अधूरा सपना बना हजारों युवाओं की राह: कुमार बुक सेंटर की 40 साल की प्रेरक यात्रा

KBC के नाम से मशहूर हुआ कुमार बुक सेंटर

KBC के नाम से मशहूर हुआ कुमार बुक सेंटर

KBC के नाम से मशहूर हुआ कुमार बुक सेंटर

पटना/दिल्ली
कहते हैं कि जब किसी पिता का सपना पूरा नहीं हो पाता, तो वह उसे अपने बच्चों की आंखों में साकार होता देखना चाहता है। नालंदा जिले के रहने वाले अनिल कुमार (64) की कहानी इसी भावना की जीवंत मिसाल है। खुद आईएएस या आईपीएस बनने का सपना देखने वाले अनिल कुमार परीक्षा में सफल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय किताबों के सहारे ऐसा रास्ता चुना, जिसने न सिर्फ उनके बच्चों को अफसर बनाया बल्कि हजारों युवाओं को सिविल सर्विस की दिशा दिखाई।

अधिकारी बनने का सपना और संघर्ष

खेतिहर मजदूर किसान के बेटे अनिल कुमार सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने लेकर पटना पहुंचे थे। उन्होंने यूपीएससी और बीपीएससी की परीक्षाएं कई बार दीं, लेकिन हर बार असफलता हाथ लगी। आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने यह समझ लिया कि मंजिल तक पहुंचने के रास्ते कई हो सकते हैं। यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई।

2000 रुपये से रखी गई नींव

1986 में पटना के सैदपुर हॉस्टल के पास, मोइनुल हक स्टेडियम के पीछे एक छोटी सी गुमटी में कुमार बुक सेंटर की शुरुआत हुई। अनिल कुमार के पास दुकान खोलने तक की पूंजी नहीं थी। ऐसे में दोस्तों और जान-पहचान वालों ने मिलकर करीब 2000 रुपये इकट्ठा किए। किसी ने 500 तो किसी ने 200 रुपये दिए। उसी छोटी सी पूंजी से शुरू हुआ यह सफर आज प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया में एक मजबूत पहचान बन चुका है।

किताबों के साथ मार्गदर्शन भी

अनिल कुमार सिर्फ किताबें बेचने वाले दुकानदार नहीं थे। उन्होंने खुद सिविल सर्विस की तैयारी की थी, इसलिए उन्हें परीक्षा के हर स्तर की बारीक समझ थी। वे छात्रों को बताते थे कि किस परीक्षा के लिए कौन-सी किताब जरूरी है और किस तरह से पढ़ाई करनी चाहिए। यही वजह रही कि धीरे-धीरे कुमार बुक सेंटर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का भरोसेमंद ठिकाना बन गया।

गुमटी से बड़ी दुकान तक का सफर

जैसे-जैसे छात्रों की संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे गुमटी एक दुकान में बदल गई। आसपास के इलाके में यह प्रतियोगी परीक्षा की किताबों की जानी-मानी दुकान बन गई। आज पटना के वीआईपी इलाके बोरिंग कैनाल रोड में स्थित यह दुकान KBC (कुमार बुक सेंटर) के नाम से मशहूर है।

40 वर्षों से अनवरत सेवा

पटना में स्थापित कुमार बुक सेंटर पिछले 40 वर्षों से यूपीएससी, बीपीएससी, एसएससी, रेलवे समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें और एनसीईआरटी उपलब्ध करा रहा है। एक समय ऐसा भी आया जब अनिल कुमार को पढ़ाने के उद्देश्य से दिल्ली जाना पड़ा। लेकिन किताबों से उनका रिश्ता नहीं टूटा। दिल्ली के मुखर्जी नगर में भी उन्होंने कुमार बुक सेंटर की शाखा शुरू की, जो आज वहां के छात्रों की पहली पसंद मानी जाती है।

जहां मुख्यमंत्री से लेकर छात्र तक आते हैं

दावा किया जाता है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यहां से किताबें लेते रहे हैं। दिल्ली के मुखर्जी नगर में सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले अधिकतर छात्र कुमार बुक सेंटर को अपना फेवरेट बुक स्टोर मानते हैं, क्योंकि यहां हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी रेंज उपलब्ध है।

बच्चों ने पूरा किया पिता का सपना

अनिल कुमार का सपना उनके बच्चों ने पूरा कर दिखाया।

  • वर्ष 2011 में उनके बेटे आशीष भारती ने यूपीएससी पास कर आईपीएस बने और वर्तमान में बेगूसराय में डीआईजी के पद पर तैनात हैं।
  • बेटी अनीशा भारती ने पीसीएस परीक्षा पास कर अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया।
  • बहू स्वपना गौतम मेश्राम भी आईपीएस अधिकारी हैं।
  • दामाद मोहित कुमार एलाइड ऑफिसर हैं।

यह परिवार आज प्रशासनिक सेवाओं में एक मिसाल बन चुका है।

किताबों की दुकान नहीं, एक संस्थान

समय के साथ कुमार बुक सेंटर सिर्फ किताबों की दुकान नहीं रहा। यहां यूपीएससी और बीपीएससी की तैयारी के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लासेस भी शुरू की गईं। खास बात यह है कि जब भी समय मिलता है, डीआईजी आशीष भारती खुद सेंटर पर आकर छात्रों को मार्गदर्शन देते हैं। इसके अलावा कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी, जो कभी यहीं से किताबें लेकर पढ़ते थे, समय-समय पर यहां क्लास लेकर अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करते हैं।

“यह मेरा पैशन है”

जब अनिल कुमार से पूछा गया कि बच्चे अफसर बन गए, फिर भी दुकान क्यों चला रहे हैं, तो उनका जवाब भावुक कर देने वाला था।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ दुकान नहीं, मेरा पैशन है। मैंने इसे पाला-पोसा है। इसी ने मुझे पहचान दी और मेरे बच्चों को आगे बढ़ाया। जब मैं छात्रों की आंखों में आईएएस-आईपीएस बनने का सपना देखता हूं, तो मुझे सबसे ज्यादा खुशी मिलती है।”

दो शहर, एक सपना

आज कुमार बुक सेंटर की दो प्रमुख शाखाएं हैं—

पटना (बोरिंग कैनाल रोड): जिसे खुद अनिल कुमार संचालित करते हैं

दिल्ली (मुखर्जी नगर): जिसे उनके छोटे बेटे संभालते हैं

अनिल कुमार की यह कहानी बताती है कि असफलता अंत नहीं होती। अगर इरादे मजबूत हों, तो एक छोटी सी किताब की दुकान भी हजारों सपनों को पंख दे सकती है। कुमार बुक सेंटर आज संघर्ष, समर्पण और सफलता की एक प्रेरक मिसाल बन चुका है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

You may have missed