ट्रेन लेट हुई तो जन्म हुआ एक क्रांतिकारी ऐप का, जानिए Where is My Train App की पूरी कहानी
ट्रेन लेट होने से जन्मा Where is My Train App आज करोड़ों भारतीयों की पहली पसंद है। जानिए अहमद निजाम का आइडिया कैसे बना गूगल द्वारा खरीदा गया 100 मिलियन डाउनलोड वाला ऐप।
Uber-Ola से मिला Where is My Train App का कॉन्सेप्ट

ट्रेन लेट होने से जन्मा Where is My Train App आज करोड़ों भारतीयों की पहली पसंद है। जानिए अहमद निजाम का आइडिया कैसे बना गूगल द्वारा खरीदा गया 100 मिलियन डाउनलोड वाला ऐप।
आज करोड़ों भारतीय रोज़ाना रेल यात्रा करते हैं। लंबी दूरी हो या रोज़मर्रा का सफर, भारतीय रेलवे देश की लाइफलाइन मानी जाती है। हालांकि कोहरा, तकनीकी कारण या अन्य वजहों से ट्रेनें अक्सर लेट हो जाती हैं। आज भले ही ट्रेन की लाइव लोकेशन जानना आसान हो गया हो, लेकिन करीब 10 साल पहले ऐसी कोई सुविधा मौजूद नहीं थी। उस दौर में यात्रियों को स्टेशन पर घंटों इंतज़ार करना पड़ता था, बिना यह जाने कि ट्रेन कहां है।
इसी समस्या ने एक युवा इंजीनियर को ऐसा आइडिया दिया, जिसने आगे चलकर करोड़ों भारतीयों की यात्रा को आसान बना दिया। यह कहानी है Where is My Train App और इसके संस्थापक अहमद निजाम मोहाइदीन की।
जब ट्रेन लेट हुई और दिमाग में आया अनोखा आइडिया

साल 2015 में अहमद निजाम ट्रेन से यात्रा करने के लिए स्टेशन पहुंचे थे। उनकी ट्रेन कई घंटों की देरी से चल रही थी और प्लेटफॉर्म पर बैठे-बैठे वह परेशान हो चुके थे। उसी समय भारत में Uber और Ola जैसी कैब सर्विस तेजी से लोकप्रिय हो रही थीं, जो लाइव लोकेशन ट्रैकिंग की सुविधा देती थीं।
अहमद निजाम के मन में सवाल आया—जब कैब की लाइव लोकेशन देखी जा सकती है, तो ट्रेन की क्यों नहीं? यहीं से एक ऐसे ऐप का विचार जन्मा, जो आगे चलकर भारतीय रेल यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ।
Sigmoid Labs से शुरू हुआ सफर

अहमद निजाम ने 2013 में Sigmoid Labs नाम की एक टेक कंपनी की स्थापना की थी। यह कंपनी डेटा इंजीनियरिंग, मशीन लर्निंग और AI आधारित सॉल्यूशंस पर काम करती थी। Sigmoid Labs की टीम के साथ अहमद ने ट्रेन ट्रैकिंग ऐप पर काम शुरू किया।
करीब एक साल तक लगातार मेहनत की गई। इस दौरान 20 से ज्यादा प्रोटोटाइप बनाए गए, लेकिन शुरुआत में सफलता नहीं मिली। उस समय न तो भारत में इंटरनेट की पहुंच ज्यादा थी और न ही टीम के पास बड़ी फंडिंग थी।
मोबाइल टावर से हुआ कमाल
इंटरनेट और GPS की सीमाओं को देखते हुए अहमद निजाम ने एक अनोखा समाधान निकाला। उन्होंने मोबाइल टावर डेटा का इस्तेमाल करके ट्रेन की लोकेशन ट्रैक करने की तकनीक विकसित की। इसी टेक्नोलॉजी पर आधारित Where is My Train App तैयार हुआ, जो बिना इंटरनेट और GPS के भी काम करता था।
यह फीचर खासतौर पर भारत जैसे देश के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ, जहां हर जगह स्थिर इंटरनेट उपलब्ध नहीं होता।
2018 में गूगल ने खरीदा Where is My Train App

Where is My Train App का आइडिया और टेक्नोलॉजी इतनी प्रभावशाली थी कि गूगल ने इसे अपने इकोसिस्टम का हिस्सा बनाने का फैसला किया। दिसंबर 2018 में गूगल ने इस ऐप को बनाने वाली कंपनी Sigmoid Labs का अधिग्रहण कर लिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह डील करीब 280 करोड़ रुपये की थी, हालांकि गूगल ने आधिकारिक तौर पर फाइनेंशियल डिटेल्स सार्वजनिक नहीं कीं। इस अधिग्रहण का मकसद गूगल की “Next Billion Users” रणनीति को मजबूत करना था, ताकि उभरते बाजारों में ऑफलाइन-फ्रेंडली सेवाएं दी जा सकें।
100 मिलियन से ज्यादा डाउनलोड
आज Where is My Train App भारत के सबसे लोकप्रिय रेलवे ऐप्स में से एक है। इसके 100 मिलियन (10 करोड़) से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। यह ऐप यूजर्स को लाइव ट्रेन ट्रैकिंग, ऑफलाइन टाइमटेबल, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच पोजिशन, सीट उपलब्धता, PNR स्टेटस, डेस्टिनेशन अलार्म और लोकेशन शेयरिंग जैसी सुविधाएं देता है।
सेल टावर आधारित टेक्नोलॉजी के कारण यह ऐप कम बैटरी खपत करता है और कमजोर नेटवर्क में भी बेहतर काम करता है।
गूगल के बाद अहमद निजाम का नया सफर
गूगल द्वारा अधिग्रहण के बाद अहमद निजाम गूगल में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में जुड़े। उन्होंने करीब चार साल तक वहां काम किया और दिसंबर 2022 में इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद 2023 में उन्होंने अपना नया स्टार्टअप Regain App लॉन्च किया। यह ऐप लोगों को मोबाइल की लत से बाहर निकलने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है। Regain App डिस्ट्रैक्टिंग ऐप्स को ब्लॉक करता है, स्क्रीन टाइम कंट्रोल करता है और गेमिफिकेशन के जरिए प्रोडक्टिविटी बढ़ाने पर फोकस करता है।
आज Regain App के भी 10 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं।
एक आइडिया जिसने बदल दी रेल यात्रा

अहमद निजाम के एक छोटे से विचार ने करोड़ों भारतीयों की यात्रा को आसान बना दिया। आज यात्री अपनी ट्रेन की लाइव लोकेशन जान सकते हैं और अनावश्यक इंतजार से बच सकते हैं। Where is My Train App न सिर्फ एक ऐप है, बल्कि यह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में इनोवेशन की एक प्रेरणादायक मिसाल भी है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
