पटना हॉस्टल में NEET छात्रा की मौत: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि, पुलिस जांच पर उठे गंभीर सवाल
पटना हॉस्टल में NEET छात्रा की मौत
पटना हॉस्टल में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप

पटना हॉस्टल में NEET छात्रा की मौत ने पूरे बिहार में सनसनी फैला दी है। घटना के चार दिन बाद सामने आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने से मामला और गंभीर हो गया है। अब इस रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए पटना एम्स भेजा जा रहा है। वहीं, पुलिस की शुरुआती जांच और बाद में बदले गए बयानों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
6 जनवरी को छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में बेहोशी की हालत में पाई गई थी। हॉस्टल कर्मियों ने दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला और अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुरुआत में पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार किया था, लेकिन अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इसके संकेत मिलने के बाद पूरे केस की दिशा बदल गई है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई

पोस्टमॉर्टम की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई है ताकि किसी तरह के सबूत से छेड़छाड़ का आरोप न लगे। पुलिस ने बताया कि रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। इसी बीच, सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए शंभू गर्ल्स हॉस्टल के वार्डन मनीष रंजन को गिरफ्तार कर लिया गया है। इलाज में शामिल सभी डॉक्टरों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
पहले इनकार, फिर बदला बयान
इस केस में पुलिस के रुख को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पहले पुलिस ने कहा था कि छात्रा की यूरिन रिपोर्ट में नींद की दवा का ओवरडोज पाया गया है और उसके मोबाइल की सर्च हिस्ट्री से यह संकेत मिलता है कि वह डिप्रेशन में थी। पुलिस का दावा था कि अब तक की जांच में यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि, 24 घंटे के भीतर ही पुलिस ने बयान बदला और कहा कि पोस्टमॉर्टम में यौन उत्पीड़न की संभावना सामने आई है और इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता।
परिवार का आरोप: हत्या और साजिश

मृत छात्रा के पिता ने साफ तौर पर इसे हत्या बताया है। उनका आरोप है कि हॉस्टल प्रबंधन ने साजिश के तहत उनकी बेटी की हत्या की और बाद में सबूत मिटाने की कोशिश की। परिवार का दावा है कि उनके पहुंचने से पहले हॉस्टल के CCTV फुटेज हटा दिए गए थे। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल वालों ने छात्रा के कमरे में जानबूझकर दवाइयां रख दीं ताकि मामला आत्महत्या का लगे।
पैसे देकर मामला दबाने का आरोप
छात्रा के मामा सुभाष कुमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि FIR दर्ज होने के बाद हॉस्टल की संचालिका ने पैसे का ऑफर देकर केस वापस लेने का दबाव बनाया। उनका कहना है कि हॉस्टल की छवि खराब न हो, इसके लिए समझौता करने की कोशिश की गई। इस मामले की शिकायत पुलिस को दी गई, जिसके बाद कार्रवाई की बात कही गई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है।
जांच का दायरा बढ़ा
पटना पुलिस ने अब जांच का दायरा पटना से लेकर जहानाबाद तक बढ़ा दिया है। अब तक 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है। छात्रा जिस-जिस रास्ते से गुजरी थी, उन सभी जगहों के वीडियो सबूत इकट्ठा किए गए हैं। हॉस्टल को सील कर दिया गया है और सभी छात्राएं वहां से जा चुकी हैं।
विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज

13 जनवरी को छात्रा का शव लेकर परिजन और स्थानीय लोग पटना के कारगिल चौक पहुंचे और प्रदर्शन किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने हॉस्टल में तोड़फोड़ की और कुछ नकाबपोश लोगों ने आगजनी भी की। पुलिस ने इस मामले में अलग से केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सवालों के घेरे में सिस्टम
इस पूरे मामले में पुलिस जांच की निष्पक्षता, मेडिकल रिपोर्ट्स में विरोधाभास और परिवार के गंभीर आरोपों ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें पटना एम्स की सेकेंड पोस्टमॉर्टम राय और आगे आने वाली चार्जशीट पर टिकी हैं। यह मामला न सिर्फ एक छात्रा की मौत का है, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल व्यवस्था और कानून व्यवस्था की भी कड़ी परीक्षा बन चुका है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
