पटना में बड़ा हादसा, सामुदायिक भवन की नवनिर्मित छत गिरी, गुणवत्ता पर उठे सवाल
पटना के हसपुरा में एक महीने पुराने सामुदायिक भवन की छत धंसी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में सामुदायिक भवन से जुड़ा एक मामला बेलछी प्रखंड के हसपुरा गांव से सामने आया है, जहां करीब एक महीने पहले बने सामुदायिक भवन की छत धंस गई। वार्ड नंबर-11 स्थित अनुसूचित जाति टोला में बनी इस इमारत की छत करीब एक फीट तक नीचे बैठ गई है। निर्माण पूरा हुए अभी ज्यादा समय भी नहीं बीता था कि छत के इस तरह धंसने से भवन निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पटना में भवन की छत धंसने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो भवन का इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की वास्तविकता सामने लाने की मांग की है।
पटना के हसपुरा में भवन की छत धंसी
ग्रामीण पिंकू पासवान के मुताबिक, सामुदायिक भवन की छत एक हिस्से में दब गई है। उन्होंने बताया कि छत नीचे बैठने के बाद भवन की स्थिति देखकर लोगों में डर बना हुआ है। इसकी जानकारी मुखिया प्रतिनिधि रंजन कुमार को दी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मुखिया प्रतिनिधि की ओर से टूटे हुए हिस्से को तोड़कर दोबारा निर्माण कराने की बात कही गई है। ग्रामीण विकास कुमार ने भी बताया कि मामले की जानकारी मुखिया को दी गई है और दोबारा ढलाई कराने का भरोसा दिया गया है।

हालांकि, ग्रामीणों की चिंता सिर्फ छत की मरम्मत तक सीमित नहीं है। उनका सवाल है कि आखिर निर्माण पूरा होने के महज एक महीने के भीतर छत नीचे क्यों बैठ गई? यदि भवन का निर्माण मानकों के अनुसार किया गया था तो इतनी जल्दी इस तरह की समस्या कैसे सामने आई?
पटना में निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
पटना में छत धंसने की घटना ने निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि भवन बनाने के दौरान सामग्री की गुणवत्ता में कमी रही हो सकती है या फिर निर्माण कार्य में किसी स्तर पर लापरवाही हुई होगी।
हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि छत धंसने की वास्तविक वजह क्या है। इसके लिए तकनीकी जांच जरूरी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि समस्या निर्माण सामग्री की वजह से हुई, ढलाई में तकनीकी कमी रही या किसी अन्य कारण से छत पर असर पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि नए भवन की छत का इस तरह नीचे बैठना सामान्य बात नहीं है। इसलिए केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की दोबारा ढलाई कराने के बजाय पूरे निर्माण की गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए।
छत की ढलाई के समय इंजीनियर की मौजूदगी पर सवाल
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि छत की ढलाई के दौरान संबंधित इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी किस स्तर पर हुई और भवन की गुणवत्ता की जांच कैसे की गई।
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ग्रामीणों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी तय होती है। पटना में में हुए ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब भवन का निर्माण हो रहा था, तब मौके पर सामग्री, ढलाई और अन्य तकनीकी मानकों की जांच किसने की।
पंचायत सेवक के प्रतिनिधि के स्तर पर काम देखने की बात भी सामने आई है। इसे लेकर ग्रामीणों ने निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण के दौरान नियमित निरीक्षण हुआ होता तो शायद छत की गुणवत्ता से जुड़ी समस्या समय रहते सामने आ सकती थी।
पटना प्रशासन ने लिया मामले का संज्ञान
मामला सामने आने के बाद प्रखंड प्रशासन ने भी इसकी जानकारी ली है। पटना के बेलछी के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत प्रसून ने बताया कि उन्हें सामुदायिक भवन की छत धंसने की जानकारी मिली है। उन्होंने मौके का मुआयना भी किया है।
बीडीओ के अनुसार, मामले से जुड़े लोगों से जवाब मांगा जाएगा। जांच के दौरान यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पटना प्रशासन के इस रुख के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की जांच सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। ग्रामीण चाहते हैं कि भवन की तकनीकी जांच कराई जाए और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए।
दोबारा ढलाई से पहले हो गुणवत्ता की जांच
ग्रामीणों के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि भवन की छत की दोबारा ढलाई कैसे और किस निगरानी में होगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिना कारण का पता लगाए सिर्फ टूटे हिस्से की मरम्मत कर दी गई तो भविष्य में फिर ऐसी समस्या सामने आ सकती है।

इसलिए उनकी मांग है कि पहले भवन की छत और अन्य निर्माण हिस्सों की तकनीकी जांच हो। इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री, ढलाई की गुणवत्ता और भवन की संरचनात्मक मजबूती की भी जांच की जाए। इसके बाद ही मरम्मत या दोबारा निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो।
एक महीने में धंसी छत ने बढ़ाई चिंता
सामुदायिक भवन ग्रामीणों के लिए कई तरह के सार्वजनिक कार्यों में उपयोगी होता है। ऐसे भवन का निर्माण यदि अच्छी गुणवत्ता के साथ हो तो लंबे समय तक ग्रामीणों को सुविधा मिल सकती है। लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद छत का नीचे बैठ जाना पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है।
हसपुरा के वार्ड नंबर-11 स्थित इस भवन को लेकर ग्रामीण अब स्पष्ट जांच और कार्रवाई चाहते हैं। उनका कहना है कि सरकारी या पंचायत स्तर से होने वाले निर्माण में गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
फिलहाल पटना प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच और जवाब मांगने की बात कही है। अब यह देखना होगा कि जांच में छत धंसने की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और यदि निर्माण में गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है। ग्रामीणों की नजर अब इसी जांच और भवन की दोबारा ढलाई की प्रक्रिया पर है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
