जन्माष्टमी की धूम : इस्कॉन मंदिर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री निशांत, पूजा-अर्चना कर प्रदेश के लिए मांगी दुआ

जन्माष्टमी

जन्माष्टमी पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने युवाओं को नशे से बचने का संदेश दिया

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। जन्माष्टमी के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बिहार के युवाओं से नशे से दूर रहने और जीवन को सकारात्मक दिशा देने की अपील की। शुक्रवार को इस्कॉन मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने युवाओं के बीच बढ़ते ड्रग्स, गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में आकर अपना बहुमूल्य जीवन बर्बाद नहीं करना चाहिए। इसके बजाय पढ़ाई, सेवा, भजन और समाज के लिए उपयोगी कार्यों में अपना समय लगाना चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री ने जन्माष्टमी के मौके पर कहा कि मनुष्य का जीवन बेहद दुर्लभ माना गया है। जन्माष्टमी को लेकर धार्मिक मान्यता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है। ऐसे में नशे और गलत आदतों में इसे गंवाना उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपने मन को ईश्वर की ओर लगाने और जीवन को सार्थक बनाने की कोशिश करने की अपील की।

जन्माष्टमी पर युवाओं को सकारात्मक राह का संदेश

जन्माष्टमी के मौके पर इस्कॉन मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि जीवन में सकारात्मक सोच और अनुशासन बेहद जरूरी है। उनका कहना था कि युवाओं की ऊर्जा देश और समाज के निर्माण में इस्तेमाल होनी चाहिए, न कि नशे जैसी बुरी आदतों में।

उन्होंने युवाओं से पढ़ाई पर ध्यान देने, परिवार और समाज के लिए अच्छा काम करने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने की बात कही। उनके अनुसार व्यक्ति अपने व्यवहार और कर्मों से भी जीवन को बेहतर दिशा दे सकता है।

निशांत ने कहा कि मनुष्य का मन ही उसके लिए बंधन और मुक्ति दोनों का कारण बन सकता है। जब मन गलत आदतों और सांसारिक आकर्षणों में उलझ जाता है तो व्यक्ति के लिए मुश्किलें बढ़ती जाती हैं। इसलिए मन को सकारात्मक कार्यों में लगाना जरूरी है।

जन्माष्टमी पर ‘तपस्या’ का अर्थ भी समझाया

स्वास्थ्य मंत्री ने युवाओं के सामने तपस्या की अवधारणा को भी अलग तरीके से रखा। उन्होंने कहा कि तपस्या का अर्थ केवल आध्यात्मिक साधना नहीं है। जीवन में अनुशासन के साथ किया गया हर सकारात्मक प्रयास एक तरह की तपस्या हो सकता है।

उन्होंने पढ़ाई को भी तपस्या का उदाहरण बताया। उनका कहना था कि विद्यार्थी अगर नियमित रूप से मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करता है तो यह भी तपस्या है। इसी तरह परिवार, समाज और जरूरतमंद लोगों के लिए अच्छा काम करना भी जीवन को सार्थक बनाने वाली साधना है।

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आध्यात्मिक जीवन के संदर्भ में उन्होंने भजन-कीर्तन और ईश्वर के स्मरण की बात कही। उनका संदेश था कि युवा अपनी दिनचर्या में ऐसे कार्यों को स्थान दें, जिससे उनका मन सकारात्मक बना रहे और वे गलत संगत तथा नशे से दूर रह सकें।

काम, क्रोध, लोभ और मोह से बचने की सलाह

निशांत ने युवाओं को काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसी प्रवृत्तियों से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में भी व्यक्ति को इनसे दूर रहने का संदेश दिया गया है। उनका कहना था कि मनुष्य को अपने संसाधनों और सामर्थ्य का इस्तेमाल केवल निजी सुख के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की मदद के लिए भी करना चाहिए।

उन्होंने युवाओं से कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास धन है तो उसे नशे और अनावश्यक खर्च में लगाने के बजाय जरूरतमंदों की सहायता में लगाया जा सकता है। इससे व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा मिल सकती है और समाज में भी उसका बेहतर योगदान हो सकता है।

जन्माष्टमी पर गुटखा-तंबाकू को लेकर जताई चिंता

स्वास्थ्य मंत्री ने जन्माष्टमी को धार्मिक संदेश के साथ स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई। उन्होंने बिहार में कैंसर के बढ़ते मामलों को गंभीर विषय बताया। अपने एक दिन पहले के मुजफ्फरपुर दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां कैंसर मरीजों की बढ़ती संख्या देखने को मिली।

निशांत ने गुटखा और तंबाकू के सेवन को कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक बताते हुए युवाओं को इससे दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नशे का प्रभाव केवल एक बीमारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग इससे प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने लीवर और किडनी से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि युवाओं को शुरुआत से ही नशीले पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके।

नशे पर खर्च के बजाय जरूरतमंदों की मदद करें

स्वास्थ्य मंत्री ने युवाओं को आर्थिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास पैसा है तो उसे नशे में खर्च करने के बजाय किसी जरूरतमंद की मदद करनी चाहिए।

उनका कहना था कि समाज में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें भोजन, शिक्षा, इलाज या अन्य जरूरी मदद की आवश्यकता होती है। यदि युवा अपनी क्षमता और संसाधनों का इस्तेमाल सकारात्मक कामों में करें तो इसका लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि दूसरे लोगों को भी मिल सकता है।

जन्माष्टमी पर स्वास्थ्य और संस्कार दोनों का संदेश

जन्माष्टमी के अवसर पर निशांत का संदेश धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा रहा। उन्होंने युवाओं से भगवान के प्रति आस्था रखने के साथ अपने जीवन में अनुशासन अपनाने की अपील की।

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उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी को नशे से दूरी बनाना केवल स्वास्थ्य के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि इससे परिवार और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकता है। युवाओं को अपनी ऊर्जा शिक्षा, रोजगार, सेवा, खेल, सामाजिक गतिविधियों और सकारात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।

कैंसर और नशे के खिलाफ जागरूकता पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने नशे के खिलाफ जागरूकता को भी जरूरी बताया। गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर युवाओं को लगातार जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे खुद नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके नुकसान के बारे में बताएं।

निशांत ने महात्मा गांधी के विचार का उल्लेख करते हुए शराब के नुकसान की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नशे का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यक्ति के जीवन और उसके परिवार पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।

कुल मिलाकर जन्माष्टमी के मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने युवाओं के सामने नशामुक्त और अनुशासित जीवन का संदेश रखा। उन्होंने पढ़ाई, सेवा, भजन और जरूरतमंदों की मदद जैसे सकारात्मक कार्यों को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। साथ ही गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी को बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य के लिए जरूरी बताया।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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