फरार पूर्व IAS संजीव हंस ने SVU को लिखा 4 पन्नों का पत्र, बोले- बिना सबूत बनाया गया आरोपी

संजीव हंस

विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई के बीच फरार चल रहे पूर्व IAS अधिकारी संजीव हंस ने SVU के ADG पंकज दराद को चार पन्नों का पत्र लिखकर अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

पटना: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई के बीच फरार चल रहे पूर्व IAS अधिकारी संजीव हंस ने SVU के ADG पंकज दराद को चार पन्नों का पत्र लिखकर अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें बिना किसी ठोस सबूत और निष्पक्ष जांच के आरोपी बनाया गया है।

पिछले बुधवार से SVU की टीम लगातार संजीव हंस की तलाश कर रही है। दो DSP समेत पांच सदस्यीय टीम लगातार दो दिनों तक उनके आवास पर पहुंची, लेकिन वे वहां नहीं मिले। इसी बीच उनका यह पत्र सामने आया है, जिसमें उन्होंने पूरे मामले को लेकर अपना पक्ष विस्तार से रखा है।

पुराने मामले को नए तरीके से दर्ज करने का आरोप

संजीव हंस ने अपने पत्र में कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज SVU थाना कांड संख्या 05/2025 उन्हीं तथ्यों पर आधारित है, जिनसे जुड़ा रूपसपुर थाना कांड संख्या 18/2023 पहले ही पटना हाईकोर्ट द्वारा रद्द किया जा चुका है। इतना ही नहीं, इस मामले से संबंधित अपील को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था।

पूर्व IAS अधिकारी का आरोप है कि हाईकोर्ट द्वारा पुराने मामले को रद्द किए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने SVU को कुछ सूचनाएं भेजीं, जिसके आधार पर उनके खिलाफ नई FIR दर्ज कर दी गई। उनका कहना है कि नई प्राथमिकी में पुराने आरोपों को ही दोहराया गया है और सिर्फ यह जोड़ा गया है कि उनके जल संसाधन विभाग में कार्यरत रहने के दौरान एक कंपनी को टेंडर मिला था।

संजीव हंस ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि न्यायालय पहले ही इन तथ्यों से जुड़े मामले को खारिज कर चुका है, तो उन्हीं तथ्यों के आधार पर नई प्राथमिकी दर्ज करना कानून की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

सचिव अकेले नहीं लेते टेंडर का फैसला

अपने बचाव में संजीव हंस ने बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता का हवाला देते हुए कहा है कि 350 लाख रुपये से अधिक की निविदाओं का फैसला किसी एक अधिकारी द्वारा नहीं, बल्कि विभागीय निविदा समिति द्वारा किया जाता है।

उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव केवल इस समिति के अध्यक्ष होते हैं, जबकि निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाता है। ऐसे में किसी एक अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं है।

संजीव हंस के अनुसार, बीरपुर स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर परियोजना विश्व बैंक पोषित योजना का हिस्सा थी। इस परियोजना का टेंडर पूरी तरह निर्धारित प्रक्रिया के तहत दिया गया था। इसमें तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय बोली की समीक्षा और विश्व बैंक की मंजूरी जैसे कई चरण शामिल थे।

कई समितियों की मंजूरी के बाद हुआ था टेंडर

पूर्व IAS अधिकारी ने पत्र में दावा किया है कि संबंधित परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति ने दी थी। इसके बाद तकनीकी समिति ने निविदा का मूल्यांकन किया और फिर विभागीय निविदा समिति ने इस पर विचार किया।

उन्होंने कहा कि प्रक्रिया के प्रत्येक महत्वपूर्ण चरण पर विश्व बैंक की सहमति ली गई थी। वित्तीय बोली की समीक्षा के बाद भी मामला विश्व बैंक और अन्य सक्षम समितियों के पास भेजा गया था।

संजीव हंस का कहना है कि जब पूरी प्रक्रिया में कई अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और विभिन्न समितियां शामिल थीं, तब किसी एक व्यक्ति को पूरे मामले के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

रिशु श्री और उनकी कंपनियों से संबंध होने से किया इनकार

पत्र में संजीव हंस ने कारोबारी रिशु श्री और उनसे जुड़ी कंपनियों के साथ किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में जिस 20 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन का उल्लेख किया गया है, वह फरवरी 2022 का है।

संजीव हंस ने स्पष्ट किया कि उस समय वे जल संसाधन विभाग में कार्यरत नहीं थे। इसलिए उस लेन-देन को उनके विभागीय कार्यकाल या किसी सरकारी निर्णय से जोड़ना तथ्यों के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में जिन दो निजी कंपनियों के बीच पैसों के लेन-देन की बात कही गई है, उनसे उनका कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरी तरह दो निजी पक्षों के बीच का मामला है और इसमें उनकी किसी भूमिका का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।

ED की रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल

संजीव हंस ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भेजी गई सूचना में भी उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं बताया गया है। उन्होंने पूछा कि जब जांच एजेंसियों के पास उनके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं है, तो आखिर किस आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया।

उन्होंने SVU से आग्रह किया है कि मामले की जांच सरकारी अभिलेखों, आधिकारिक दस्तावेजों और वास्तविक तथ्यों के आधार पर की जाए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी।

जांच में सहयोग का भरोसा

अपने चार पन्नों के पत्र के अंत में संजीव हंस ने जांच एजेंसी को भरोसा दिलाया है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह के बिना सभी तथ्यों की समीक्षा की जाए।

हालांकि, इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि जब संजीव हंस जांच में सहयोग की बात कर रहे हैं, तो वे अब तक SVU के सामने पेश क्यों नहीं हुए हैं। पिछले कई दिनों से विशेष निगरानी इकाई की टीम उनकी तलाश में जुटी हुई है, लेकिन अब तक उनका पता नहीं चल सका है।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

टेंडर घोटाला मामले में SVU लगातार कार्रवाई कर रही है। इस मामले में पहले ही कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटी हुई है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या संजीव हंस जांच एजेंसी के सामने पेश होंगे या फिर SVU उनके खिलाफ कोई और सख्त कदम उठाएगी। दूसरी ओर, उनके द्वारा लिखे गए इस पत्र ने पूरे मामले को एक नया आयाम दे दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच एजेंसी उनके दावों को किस तरह परखती है और इस चर्चित टेंडर घोटाला मामले में आगे क्या नया खुलासा सामने आता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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