गंगा का रौद्र रूप जारी, दियरा का इलाका हुआ जलमग्न, गंगा पथ पर रहने को मजबूर लोग
गंगा का जलस्तर 43 सेमी ऊपर, सड़क किनारे रह रहे बाढ़ पीड़ित
निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। गंगा-महानंदा बाढ़ का असर अमदाबाद के दियारा इलाकों में लगातार बढ़ता जा रहा है। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 43 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इसके साथ ही महानंदा नदी का पानी भी लगातार बढ़ रहा है। दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर ने दियारा क्षेत्र के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा नदी कई गांवों में बाढ़ का पानी घरों और आंगन तक पहुंच गया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में घर छोड़ने को मजबूर हैं।
बाढ़ की गंभीर स्थिति का सबसे अधिक असर पार दियारा क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। बिंद टोली समेत आसपास के कई गांवों में पानी फैलने के बाद ग्रामीण ऊंचे स्थानों और सड़कों की ओर जाने लगे हैं। जिन परिवारों के पास तत्काल सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था नहीं है, वे सड़क किनारे अस्थायी आशियाना बनाकर रहने को मजबूर हैं।
गंगा का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता
ग्रामीणों के अनुसार गंगा और महानंदा दोनों नदियों का पानी तेजी से बढ़ रहा है। हर दिन जलस्तर में वृद्धि के साथ बाढ़ का दायरा भी फैलता जा रहा है। पहले खेतों और निचले इलाकों में जमा हुआ पानी अब कई घरों तक पहुंच चुका है। इससे लोगों के सामने घर, भोजन और सुरक्षित आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है।

गंगा का दियारा क्षेत्र के ग्रामीणों का जीवन सामान्य दिनों में भी नदी और नाव के आवागमन पर काफी निर्भर रहता है। ऐसे में बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। घरों में पानी प्रवेश करने से घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया है।
सड़क किनारे बना रहे अस्थायी ठिकाना
बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद कई परिवार अपना घर छोड़कर सड़क किनारे पहुंच गए हैं। सड़क के किनारे प्लास्टिक और दूसरे सामान के सहारे अस्थायी आशियाने बनाए जा रहे हैं। बारिश और तेज धूप के बीच इन परिवारों को खुले में समय गुजारना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो सड़क किनारे बने अस्थायी ठिकाने भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए ऐसी स्थिति में रहना और भी मुश्किल हो रहा है।
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प्रभावित परिवार प्रशासन से प्लास्टिक शीट उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि कम से कम बारिश और धूप से बचने की व्यवस्था हो सके। इसके अलावा भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की भी मांग उठ रही है।
गंगा बाढ़ में आवागमन बना बड़ी समस्या
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन की समस्या भी लगातार गंभीर होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर सड़क और रास्ते पानी में डूब गए हैं। ऐसे में जरूरी काम से बाहर निकलना आसान नहीं है।
ग्रामीणों के मुताबिक सरकारी स्तर पर पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को निजी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें किराया भी देना पड़ता है। बाढ़ के बीच रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नाव पर निर्भरता बढ़ने से आर्थिक बोझ भी ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को प्रभावित इलाकों में पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि लोगों को जरूरी काम के लिए सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
पशुपालकों के सामने चारे का संकट
बाढ़ का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। पशुपालकों के सामने भी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। गंगा नदी खेतों और चारा उपलब्ध कराने वाले इलाकों में पानी फैलने के कारण पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण कई स्थानों तक पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में पशुओं को पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना चुनौती बन गया है। यदि पानी लंबे समय तक इसी तरह बढ़ता रहा तो पशुपालकों की परेशानी और बढ़ सकती है।

प्रभावित परिवार प्रशासन से पशुओं के लिए भी तत्काल चारे की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि राहत व्यवस्था में पशुओं की जरूरतों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
राहत शिविर और भोजन की मांग
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत शिविर शुरू करने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार जिन परिवारों के घरों में पानी प्रवेश कर चुका है, उनके लिए सुरक्षित स्थान पर रहने और भोजन की व्यवस्था जरूरी है।
लोगों ने प्रशासन से भोजन, पीने का पानी, प्लास्टिक शीट, नाव और पशुओं के लिए चारे की तत्काल व्यवस्था करने की गुहार लगाई है। सड़क किनारे रहने वाले परिवारों को सबसे पहले सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग भी की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा नदी बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में राहत कार्य में देरी होने पर प्रभावित परिवारों की परेशानी बढ़ना तय है।
अमदाबाद में बढ़ता पानी, राहत पर टिकी निगाहें
फिलहाल अमदाबाद के दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है। गंगा के खतरे के निशान से ऊपर बहने और महानंदा के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कई परिवार सुरक्षित ठिकाने की तलाश में घरों से बाहर निकल चुके हैं।
अब प्रभावित लोगों की निगाहें प्रशासन की राहत व्यवस्था पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जलस्तर बढ़ने के साथ बढ़ती मुश्किलों के बीच प्रशासन की राहत टीम प्रभावित परिवारों तक कितनी तेजी से पहुंचती है और उन्हें भोजन, पानी, नाव, रहने की जगह तथा पशुओं के लिए चारे जैसी जरूरी सुविधाएं कब तक उपलब्ध कराई जाती हैं।
अमन कुमार की रिपोर्ट
