बिहार में अवैध खनन पर शिकंजा, होगी विशेष सिपाही भर्ती, इंटर पास होना अनिवार्य
बिहार में अवैध खनन रोकने को विशेष सिपाही भर्ती, इंटर पास अनिवार्य
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार सिपाही भर्ती को लेकर राज्य सरकार ने एक नई पहल की तैयारी की है। राज्य में अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग में विशेष सिपाही बल का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस प्रस्ताव को अपनी सहमति दे दी है। अब कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सिपाही भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
सरकार की योजना मद्य निषेध विभाग की तर्ज पर खान एवं भूतत्व विभाग के लिए अलग विशेष सिपाही भर्ती तैयार करने की है। इन जवानों की जिम्मेदारी अवैध बालू और पत्थर खनन पर नजर रखना, खनन से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित कराना और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई में विभाग की मदद करना होगी।
इंटर पास होना जरूरी, ड्राइविंग भी अनिवार्य
प्रस्तावित सिपाही भर्ती में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता इंटर पास रखे जाने की बात सामने आई है। यानी भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों का कम से कम 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी होगा।
सिपाही भर्ती के लिए संभावित शारीरिक मानकों में ऊंचाई 155 से 165 सेंटीमीटर के बीच रखे जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा वाहन चलाने की जानकारी भी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य यह है कि विशेष बल के जवान खनन वाले इलाकों में आसानी से पहुंच सकें और जांच तथा निगरानी की कार्रवाई को तेजी से अंजाम दे सकें। हालांकि सिपाही भर्ती की अंतिम योग्यता, शारीरिक मानक, आयु सीमा और अन्य शर्तें कैबिनेट की मंजूरी के बाद आधिकारिक रूप से स्पष्ट होंगी।
अवैध खनन रोकने के लिए सिपाही भर्ती क्यों?
बिहार में बालू और पत्थर खनन से जुड़ा कारोबार लंबे समय से सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत रहा है। वहीं अवैध खनन और बिना अनुमति खनन को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती भी बनी रहती है।
नए विशेष बल का उद्देश्य खनन क्षेत्रों में विभाग की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है। सामान्य प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था के साथ काम करते हुए ये जवान अवैध खनन, अवैध परिवहन और नियमों के उल्लंघन की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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सरकार का मानना है कि खनन क्षेत्रों में अलग से प्रशिक्षित बल होने से कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां बालू और पत्थर का खनन बड़े पैमाने पर होता है, वहां नियमित निगरानी को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
15 अक्टूबर से फिर शुरू होगा बालू खनन
खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार के मुताबिक मानसून की विदाई के बाद 15 अक्टूबर से राज्य में बालू खनन की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी। इसके लिए 233 पीला और सफेद बालू घाटों पर खनन शुरू किए जाने की योजना है।
मानसून के दौरान नदियों में जलस्तर बढ़ने और पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए बालू खनन पर रोक रहती है। अब मौसम में बदलाव के बाद खनन गतिविधियां दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
बालू की उपलब्धता बढ़ने से निर्माण कार्यों के लिए इसकी आपूर्ति में सुधार आने की उम्मीद है। सरकार का प्रयास है कि वैध खनन के जरिए बाजार में पर्याप्त बालू उपलब्ध कराया जाए, जिससे अवैध कारोबार पर भी अंकुश लगाया जा सके।
30 जगहों पर पत्थर खनन शुरू होने की तैयारी
बालू के साथ-साथ राज्य में पत्थर खनन को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। विभाग के अनुसार करीब 30 स्थानों पर पत्थर खनन शुरू होने से बाजार में गिट्टी की उपलब्धता बढ़ सकती है।
इससे निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी की कीमत कम होने की संभावना जताई गई है। सरकार की कोशिश है कि वैध खनन के जरिए बाजार की मांग पूरी हो और निर्माण सामग्री की उपलब्धता बेहतर हो।

हालांकि रोहतास में पर्यावरण मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिलहाल टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं होगी। पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद ही वहां खनन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
सिपाही भर्ती के साथ सर्वेक्षण व्यवस्था में भी बदलाव
अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सिर्फ विशेष बल बनाने की योजना ही नहीं है, बल्कि बालू की उपलब्धता का आकलन करने वाली व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है। अब जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन केवल पांच साल में एक बार तैयार करने के बजाय बालू की उपलब्धता के आधार पर तैयार किया जाएगा। इससे संबंधित जिलों में उपलब्ध बालू की वास्तविक स्थिति का समय-समय पर आकलन किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि उपलब्धता का सही आंकड़ा होने से खनन की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकती है। इससे वैध घाटों की संख्या, खनन की मात्रा और बाजार की जरूरत के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार की रणनीति, वैध खनन बढ़े और अवैध कारोबार घटे
बिहार सरकार की पूरी रणनीति बालू और पत्थर की वैध उपलब्धता बढ़ाने के साथ अवैध खनन पर नियंत्रण मजबूत करने की दिखाई दे रही है। एक ओर नए विशेष सिपाही बल की भर्ती की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर वैध खनन वाले घाटों और पत्थर खनन क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। विशेष सिपाही बल के गठन से विभाग को जमीनी स्तर पर अतिरिक्त निगरानी क्षमता मिलने की उम्मीद है।

वहीं जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन की व्यवस्था में बदलाव से खनन योग्य संसाधनों की उपलब्धता का आकलन अधिक नियमित रूप से किया जा सकेगा। अब इस पूरी योजना की अगली कड़ी कैबिनेट की मंजूरी होगी। इसके बाद ही बिहार सिपाही भर्ती के नियम, पदों की संख्या और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आएगी। सरकार की आदेश के बाद अब सब की नजर बालू के लिए विशेष सिपाही भर्ती के आदेश पर है, बताया जा रहा है कि इस सिपाही भर्ती के आने के बाद प्रदेश में अवैध खनन पर लगाने की और सिपाही भर्तीहोने से बालू की उपलब्धता भी सुलभ होगी।
पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
