पटना में डेंगू ने पकड़ी रफ्तार, सितंबर में 76 नए मरीज; 243 पहुंचा आंकड़ा, रहे सावधान

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पटना में डेंगू के 76 नए मरीज, आंकड़ा 243 के पार पहुंचा

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में डेंगू ने सितंबर की शुरुआत के साथ रफ्तार पकड़ ली है। महीने के शुरुआती 14 दिनों में ही 76 नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही इस साल पटना में डेंगू के कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 243 हो गई है। जनवरी से अगस्त तक 167 मरीज मिले थे। यानी सितंबर के केवल 14 दिनों में ही मरीजों की संख्या में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी और घरों के आसपास छोटे जलस्रोतों में ठहराव को डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर के लिए अनुकूल माना जा रहा है। अचानक बढ़े मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में संक्रमण को रोकने के लिए निगरानी और बचाव अभियान पर जोर देना जरूरी होगा।

डेंगू के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल डेंगू के मरीज सिर्फ सरकारी अस्पतालों और जांच केंद्रों में ही नहीं मिले हैं। निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में जांच के दौरान भी मरीजों की पहचान हुई है। इससे शहर में संक्रमण के फैलाव को लेकर चिंता बढ़ी है।

पटना के अलग-अलग इलाकों से डेंगू के मामले सामने आए हैं। कंकड़बाग, पोस्टल पार्क, योगीपुर, जक्कनपुर, महेंद्र नगर, राजेंद्र नगर, बोरिंग रोड, बुद्धा कॉलोनी और पाटलिपुत्र कॉलोनी में मरीज मिले हैं। इसके अलावा दीघा, रूपसपुर, अनीसाबाद, पटना सिटी और गुलजारबाग भी प्रभावित इलाकों में शामिल हैं।

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इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे घर और आसपास पानी जमा न होने दें। खासकर बारिश के बाद छोटे-छोटे बर्तनों और खुले स्थानों में जमा पानी की नियमित जांच करनी होगी।

पटना के किन इलाकों पर नजर?

पिछले साल बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल डेंगू से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहे थे। इस बार भी इन दोनों अंचलों के कई क्षेत्रों में संक्रमण का दबाव दिखाई दे रहा है। कंकड़बाग, अजीमाबाद और न्यू कैपिटल अंचल के कई मोहल्लों को भी संवेदनशील माना जा रहा है।

डेंगू का मच्छर केवल बड़े जलजमाव वाले स्थानों में ही नहीं पनपता। घरों की छत, गमले, कूलर, पुराने टायर, बाल्टी, खुले डिब्बे और अन्य छोटे कंटेनर भी इसके प्रजनन का कारण बन सकते हैं। इसलिए सिर्फ सड़क या नाली में जमा पानी पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। नगर निगम की कार्रवाई के साथ लोगों की व्यक्तिगत सतर्कता भी संक्रमण की कड़ी तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

डेंगू में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

तेज बुखार डेंगू के प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकता है। इसके साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी या उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर उन्हें सामान्य वायरल बुखार समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर जांच कराना जरूरी है। खासकर लगातार बुखार रहने या हालत बिगड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

डेंगू की आशंका होने पर पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और चिकित्सकीय निगरानी में रहना जरूरी है। किसी भी दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, विशेषकर बुखार या दर्द की दवाओं को लेकर सावधानी जरूरी है।

डेंगू के चार सीरोटाइप, दोबारा संक्रमण में खतरा

डेंगू वायरस के चार प्रमुख सीरोटाइप माने जाते हैं—डेन-1, डेन-2, डेन-3 और डेन-4। किसी व्यक्ति को पहले एक सीरोटाइप का संक्रमण हो चुका हो और बाद में दूसरे सीरोटाइप से संक्रमण हो, तो गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए पहले डेंगू हो चुके लोगों को बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षणों की स्थिति में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। केवल बुखार कम होने को पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं मानना चाहिए और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय निगरानी जारी रखनी चाहिए।

डेंगू रोकने में फॉगिंग ही काफी नहीं

डेंगू की रोकथाम को लेकर अक्सर फॉगिंग को सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसकी भूमिका मुख्य रूप से वयस्क मच्छरों को नियंत्रित करने तक सीमित है। संक्रमण की कड़ी तोड़ने के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थल को खत्म करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इसी वजह से घरों और आसपास जमा पानी की नियमित जांच जरूरी है। कूलर में पानी लंबे समय तक जमा नहीं रहने देना चाहिए। गमलों के नीचे रखी ट्रे, पुराने टायर, बाल्टी और खुले बर्तनों को भी खाली रखना होगा। निर्माणाधीन इमारतों और खाली प्लॉटों में जमा पानी पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे स्थान लंबे समय तक मच्छरों के प्रजनन का स्रोत बन सकते हैं।

डेंगू का मच्छर साफ पानी में भी पनपता है

एडीज मच्छर को लेकर एक आम धारणा है कि वह केवल गंदे पानी में पनपता है। लेकिन यह मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में भी प्रजनन कर सकता है। यही कारण है कि घर के अंदर मौजूद छोटे जलस्रोतों को नजरअंदाज करना भी भारी पड़ सकता है।

बारिश के बाद कुछ दिनों तक जमा रहने वाला पानी मच्छरों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है। इसलिए बारिश रुकने के बाद घर और आसपास के क्षेत्र की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।

सितंबर से नवंबर तक बढ़ सकता है खतरा

बारिश के बाद तापमान और नमी की स्थिति मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल हो सकती है। ऐसे में सितंबर से नवंबर के बीच डेंगू का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। इस अवधि में लोगों को बुखार और अन्य लक्षणों को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

पटना में सितंबर के पहले 14 दिनों में 76 नए मरीज मिलना इस बढ़ते खतरे का संकेत है। हालांकि संक्रमण की वास्तविक स्थिति समझने के लिए आने वाले दिनों के आंकड़ों पर भी नजर रखना जरूरी होगा।

लोगों की सतर्कता से टूटेगी संक्रमण की कड़ी

डेंगू से निपटने के लिए नगर निगम की फॉगिंग और लार्वा नियंत्रण गतिविधियों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। घर में पानी जमा न होने देना, कूलर और गमलों की नियमित सफाई करना तथा आसपास के छोटे जलस्रोतों को खत्म करना आसान लेकिन महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के सामने बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने की चुनौती है। वहीं लोगों के सामने बीमारी से बचाव और लक्षण दिखने पर समय पर जांच कराने की जिम्मेदारी है। पटना में डेंगू के कुल 243 मामले सामने आ चुके हैं और सितंबर में ही 76 नए मरीज मिलने से चिंता बढ़ी है। बारिश के बाद बदलते हालात को देखते हुए आने वाले हफ्तों में सतर्कता बेहद जरूरी होगी। समय पर पहचान, चिकित्सकीय सलाह और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना ही संक्रमण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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