ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीद जवानों के नाम पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए सवाल, रक्षा मंत्रालय ने दिया जवाब
भारत द्वारा मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
नई दिल्ली: भारत द्वारा मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। हाल ही में इस सैन्य अभियान में शहीद हुए छह भारतीय जवानों के नाम सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने एक वर्ष तक इन जवानों की शहादत को सार्वजनिक नहीं किया और उन्हें समय पर वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। वहीं रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए विस्तृत सफाई जारी की है।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए एक पुराने बयान का वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाए। खेड़ा ने आरोप लगाया कि यदि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान छह जवान शहीद हुए थे, तो उस समय संसद में यह क्यों कहा गया कि किसी भी भारतीय सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा।

उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल दो संभावनाएं हो सकती हैं। पहली, रक्षा मंत्री को उस समय शहीद जवानों की जानकारी नहीं थी और दूसरी, उन्होंने संसद को गलत जानकारी दी। कांग्रेस का कहना है कि दोनों ही स्थितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को बताया भ्रामक
कांग्रेस के आरोपों के बाद रक्षा मंत्रालय ने तत्काल बयान जारी कर पूरे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, यह दावा पूरी तरह गलत है कि छह शहीद जवानों को पहली बार अब सार्वजनिक सम्मान दिया गया है। सरकार और भारतीय सेना ने समय-समय पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके परिजनों को सम्मानित भी किया।
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि:
- 11 मई 2025 को आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन DGMO ने छह शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी थी।
- 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इन जवानों को वीरता पुरस्कार दिए जाने की जानकारी सार्वजनिक की गई थी।
- भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शहीदों को तत्काल श्रद्धांजलि दी गई थी।
- 8 अक्टूबर 2025 को वायुसेना प्रमुख ने शहीद सार्जेंट के परिजनों को सम्मानित किया।
- 15 जनवरी 2026 को सेना दिवस परेड के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीदों के परिवारों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसका पालन सभी मामलों में किया जाता है।
राजनाथ सिंह के बयान पर भी दी सफाई
रक्षा मंत्रालय ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय के मुताबिक, सोशल मीडिया पर उनके भाषण के केवल एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
मंत्रालय ने कहा कि संसद में रक्षा मंत्री का बयान भारतीय वायुसेना के विमानों और पायलटों को लेकर पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे दावों का जवाब था। उनका आशय यह था कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना अपने सैन्य उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने में सफल रही और दुश्मन के दावों के विपरीत वायुसेना को वह नुकसान नहीं हुआ जिसकी चर्चा पाकिस्तान कर रहा था।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
ऑपरेशन सिंदूर भारत द्वारा 6 मई 2025 को शुरू किया गया एक बड़ा सैन्य अभियान था। इस अभियान के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादी संगठनों के नौ प्रमुख ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।
सरकार के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य सीमा पार से संचालित आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था। अभियान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के प्रशिक्षण केंद्रों और लॉन्च पैड को निशाना बनाया गया।
भारत सरकार ने दावा किया था कि इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे और आतंकवादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था।
किन ठिकानों पर हुई थी कार्रवाई?
भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और पीओके में कुल नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें मुजफ्फराबाद, कोटली, भिम्बर, सियालकोट, मुरिदके और बहावलपुर स्थित आतंकी प्रशिक्षण केंद्र शामिल थे।
सेना के अनुसार इन ठिकानों का उपयोग आतंकियों की भर्ती, हथियार प्रशिक्षण, विस्फोटक तैयार करने और भारत में हमलों की साजिश रचने के लिए किया जाता था। कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़े आतंकवादियों ने इन्हीं शिविरों में प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
पाकिस्तान के एयरबेस को भी हुआ था नुकसान
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के कई सैन्य एयरबेस को भी भारी क्षति पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी मैक्सर (Maxar) द्वारा जारी तस्वीरों में सरगोधा, नूर खान, भोलारी और सुक्कुर एयरबेस पर हुए नुकसान के संकेत दिखाई दिए थे।
इन तस्वीरों के सामने आने के बाद भारत के सैन्य अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक चर्चा मिली थी।
राजनीतिक बहस तेज
ऑपरेशन सिंदूर की सैन्य सफलता पर लगभग सभी राजनीतिक दलों ने सेना की सराहना की थी, लेकिन अब शहीद जवानों के नाम सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक बहस का केंद्र सरकार की पारदर्शिता पर आ गया है।
कांग्रेस सरकार से जवाब मांग रही है कि यदि शहादत की जानकारी पहले से उपलब्ध थी, तो संसद और जनता के सामने पूरी तस्वीर क्यों नहीं रखी गई। दूसरी ओर केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय का कहना है कि शहीदों को समय-समय पर पूरा सम्मान दिया गया और तथ्यों को राजनीतिक लाभ के लिए गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत के हालिया सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में से एक माना जाता है। हालांकि इसकी रणनीतिक सफलता पर व्यापक सहमति रही है, लेकिन अब शहीद जवानों की जानकारी और संसद में दिए गए बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर विपक्ष सरकार से पारदर्शिता की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर रक्षा मंत्रालय का दावा है कि सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए शहीदों को सम्मान दिया गया और तथ्यों को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक गलियारों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
