सालों बाद मिली पहचान, कुबरी यादव टोला के स्कूल में फिर गूंजा ककहरा; पहले दिन 46 बच्चों ने लगाई हाजिरी
कुबरी यादव टोला प्राथमिक विद्यालय को वर्षों बाद संविलयन से मुक्ति मिली।
निष्कर्ष भार- संवददाता– जमुई/झाझा: इंतजार लंबा था, लेकिन ग्रामीणों की उम्मीद खत्म नहीं हुई। झाझा प्रखंड की बैजला पंचायत के कुबरी यादव टोला स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय को आखिरकार वर्षों बाद उसकी अपनी पहचान मिल गई। कभी भवन होने के बावजूद बच्चों से खाली रहने वाला यह विद्यालय अब फिर से अपने परिसर में संचालित होने लगा है। 12 अगस्त 2026 से स्कूल में नियमित रूप से कक्षाएं शुरू हो गई हैं। विद्यालय खुलने के पहले ही दिन 46 बच्चे पढ़ने पहुंचे और लंबे समय बाद स्कूल परिसर में एक बार फिर बच्चों की आवाज और ककहरे की गूंज सुनाई दी।
ग्रामीणों के लगातार प्रयास और शिक्षा विभाग की प्रक्रिया के बाद विद्यालय को संविलयन से मुक्त करने का आदेश जारी हुआ। अब बच्चों को करीब तीन किलोमीटर दूर दूसरे विद्यालय में जाने की मजबूरी नहीं रही। इस फैसले से कुबरी यादव टोला के अभिभावकों और बच्चों में खासा उत्साह है।
अगस्त 2024 से बंद था विद्यालय परिसर
कुबरी यादव टोला का नवसृजित प्राथमिक विद्यालय अगस्त 2024 से अपने मूल परिसर में संचालित नहीं हो रहा था। संविलयन के कारण विद्यालय को करीब तीन किलोमीटर दूर सलगा विद्यालय के साथ संचालित किया जा रहा था।
विद्यालय का अपना भवन होने के बावजूद बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल तक जाना पड़ता था। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह दूरी परेशानी का कारण बन रही थी। गर्मी, बारिश और खराब मौसम में तीन किलोमीटर की दूरी तय करना अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय था।

ग्रामीणों का कहना था कि जब गांव में विद्यालय का भवन मौजूद है तो बच्चों को इतनी दूर दूसरे स्कूल में भेजने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। इसी सोच के साथ ग्रामीणों ने विद्यालय को दोबारा अपने परिसर में शुरू कराने की मुहिम शुरू की।
ग्रामीणों ने लंबे समय तक किया संघर्ष
विद्यालय को संविलयन से मुक्त कराने के लिए गांव के अभिभावकों और पंचायत प्रतिनिधियों ने लगातार प्रयास किया। ग्रामीणों ने बैठकें कीं, चौपाल लगाई और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से पत्राचार किया। विद्यालय के संचालन को लेकर लगातार पैरवी की जाती रही।
ग्रामीणों का मानना था कि स्कूल सिर्फ एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य से जुड़ा संस्थान है। इसलिए इसे दोबारा शुरू कराने के लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष जारी रखा।
ग्रामीणों की मांग के बाद मामले ने विभागीय स्तर पर गति पकड़ी। जिला शिक्षा पदाधिकारी, जमुई ने 30 जुलाई 2026 को विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय भवन को संचालन के योग्य पाया गया।
इसके बाद विद्यालय को दोबारा उसके मूल परिसर में संचालित करने का प्रस्ताव बिहार सरकार को भेजा गया।
10 अगस्त को जारी हुआ आदेश
स्थलीय निरीक्षण और विभागीय प्रक्रिया के बाद शिक्षा विभाग, बिहार सरकार की ओर से 10 अगस्त 2026 को विद्यालय को संविलयन से मुक्त करने का आदेश जारी किया गया।
निदेशक, प्राथमिक शिक्षा कुमार निशांत विवेक के हस्ताक्षर से जारी आदेश में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, कुबरी यादव टोला को संविलयन से मुक्त करने की बात कही गई। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि अब विद्यालय का संचालन उसके अपने भवन में होगा और शिक्षक इकाई भी वहीं रहेगी।
आदेश की जानकारी मिलते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने इसे अपने लंबे संघर्ष की जीत बताया। बुजुर्गों का कहना था कि वर्षों बाद गांव के स्कूल को उसकी वास्तविक पहचान वापस मिली है।
12 अगस्त से अपने भवन में शुरू हुई पढ़ाई
शिक्षा विभाग का आदेश जारी होने के बाद 12 अगस्त से विद्यालय को उसके पुराने परिसर में संचालित किया गया। स्कूल के पहले दिन 46 बच्चे पहुंचे। लंबे समय बाद अपने गांव में स्कूल खुलने से बच्चों में उत्साह देखने को मिला।
पहली कक्षा के छात्र अरसद अंसारी, नाजमी प्रवीण, रौशनी खातून और जीसान अंसारी ने बताया कि अब स्कूल उनके घर के पास हो गया है। पहले दूसरे विद्यालय तक जाने में परेशानी होती थी, लेकिन अब यह समस्या खत्म हो गई है। बच्चों ने कहा कि अब वे स्कूल में मन लगाकर पढ़ाई करेंगे।
65 बच्चे हैं नामांकित
विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक फरहाना खातून के अनुसार, वर्तमान में स्कूल में कुल 65 बच्चे नामांकित हैं। हालांकि विद्यालय में संसाधनों के साथ शिक्षकों की भी कमी है। इसके बावजूद बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
प्रभारी प्रधानाध्यापक ने कहा कि करीब दो वर्षों बाद विद्यालय अपने परिसर में संचालित हो रहा है। बच्चों और अभिभावकों में इसे लेकर काफी उत्साह है। स्कूल के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन उपलब्ध संसाधनों में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने का प्रयास जारी रहेगा।
ग्रामीण बोले- स्कूल हमारा है, जिम्मेदारी भी हमारी
विद्यालय के दोबारा शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने अब इसे बेहतर बनाने का संकल्प लिया है। उनका कहना है कि स्कूल गांव का है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी भी गांव के लोगों की है। ग्रामीण विद्यालय में साफ-सफाई, बच्चों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक माहौल बेहतर बनाने में सहयोग करने की बात कह रहे हैं।
कुबरी यादव टोला के लोगों के लिए यह सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि वर्षों की मांग पूरी होने का अवसर है। जिस विद्यालय के परिसर में लंबे समय तक ताला लटका रहा, वहीं अब बच्चों की आवाज सुनाई दे रही है।
ग्रामीणों का संघर्ष यह भी दिखाता है कि शिक्षा को लेकर सामुदायिक भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। अब उम्मीद है कि विद्यालय में जरूरी संसाधन और पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि बच्चों को अपने गांव में ही बेहतर शिक्षा मिल सके।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
