कल्याणी निवास में सत्ता संग्राम, श्राद्धकर्म से पहले दरभंगा राज में तनाव

कल्याणी निवास

मिथिला की शान और ऐतिहासिक गरिमा का प्रतीक रहे दरभंगा राज में अंतिम महाधिरानी के श्राद्धकर्म से पहले हालात असामान्य होते जा रहे हैं। कल्याणी निवास, जो कभी शांति, परंपरा और मर्यादा का केंद्र था, आज टकराव, आशंकाओं और पुलिस पहरे के साये में है। सत्ता, उत्तराधिकार और ऐतिहासिक संपत्ति को लेकर ऐसा अदृश्य युद्ध चल रहा है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

कल्याणी निवास अब राजमहल नहीं, पुलिस छावनी में तब्दील

दरभंगा।
मिथिला की शान और ऐतिहासिक गरिमा का प्रतीक रहे दरभंगा राज में अंतिम महाधिरानी के श्राद्धकर्म से पहले हालात असामान्य होते जा रहे हैं। कल्याणी निवास, जो कभी शांति, परंपरा और मर्यादा का केंद्र था, आज टकराव, आशंकाओं और पुलिस पहरे के साये में है। सत्ता, उत्तराधिकार और ऐतिहासिक संपत्ति को लेकर ऐसा अदृश्य युद्ध चल रहा है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

श्राद्धकर्म जैसे पवित्र और शांतिपूर्ण संस्कार से पहले जिस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, उन्होंने यह साफ कर दिया है कि मामला केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह संघर्ष दरभंगा राज की विरासत, अधिकार और प्रभाव को लेकर है, जिसकी जड़ें इतिहास में गहराई तक धंसी हुई हैं।

कल्याणी निवास: महल नहीं, संवेदनशील क्षेत्र

कल्याणी निवास आज किसी राजमहल से अधिक एक संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र बन चुका है। विश्वविद्यालय थाना की पुलिस हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है। सादे कपड़ों में खुफिया निगरानी, अतिरिक्त बल की तैनाती और वरिष्ठ अधिकारियों की सतर्कता इस बात का संकेत है कि स्थिति सामान्य नहीं बल्कि केवल नियंत्रित है। प्रशासन को आशंका है कि श्राद्धकर्म के दौरान पुराना विवाद दोबारा भड़क सकता है और हालात बेकाबू हो सकते हैं।

विरासत पर अधिकार की जंग

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विवाद का केंद्र दरभंगा राज की ऐतिहासिक संपत्तियां हैं—महल, जमीन, ट्रस्ट और संस्थान। राजपरिवार का दावा है कि महाराजाधिराज के निधन के बाद कल्याणी निवास और संबंधित संपत्तियों पर राजकुमार कपिलेश्वर सिंह और उनके भाइयों का निर्विवाद अधिकार है। यह अधिकार महाराजा कामेश्वर सिंह द्वारा विधिवत तैयार किए गए दस्तावेजों पर आधारित बताया जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर, महाधिरानी की बहनों के पुत्र इस दावे को लगातार चुनौती दे रहे हैं। महाधिरानी के साथ उनका लंबा समय तक रहना अब अधिकार और दावे का आधार बनता जा रहा है। श्राद्धकर्म में उनकी सक्रियता को लेकर भी राजपरिवार में असंतोष है। अंदरखाने चर्चा है कि यह सक्रियता आस्था से अधिक भविष्य के दावे की तैयारी है।

अंतिम संस्कार के दिन फूटा विवाद

विवाद का विस्फोट अंतिम संस्कार के दिन उस समय हुआ, जब शवयात्रा की प्रक्रिया को लेकर बहस छिड़ गई। वर्षों से दबा उत्तराधिकार का तनाव अचानक हिंसक रूप में सामने आ गया। कल्याणी निवास परिसर में गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि पुलिस को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा, तब जाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी।

सूत्र बताते हैं कि इस झड़प में कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट से जुड़े लोगों और महाधिरानी के करीबी सदस्यों के बीच तनाव सबसे तीखा था। ट्रस्ट प्रबंधक उदयनाथ झा के पुत्र और महाधिरानी से जुड़े परिवार के बीच टकराव को प्रशासन ने ‘रेड अलर्ट’ संकेत के रूप में दर्ज किया है।

श्राद्धकर्म या शक्ति-परीक्षा?

प्रशासन को आशंका है कि जैसे-जैसे श्राद्धकर्म के दिन आगे बढ़ेंगे, तनाव की परतें और मोटी होती जाएंगी। पुलिस का मानना है कि विवाद केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दरभंगा राज की ऐतिहासिक विरासत और ट्रस्ट नियंत्रण को लेकर खुला संघर्ष हो सकता है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक कड़ा कर दिया गया है। स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी पक्ष कानून हाथ में नहीं लेगा, चाहे उसका नाम कितना ही बड़ा क्यों न हो।

कपिलेश्वर सिंह का बयान, सवाल बरकरार

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजकुमार कपिलेश्वर सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि महाधिरानी की देखरेख में संचालित कल्याणी फाउंडेशन को अब और अधिक संगठित, पारदर्शी और उद्देश्यपूर्ण बनाया जाएगा। उनका दावा है कि सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सेवा राजपरिवार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। लेकिन सवाल यह है कि जब विरासत की जमीन इतनी फिसलन भरी हो, तो क्या यह संकल्प पर्याप्त होगा?

प्रशासन की आखिरी कोशिश

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यह नियंत्रण अस्थायी है। श्राद्धकर्म की समाप्ति तक हर पल निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन जानता है कि जरा सी चूक मिथिला की गौरवशाली राजपरंपरा को शर्मसार कर सकती है।

आज दरभंगा केवल एक श्राद्धकर्म नहीं देख रहा। वह देख रहा है कि इतिहास की छाया में वर्तमान कैसे कांपता है, और एक महाधिरानी की विदाई कैसे पूरे वंश के लिए परीक्षा बन गई है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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