बेतिया में 970 भूमिहीन परिवारों को मिला जमीन का अधिकार, स्वतंत्रता दिवस पर प्रभारी मंत्री ने दिए प्रमाण-पत्र, कही बड़ी बात

बेतिया

बेतिया में 970 भूमिहीन परिवारों को उनके जमीन का अधिकार

निष्कर्ष भारत, (संवाददाता) बेतिया। देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस बिहार के बेतिया जिले के लिए बेहद ख़ास रहा। स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर बेतिया में बिहार सरकार की बहुआयामी योजना अभियान बसेरा दो के तहत 970 भूमिहीन परिवारों को उनके जमीन का अधिकार देकर उन्हें सम्मानित किया गया। बेतिया के ऐतिहासिक रमना मैदान में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में इस अभियान की उपलब्धि को विशेष रूप से सामने रखा गया। ध्वजारोहण के बाद समारोह के मुख्य अतिथि और जिले के प्रभारी मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन ने प्रतीकात्मक रूप से 30 चयनित भूमिहीन परिवारों को बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र प्रदान किया। प्रमाण-पत्र हाथ में आते ही लाभुकों के चेहरों पर खुशी और भविष्य को लेकर सुरक्षा का भाव दिखाई दिया।

बेतिया में जमीन की आस लगाए परिवारों को मिला सहारा, प्रमाण-पत्र ने बढ़ाई अपने घर का सपना पूरा होने की उम्मीद

अभियान बसेरा-02 के तहत ऐसे ही पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें वासभूमि का अधिकार देने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रमाण-पत्र मिलने के बाद अब लाभुकों के पास अपनी जमीन से संबंधित वैधानिक दस्तावेज मौजूद रहेगा। इससे वे भविष्य में अपने परिवार के लिए स्थायी आवास बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

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बेतिया में 30 परिवारों को मंच से मिला प्रमाण-पत्र, 940 लाभुकों तक अंचल कार्यालय के माध्यम से पहुंचाया गया दस्तावेज

मुख्य समारोह के दौरान प्रभारी मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन ने 30 चयनित लाभुकों को बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र देकर योजना की औपचारिक उपलब्धि को सामने रखा। वहीं जिले के बाकी 940 भूमिहीन परिवारों को उनके संबंधित अंचल कार्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। इस तरह स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिले के सभी 970 पात्र परिवारों को योजना का लाभ उपलब्ध करा दिया गया। प्रशासन के लिए भी यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा किया गया है।

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मंत्री बोले- अंतिम पायदान तक विकास पहुंचाना सरकार का लक्ष्य, लगातार काम कर रही सरकार

समारोह को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन ने कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक विकास की रोशनी पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भूमिहीन परिवारों को दिया गया बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र महज एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उनके सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और अपने पक्के घर की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि किसी परिवार के पास अपनी जमीन होना उसके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार की कोशिश है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक साथ उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें जीवन की मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष न करना पड़े।

सभी अंचलों में जांच के बाद वास्तविक भूमिहीन परिवारों को किया गया शामिल

अधिकारियों के अनुसार, अभियान बसेरा-02 के तहत पश्चिम चंपारण जिले के सभी अंचलों में व्यापक स्तर पर सर्वे कराया गया। इस दौरान वास्तविक रूप से भूमिहीन परिवारों की पहचान की गई और पात्रता के आधार पर लाभुकों का चयन किया गया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद चिन्हित परिवारों को बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की कार्रवाई की गई। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित किया जा सकता है, जब जरूरतमंद परिवारों की सही पहचान हो। इसी उद्देश्य से सर्वे के दौरान पात्रता और भूमि की उपलब्धता सहित विभिन्न पहलुओं की जांच की गई।

जमीन मिलने से आवास योजनाओं का रास्ता भी होगा आसान, स्थायी घर का सपना होगा पूरा

बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र मिलने का सीधा लाभ यह होगा कि परिवार अब अपनी जमीन पर आवास निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। वासभूमि का अधिकार मिलने के बाद इन परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सरकारी आवास एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेना भी आसान होगा। प्रशासन के मुताबिक, भूमिहीनता केवल जमीन के अभाव की समस्या नहीं है, बल्कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी कई जरूरतें भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में जमीन का अधिकार मिलने से परिवारों को स्थायित्व मिलने की उम्मीद है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पश्चिम चंपारण के 970 परिवारों को मिला यह अधिकार उनके लिए राष्ट्रीय पर्व की खुशियों को और खास बना गया।

Nishkarsh Bharat

पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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