मीसा भारती ने लाठीचार्ज पर NDA सरकार को घेरा,बोली- दो गुजरातियों ने बिहार को किया हाइजैक
मीसा भारती का बड़ा हमला, छात्रों के मुद्दे पर सरकार घिरी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। मीसा भारती लाठीचार्ज बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की सांसद डॉ. मीसा भारती ने पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर बिहार की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने में लगी हुई है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि दो गुजरातियों ने बिहार को हाइजैक कर लिया है और राज्य की राजनीति का संचालन अब बिहार के हितों के बजाय दूसरे तरीके से किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
मीसा भारती ने छात्रों पर लाठीचार्ज को बताया लोकतंत्र के खिलाफ
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मीसा भारती ने कहा कि छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक और विशेष रूप से युवाओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बातचीत करने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल किया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
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उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का रवैया लगातार कठोर होता जा रहा है। उनके अनुसार सरकार जनता की समस्याओं को सुनने के बजाय विरोध करने वालों पर लाठियां चलाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इससे छात्रों और युवाओं में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है।
मीसा भारती ने कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
राजद सांसद ने अपने बयान में सिवान की हालिया घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और एके-47 जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सिवान के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को हटाने के बावजूद अब तक उनकी नई तैनाती नहीं की गई है। मीसा भारती का आरोप था कि इससे यह संदेश जाता है कि सरकार प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के बजाय केवल औपचारिक कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल अधिकारियों का तबादला पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति भी जरूरी है।
मीसा भारती ने नीतीश कुमार की चुप्पी पर पूछा सवाल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सार्वजनिक सक्रियता को लेकर भी मीसा भारती ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो वह इस विषय पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहतीं, क्योंकि उनके परिवार के साथ पुराने व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं है, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि मुख्यमंत्री लगातार सार्वजनिक मुद्दों पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे बड़े राज्य में मुख्यमंत्री की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और जनता उनसे स्पष्ट नेतृत्व की अपेक्षा करती है।
मीसा भारती ने संजय झा व ललन सिंह पर लगाए आरोप
मीसा भारती ने जदयू के वरिष्ठ नेताओं संजय झा और ललन सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री को एक तरह से राजनीतिक रूप से घेर रखा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को प्रणाम किया था, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बजाय दूसरे नेताओं की ओर से जवाब आया।
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उन्होंने तंज करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री तक उनकी बात पहुंची ही नहीं। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
मीसा भारती ने महंगाई और चीनी की कीमतों पर सरकार को घेरा
राज्य में बढ़ती महंगाई और विशेष रूप से चीनी की कीमतों को लेकर भी मीसा भारती ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार के कुछ मंत्रियों के बयान आम लोगों की परेशानियों को समझने के बजाय उनका मजाक उड़ाने जैसे लगते हैं।
उन्होंने कहा कि एक मंत्री का कहना है कि चीनी महंगी होने से किसानों को फायदा होगा, जबकि वास्तविकता यह है कि किसान को केवल गन्ना बेचने का मूल्य मिलता है। इसके बाद उन्होंने दूसरे मंत्री के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि चीनी खाने की जरूरत ही क्या है क्योंकि इससे डायबिटीज होती है। मीसा भारती ने कहा कि यदि सरकार के मंत्री इसी तरह के बयान देते रहे तो जनता को यह संदेश जाएगा कि सरकार महंगाई को गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि महंगाई का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ता है और सरकार को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
मीसा ने NDA सरकार पर साधा निशाना
राजद सांसद ने एनडीए गठबंधन के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा का नाम लेते हुए कहा कि जब उनकी अपनी अलग राजनीतिक पार्टी है, तब जदयू की विरासत पर दावा करने का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के कई नेता जनता के मुद्दों से अधिक अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने और अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति में स्थापित करने में लगे हुए हैं। उनके अनुसार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर होते जा रहे हैं।
मीसा ने सरकार पर लगाए आरोप
अपने बयान के अंतिम हिस्से में मीसा भारती ने बिहार सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने वर्तमान सरकार को निकम्मी, नकारा और हत्यारी सरकार बताते हुए कहा कि जब भी छात्र, युवा या किसान अपने अधिकारों की आवाज उठाते हैं, तब सरकार उनकी बात सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाती है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी जनता की समस्याओं का समाधान करना होती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है और जनता का विश्वास भी प्रभावित होता है।
सड़क से संसद तक मुद्दा उठाने का दावा
मीसा भारती ने कहा कि विपक्ष छात्रों, युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन विषयों को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती के साथ रखा जाएगा ताकि सरकार को जवाबदेह बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर पीछे हटने वाला नहीं है और आने वाले समय में भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता रहेगा। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के बयान राज्य की राजनीति को और अधिक गर्मा सकते हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और छात्रों के मुद्दों पर आगे क्या रुख अपनाती है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
