महिला आरक्षण बिल 2026 पर बिहार में सियासी घमासान, तेजस्वी यादव का CM सम्राट चौधरी पर तीखा हमला

तेजस्वी यादव

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तीखा हमला बोला है।

बिहार की राजनीति में महिला आरक्षण बिल 2026 को लेकर बहस तेज हो गई है। राजधानी Patna में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने न केवल बिल के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए, बल्कि डीलिमिटेशन (परिसीमन) को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर भी गंभीर आरोप लगाए।

“मुख्यमंत्री बने, लेकिन समझ नहीं”

तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को महिला आरक्षण बिल की पूरी समझ नहीं है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री तो बन गए हैं, लेकिन उन्हें इस बिल की समझ ही नहीं है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके लागू करने के तरीके और उससे जुड़े अन्य मुद्दों पर सवाल उठा रही है।

तेजस्वी ने कहा कि अगर वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना है, तो उन्हें 33 प्रतिशत नहीं बल्कि 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।

डीलिमिटेशन पर उठे सवाल

महिला आरक्षण के साथ डीलिमिटेशन का मुद्दा इस विवाद का केंद्र बन गया है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की राजनीति की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह बिल तीन साल पहले ही पारित हो चुका था, लेकिन अब तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रपति से इस पर हस्ताक्षर पहले क्यों नहीं करवाए गए और इसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हुई।

तेजस्वी का मानना है कि डीलिमिटेशन के जरिए राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश की जा रही है, जिसका असर खासकर बिहार और उत्तर भारत की राजनीति पर पड़ सकता है।

“महिलाओं को सबसे ज्यादा टिकट RJD ने दिया”

तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी का बचाव करते हुए दावा किया कि चुनावों में महिलाओं को सबसे ज्यादा टिकट RJD ने ही दिया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर महिलाओं का सम्मान न करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “बीजेपी के लोग महिलाओं का सम्मान नहीं करते हैं। उनकी सोच मनुस्मृति वाली है।”

इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी की, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया है।

‘ट्रिपल सी’ विवाद और तेजस्वी यादव नीतीश कुमार पर टिप्पणी

तेजस्वी यादव ने ‘ट्रिपल सी’ को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ‘ट्रिपल सी’ (जिसका संदर्भ राजनीतिक समीकरणों से जोड़ा जा रहा है) से तो नीतीश कुमार भी समझौता कर चुके हैं।

उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराध दर का मुद्दा उठाते हुए भाजपा पर हमला बोला और कहा कि यह एक “कम्युनल पार्टी” है, जो मूल मुद्दों से ध्यान भटकाती है।

महिला आरक्षण बिल: क्या है विवाद?

महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। हालांकि, इसके लागू होने को डीलिमिटेशन प्रक्रिया से जोड़ने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिसीमन के बाद ही सीटों का पुनर्गठन होगा, जिसके बाद ही महिला आरक्षण प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा। यही वजह है कि इस प्रक्रिया में देरी हो रही है।

लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर सकती है।

बिहार की राजनीति में बढ़ता तापमान

महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बयानबाजी ने बिहार की राजनीति को और गर्म कर दिया है। एक तरफ सत्तारूढ़ दल इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहा है, तो वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर देख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ सकता है। महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश में सभी दल अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे को भुनाने में जुटे हैं।

आगे की राह

फिलहाल, महिला आरक्षण बिल को लेकर स्पष्टता का इंतजार है। डीलिमिटेशन की प्रक्रिया, राष्ट्रपति की मंजूरी और इसके लागू होने की समयसीमा जैसे सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इन सवालों का जवाब देकर विपक्ष के आरोपों को शांत कर पाती है या यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक विवाद बन जाता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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