पटना में बाढ़ आने का खतरा, उच्चतम स्तर पर पहुंची गंगा, बढ़ी चिंता

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पटना में गंगा रिकॉर्ड स्तर पर, हाथीदह समेत कई जिलों में बढ़ा खतरा

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर ने आज नया रिकॉर्ड बना दिया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, पटना के दीघा घाट व गांधी घाट के साथ मोकामा के हाथीदह में गंगा का पानी उच्चतम बाढ़ स्तर तक पहुंच गया है। गांधी घाट पर जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने के बाद अब पानी का दबाव डाउनस्ट्रीम यानी नदी की धारा के निचले हिस्से की ओर बढ़ने की आशंका है। विभाग ने अगले एक से तीन दिनों के दौरान हाथीदह और उसके बाद के इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है।

पटना में गंगा के रिकॉर्ड जलस्तर से बढ़ी चिंता

रविवार सुबह 8 बजे दर्ज आंकड़ों के अनुसार, दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर 51.99 मीटर, गांधी घाट पर 50.56 मीटर और मोकामा के हाथीदह में 43.50 मीटर रहा। विभाग के मुताबिक तीनों स्थानों पर दर्ज जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर है। इसका मतलब है कि इन गेज स्टेशनों पर गंगा अब तक के सबसे ऊंचे दर्ज स्तर तक पहुंच चुकी है।

पटना के गांधी घाट पर जलस्तर के उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने के बाद विभाग ने नदी के पानी की लहर के डाउनस्ट्रीम की ओर बढ़ने को लेकर अधिकारियों को अलर्ट किया है। संबंधित पदाधिकारियों और क्षेत्रीय अधिकारियों को लगातार जलस्तर की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

हाथीदह में दिखेगा पटना गंगा के बढ़े पानी का असर

जल संसाधन विभाग के अनुसार, गांधी घाट से बढ़े पानी का दबाव अब नदी की धारा के साथ आगे बढ़ेगा। इसका असर अगले एक से तीन दिनों में मोकामा के हाथीदह और उसके बाद स्थित डाउनस्ट्रीम गेज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है।

विभाग ने आशंका जताई है कि हाथीदह में गंगा का जलस्तर पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को भी पार कर सकता है। पटना से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित हाथीदह में जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी है।

बेगूसराय से कटिहार तक सतर्कता की जरूरत

गंगा के पानी का दबाव आगे बढ़ने के साथ बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों के गंगा किनारे बसे इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। इन जिलों में नदी के किनारे रहने वाले लोगों और स्थानीय प्रशासन को जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।

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विभाग ने तटबंधों, संवेदनशील स्थानों और निचले इलाकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए एहतियाती उपाय पहले से करने को कहा गया है।

पटना में तटबंध और निचले इलाकों पर नजर

गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बाढ़ नियंत्रण से जुड़े सभी संसाधनों और मशीनरी को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागीय और क्षेत्रीय अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।

नदी के जलस्तर के साथ-साथ तटबंधों और कमजोर माने जाने वाले स्थानों की भी निगरानी की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति की जानकारी समय रहते हासिल करना और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करना है।

नदी के करीब नहीं जाने की अपील

गंगा का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद आम लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की गई है। विभाग ने लोगों को अनावश्यक रूप से नदी के करीब नहीं जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

स्थानीय प्रशासन को नावों के परिचालन पर निगरानी रखने, ओवरलोडिंग रोकने और लोगों को लगातार जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। खासकर नदी किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर में अचानक होने वाले बदलाव को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है।

बिहार के बैराजों से कितना पानी छोड़ा जा रहा

गंगा के जलस्तर पर बिहार के प्रमुख बैराजों से होने वाले पानी के बहाव का भी असर पड़ता है। 6 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे के आंकड़ों के अनुसार, इंद्रपुरी सोन बैराज से 2,17,596 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। यहां पानी का बहाव लगातार घट रहा है।

वहीं, बीरपुर कोसी बैराज से 1,69,255 क्यूसेक और वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 1,29,000 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। इन दोनों बैराजों में पानी के बहाव की स्थिति स्थिर बताई गई है।

तीनों प्रमुख बैराजों से कुल करीब 5.16 लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। इन नदियों का पानी आगे चलकर गंगा में मिलता है, इसलिए बैराजों में पानी के बहाव की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।

बैराजों का बहाव घटा तो गंगा से राहत की उम्मीद

जल संसाधन विभाग के अनुसार, यदि इंद्रपुरी, बीरपुर और वाल्मीकिनगर बैराजों से पानी के बहाव में कमी आती है तो आगे चलकर गंगा के जलस्तर पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल पटना से लेकर डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों तक गंगा के बढ़े जलस्तर को देखते हुए निगरानी और सतर्कता जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है।

अगले तीन दिन अहम

पटना में गंगा के रिकॉर्ड जलस्तर के बाद अब सबसे अधिक नजर डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर है। अगले एक से तीन दिनों में पानी का दबाव हाथीदह और उसके आगे के गेज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है। हाथीदह में पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

फिलहाल जल संसाधन विभाग ने संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने और नदी, तटबंधों तथा निचले इलाकों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में जलस्तर की स्थिति पर ही यह निर्भर करेगा कि गंगा का बढ़ा पानी किन क्षेत्रों में कितना असर डालता है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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