है या आपूर्ति प्रभावित होती है तो सरकार अगले पखवाड़े के कोटे में आवश्यक बदलाव कर सकती है। इससे किसी भी संभावित कमी की स्थिति से जल्दी निपटने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाक्षिक व्यवस्था से जमाखोरी करने वालों पर भी दबाव बढ़ेगा, क्योंकि सरकार के पास बाजार की स्थिति की निगरानी के लिए कम समय का अंतराल होगा।
एक्स-मिल कीमतों में 20 प्रतिशत तक कमी का दावा
चीनी के बिक्री कोटे का निर्धारण खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय की ओर से किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में 20 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट का असर अब खुदरा बाजार तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। कई जगहों पर चीनी की खुदरा कीमतों में भी नरमी देखने को मिल रही है।
हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि एक्स-मिल स्तर पर आई कीमतों की कमी का फायदा बाजार में उन्हें कितनी जल्दी मिलता है। सरकार की नई आपूर्ति व्यवस्था इसी अंतर को कम करने की कोशिश मानी जा रही है।
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सरकार ने कहा- देश में चीनी की कोई कमी नहीं
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में जरूरत से ज्यादा चीनी की खरीदारी न करें और घरेलू जरूरत से अधिक स्टॉक जमा करने से बचें।
सरकार का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध है और नई पाक्षिक कोटा व्यवस्था के जरिए बाजार में इसकी सप्लाई पर लगातार नजर रखी जाएगी।
बिहार के लिए सितंबर के पहले 15 दिनों का 25,665 टन का कोटा इसी नई व्यवस्था की शुरुआत है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि हर 15 दिन में कोटा तय करने और बिक्री-डिस्पैच के सख्त नियमों से बिहार के बाजार में चीनी की कीमतों को कितना नियंत्रित किया जा सकता है।
नई व्यवस्था से सरकार को उम्मीद है कि जमाखोरी पर लगाम लगेगी, सप्लाई समय पर होगी और आम लोगों को चीनी उचित कीमत पर उपलब्ध हो सकेगी।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
