राघोपुर जमींदारी तटबंध कटाव में समाया 100 साल पुराना चैती दुर्गा मंदिर, कटाव की चपेट में अब रेलवे लाइन और हजारों घर

राघोपुर

राघोपुर में गंगा कटाव तेज, मंदिर के बाद रेलवे लाइन पर खतरा।

भागलपुर। जिलें के राघोपुर कटाव तटबंध ने मंगलवार की सुबह एक बार फिर भयावह रूप ले लिया। गंगा की तेज धारा ने करीब सौ साल पुराने चैती दुर्गा मंदिर के बड़े हिस्से को अपने साथ बहा लिया। सोमवार को ही मंदिर के कटाव के मुहाने पर पहुंचने को लेकर खबर सामने आई थी। इसके अगले दिन सुबह मंदिर का एक बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया। घटना के बाद राघोपुर और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की धारा लगातार राघोपुर जमींदारी तटबंध की ओर दबाव बना रही है। मंदिर के बाद अब रेलवे लाइन, घाट और आसपास के रिहायशी इलाकों पर खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर कटाव की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो हजारों घर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

राघोपुर में कटाव ने बढ़ाई चिंता

राघोपुर जमींदारी तटबंध में मंगलवार सुबह गंगा की तेज धारा ने ऐतिहासिक चैती दुर्गा मंदिर को नुकसान पहुंचाया। मंदिर का बड़ा हिस्सा कटाव के साथ नदी में चला गया। जिस स्थान पर कुछ समय पहले श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते थे, वहां अब गंगा की धारा बह रही है।

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स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक स्थल का नुकसान नहीं है। करीब एक सदी पुराने मंदिर से इलाके के लोगों की भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव की बात कही जा रही है। मंदिर के नदी में समाने के बाद अब ग्रामीणों की नजर आसपास के इलाकों की सुरक्षा पर है।

राघोपुर कटाव के बाद रेलवे लाइन पर खतरा

मंदिर के बाद सबसे बड़ी चिंता रेलवे लाइन को लेकर है। ग्रामीणों के मुताबिक गंगा का दबाव लगातार तटबंध और आसपास के भू-भाग पर बना हुआ है। यदि कटाव आगे बढ़ता है तो रेलवे लाइन के साथ आसपास की आबादी भी प्रभावित हो सकती है।

घाट और दूसरे महत्वपूर्ण स्थान भी कटाव क्षेत्र के करीब बताए जा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

फ्लड फाइटिंग तेज करने की मांग

राघोपुर जमींदारी तटबंध कटाव से परेशान ग्रामीणों ने युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कटाव प्रभावित क्षेत्र में तत्काल बड़े पैमाने पर कटावरोधी उपाय किए जाने चाहिए।

ग्रामीणों की मांग है कि विशेषज्ञ अभियंताओं की निगरानी में संवेदनशील हिस्सों का निरीक्षण कराया जाए और जहां गंगा का दबाव अधिक है, वहां तत्काल बचाव कार्य शुरू किया जाए। उनका कहना है कि समय पर मजबूत कार्रवाई होने से आगे होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

राघोपुर में विभाग पर लापरवाही के आरोप

ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख और अधीक्षण अभियंता पर कथित लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कटाव की स्थिति गंभीर होने के बावजूद बचाव कार्य हमेशा पर्याप्त तेजी से शुरू नहीं होता।

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ग्रामीणों के अनुसार, कई बार कटाव कुछ समय के लिए कम होते ही काम रोक दिया जाता है और दोबारा स्थिति बिगड़ने के बाद कार्रवाई शुरू होती है। उनका आरोप है कि इससे संवेदनशील इलाकों में नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि, इन आरोपों पर विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

अनुमति और कार्यादेश में देरी का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि राघोपुर जमींदारी तटबंध पर मौजूद विभागीय अधिकारियों को बड़े स्तर पर फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू करने के लिए वरीय अधिकारियों से अनुमति की आवश्यकता होती है। इसके अलावा संवेदक के चयन और कार्यादेश जारी करने की प्रक्रिया में भी समय लगने का दावा किया गया है।

ग्रामीणों के मुताबिक जब तक कागजी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होती है, तब तक गंगा का कटाव कई बार काफी आगे बढ़ जाता है। उनका कहना है कि नदी के कटाव जैसे आपात हालात में बचाव कार्य तत्काल शुरू करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

मंदिर बचाने की कोशिश पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के आसपास कटाव का खतरा पहले से दिखाई दे रहा था। उनका दावा है कि यदि समय रहते बचाव कार्य तेज कर दिया जाता तो ऐतिहासिक मंदिर को बचाया जा सकता था।

मंदिर के नदी में समाने के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि अब रेलवे लाइन और आबादी को सुरक्षित रखने के लिए कितनी तेजी से कार्रवाई की जाती है।

हजारों घरों पर मंडरा रहा खतरा

कटाव बढ़ने के साथ आसपास बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों के मुताबिक तटबंध के समीप कई घर और आबादी वाले इलाके मौजूद हैं। गंगा की धारा यदि इसी तरह भूमि को काटती रही तो बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संवेदनशील इलाकों का तत्काल सर्वे कराने और संभावित खतरे वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए योजना तैयार करने की मांग की है।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

राघोपुर में करीब सौ साल पुराने मंदिर का गंगा में समाना इलाके के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती कटाव को आगे बढ़ने से रोकना और आसपास के महत्वपूर्ण ढांचों को सुरक्षित रखना है।

ग्रामीणों की मांग है कि बचाव कार्य को केवल अस्थायी उपायों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि विशेषज्ञ अभियंताओं की निगरानी में स्थायी और प्रभावी कटावरोधी योजना पर काम किया जाए।

फिलहाल राघोपुर में गंगा की धारा और कटाव की स्थिति पर लोगों की नजर बनी हुई है। ऐतिहासिक मंदिर के बाद अब रेलवे लाइन और हजारों घरों की सुरक्षा प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार बचाव कार्य में देरी नहीं होगी और युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग शुरू कर कटाव को आगे बढ़ने से रोका जाएगा।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट