राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामला: 18 दिन की जांच के बाद 8 आरोपियों पर FIR, जानिए पूरा घटनाक्रम और SIT की बड़ी सिफारिशें
राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले में एसआईटी जांच के बाद 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
अयोध्या। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के करोड़ों रामभक्तों की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या के ‘राम मंदिर’ में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अब कानूनी कार्रवाई के चरण में पहुंच गया है। करीब 18 दिनों तक चली जांच के बाद गुरुवार को रामजन्मभूमि थाने में आठ नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले ने राजनीतिक, प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विशेष जांच दल (SIT) ने प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की थी। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
कैसे सामने आया चढ़ावे में हेराफेरी का मामला?
मामले की शुरुआत 7 जून को हुई, जब समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से लगभग 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक की हेराफेरी हुई है।
उसी दिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस मुद्दे को उठाया। आरोप सामने आने के कुछ ही घंटों बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया।
हालांकि मामला यहीं नहीं रुका। लगातार बढ़ते विवाद के बीच यह मुद्दा केंद्र और राज्य सरकार तक पहुंच गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने तलब की रिपोर्ट
10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून को लखनऊ मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।
एसआईटी जांच में क्या सामने आया?
लगातार कई दिनों तक चली जांच के दौरान एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों, नोट गिनने वाली निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों तथा अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की।
जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, नकदी जमा करने की प्रक्रिया, सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय दस्तावेज और चढ़ावे के हिसाब-किताब से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन जांच की गई।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई।
किन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर?
पुलिस ने निम्नलिखित आठ लोगों को नामजद करते हुए मामला दर्ज किया है—
- अनुकल्प मिश्र
- लवकुश मिश्र
- मनीष यादव
- राजेश पाठक
- रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू
- अविनाश शुक्ल
- करुणेश पांडेय
- सुभाष श्रीवास्तव
इनके अलावा अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- धारा 306 – मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की कर्मचारी या सेवक द्वारा चोरी।
- धारा 316 – आपराधिक विश्वासभंग तथा सौंपी गई संपत्ति का गबन।
- धारा 317 – चोरी या गबन की संपत्ति को रखना अथवा उसका उपयोग करना।
- धारा 61 – आपराधिक साजिश।
- धारा 3(5) – साझा मंशा से अपराध करने पर सामूहिक जिम्मेदारी।
इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कुछ मामलों में आजीवन कारावास अथवा 10 वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड का भी प्रावधान है।
जांच के दौरान किन-किन लोगों से हुई पूछताछ?
एसआईटी ने जांच के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, आमंत्रित सदस्य गोपाल राय, ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों, स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक एवं कैशियर, नकदी गिनने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों से कई दौर की पूछताछ की।
जांच टीम ने मंदिर परिसर में घंटों तक मौजूद रहकर नकदी प्रबंधन व्यवस्था का भी निरीक्षण किया।
अब तक का पूरा घटनाक्रम
- 7 जून – चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी का आरोप लगा।
- 8 जून – ट्रस्ट ने आरोपों का खंडन किया।
- 9 जून – स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग उठी।
- 10 जून – प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिपोर्ट तलब की।
- 11 जून – पूर्व लेखापाल का वीडियो सामने आया।
- 13 जून – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी गठित की।
- 15 से 20 जून – लगातार पूछताछ, दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच।
- 23 जून – एसआईटी ने 20 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी।
- 25 जून – एफआईआर दर्ज की गई।
एसआईटी की प्रमुख सिफारिशें
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
- प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए।
- ट्रस्ट में किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को सीईओ नियुक्त किया जाए।
- दान राशि का नियमित साप्ताहिक ऑडिट कराया जाए।
- प्रतिदिन आने वाली नकदी का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए।
- मंदिर प्रबंधन में आधुनिक और पेशेवर व्यवस्था लागू की जाए।
- सीसीटीवी फुटेज की स्टोरेज अवधि 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन की जाए।
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए।
- विस्तृत जांच के लिए एसआईटी को अतिरिक्त समय दिया जाए।
आस्था और पारदर्शिता दोनों पर बढ़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों ने स्वाभाविक रूप से देशभर में चिंता पैदा की है। यही कारण है कि इस मामले की जांच केवल आपराधिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के नजरिए से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस और एसआईटी आगे की विस्तृत जांच में जुट गई हैं। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही साबित होते हैं और किन लोगों की वास्तविक भूमिका सामने आती है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
