आरक्षण को लेकर पटना में सड़क पर उतरे लोग, प्रदर्शनकारियों ने जमकर काटा बवाल

आरक्षण को लेकर पटना में प्रदर्शन

आरक्षण की मांग को लेकर पटना के जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन तेज

निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। आरक्षण बढ़ाओ आंदोलन को लेकर राजधानी पटना में एक बार फिर प्रदर्शन तेज हो गया है। ‘आरक्षण बढ़ाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान जेपी गोलंबर के सामने कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। कई प्रदर्शनकारी पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग नौकरी में एससी-एसटी वर्ग के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार देने की है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी आबादी के अनुपात में आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग भी कर रहे हैं।

आरक्षण को लेकर जेपी गोलंबर पर जुटे प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि शिक्षा, रोजगार और सरकारी सेवाओं में वंचित तथा पिछड़े वर्गों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण व्यवस्था के दायरे पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।

इसी मांग को लेकर प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर पर एकत्र हुए। यहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को सामने रखा। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के साथ ही इलाके में पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ा दी गई।

पुलिस बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। इससे मौके पर कुछ देर के लिए तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया।

प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे और किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

आरक्षण में हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण का लाभ समाज के उन वर्गों तक पर्याप्त रूप से पहुंचना चाहिए, जिन्हें वे सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित मानते हैं। उनका कहना है कि जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलने से सरकारी नौकरियों, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी बढ़ सकती है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमर आजाद ने कहा कि अब दलितों के साथ-साथ सवर्ण वर्ग को भी आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। ऐसे में उनकी मांग है कि जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा कि आंदोलन केवल जेपी गोलंबर तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदर्शनकारियों की योजना आगे बढ़कर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की है।

मुख्यमंत्री आवास के घेराव का ऐलान

अमर आजाद के अनुसार, प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री आवास की ओर जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि रास्ते में लगाई गई बैरिकेडिंग को हटाते हुए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।

इस ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन की चुनौती बढ़ गई है। मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले संभावित रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा सकती है। प्रशासन की नजर इस बात पर है कि प्रदर्शनकारी किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

आरक्षण आंदोलन को लेकर प्रशासन अलर्ट

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। जेपी गोलंबर समेत आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। अधिकारियों की ओर से प्रदर्शन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान यातायात और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना है। प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने की स्थिति में पुलिस की ओर से निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

आरक्षण का मुद्दा फिर बना आंदोलन का केंद्र

बिहार में आरक्षण का मुद्दा समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का केंद्र रहा है। इस बार प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से प्रमोशन में आरक्षण और जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांग सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। वहीं, प्रशासन के सामने आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है।

फिलहाल जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन के बाद स्थिति पर पुलिस की नजर बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों के मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने के दावे के बीच प्रशासन की तैयारियां भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। अब देखना होगा कि आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है और सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट