बक्सर में पावर प्लांट के लिए बनेगा 903 करोड़ का रेल कॉरिडोर, सालाना 62.5 लाख टन कोयले की जरूरत
बक्सर में 903 करोड़ से बनेगा रेल कॉरिडोर, पावर प्लांट को मिलेगा लाभ
निष्कर्ष भारत, संवाददाता बक्सर। बक्सर में 1,320 मेगावाट के चौसा ताप बिजली घर को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए 903.01 करोड़ रुपये की लागत से रेल कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य सिर्फ पावर प्लांट तक रेलवे लाइन पहुंचाना नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन के लिए जरूरी कोयले की नियमित और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। परियोजना का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड करेगी। इसे पूरा करने के लिए 36 महीने यानी तीन साल की समय-सीमा तय की गई है।
रेल कनेक्शन तैयार होने के बाद सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से आने वाली कोयले की रेक सीधे चौसा पावर प्लांट की रेलवे साइडिंग तक पहुंच सकेगी। इससे कोयला ढुलाई की व्यवस्था अधिक सुगम होगी और प्लांट में ईंधन की नियमित उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
बक्सर में चौसा पावर प्लांट तक पहुंचेगी रेल लाइन
बक्सर में प्रस्तावित रेल कॉरिडोर के तहत चौसा रेलवे स्टेशन और पवनी कमरपुर हॉल्ट के आसपास मौजूद रेल लाइन को पावर प्लांट परिसर से जोड़ा जाएगा। इसके लिए स्थायी रेलवे साइडिंग के साथ एलिवेटेड रेल ट्रैक भी बनाया जाएगा।
एलिवेटेड रेल ट्रैक परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए रेलवे लाइन के लिए जमीन की जरूरत को कम रखने की कोशिश की जाएगी। साथ ही स्थानीय आबादी और आसपास के क्षेत्र पर परियोजना का असर कम से कम रखने का प्रयास किया जाएगा।

नई रेलवे व्यवस्था बनने के बाद कोयले से लदी मालगाड़ियों को प्लांट तक पहुंचने में अधिक सुविधा होगी। इससे कोयला आपूर्ति की पूरी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सालाना 62.5 लाख टन कोयले की जरूरत
बक्सर चौसा पावर प्लांट को सुचारू रूप से चलाने के लिए बड़े पैमाने पर कोयले की जरूरत होगी। रेल कनेक्शन तैयार होने के बाद हर साल करीब 6.25 मिलियन टन यानी 62.5 लाख टन कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बिजली उत्पादन में कोयले की नियमित उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि ईंधन की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा आती है तो उसका असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सीधे रेलवे साइडिंग तक कोयले की रेक पहुंचने से प्लांट के संचालन को स्थिर रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बक्सर पावर प्लांट से करीब 9,828 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन
जानकारी के अनुसार, चौसा स्थित पावर प्लांट से सालाना करीब 9,828 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। उत्पादित बिजली का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 1,120 मेगावाट बिजली बिहार को मिलने की बात कही गई है।
इस लिहाज से चौसा पावर प्लांट बिहार की बिजली जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। यहां होने वाला उत्पादन राज्य के घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कृषि और औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी अहम हो सकता है।
प्लांट में 660-660 मेगावाट की दो यूनिट
बक्सर के चौसा पावर प्लांट में फिलहाल 660-660 मेगावाट क्षमता की दो यूनिट हैं। इनमें पहली यूनिट व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी है।
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वहीं, दूसरी यूनिट ने 31 अगस्त 2026 को लगातार 72 घंटे तक पूरी क्षमता पर परीक्षण पूरा किया है। इसके बाद परियोजना के अगले चरण को लेकर भी तैयारियां जारी हैं।
800 मेगावाट की तीसरी यूनिट की तैयारी
प्लांट की क्षमता को और बढ़ाने के लिए 800 मेगावाट की तीसरी यूनिट लगाने की तैयारी भी चल रही है। इसके पूरा होने के बाद चौसा पावर प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 2,120 मेगावाट तक पहुंच सकती है।
इस विस्तार के साथ प्लांट के लिए कोयले की जरूरत भी बढ़ेगी। ऐसे में प्रस्तावित रेल कॉरिडोर को भविष्य की ईंधन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा माना जा रहा है।
बक्सर में रेल कॉरिडोर से कोयला आपूर्ति होगी आसान
रेल कॉरिडोर तैयार होने के बाद कोयले की रेक को पावर प्लांट की अपनी रेलवे साइडिंग तक पहुंचाने की व्यवस्था होगी। इससे कोयले को रेल नेटवर्क से उतारकर सड़क मार्ग या दूसरे माध्यमों से प्लांट तक पहुंचाने की जरूरत कम हो सकती है।
रेल के जरिए बड़ी मात्रा में कोयले की ढुलाई संभव होने के कारण प्लांट के लिए ईंधन आपूर्ति अधिक व्यवस्थित हो सकती है। साथ ही कोयला परिवहन की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य
903.01 करोड़ रुपये की इस रेल परियोजना को पूरा करने के लिए 36 महीने की समय-सीमा तय की गई है। परियोजना पूरी होने के बाद चौसा पावर प्लांट मुख्य रेल नेटवर्क से सीधे जुड़ जाएगा।

कुल मिलाकर, बक्सर में तैयार होने वाला यह रेल कॉरिडोर सिर्फ रेलवे ट्रैक का विस्तार नहीं है। इसका सीधा संबंध बिजली उत्पादन के लिए जरूरी कोयले की आपूर्ति से है। रेल नेटवर्क के जरिए कोयले की नियमित उपलब्धता बनी रहने पर चौसा पावर प्लांट को अपनी उत्पादन क्षमता के अनुसार बिजली बनाने में मदद मिल सकेगी।
प्लांट की मौजूदा और प्रस्तावित क्षमता को देखते हुए आने वाले समय में इस रेल कनेक्टिविटी की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे एक ओर कोयले की ढुलाई आसान होगी, वहीं दूसरी ओर बिहार को मिलने वाली बिजली की आपूर्ति को भी स्थिर रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
