बख्तियारपुर नाम विवाद पर श्याम रजक बोले- नीतीश कुमार का सम्मान विकास के काम से…न की नाम बदलने से
ख्तियारपुर नाम बदलने पर श्याम रजक ने दिया बड़ा बयान
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बख्तियारपुर के नाम बदलने को लेकर बिहार की राजनीति में बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान के बाद शुरू हुई इस चर्चा में अब सत्तारूढ़ JDU के विधायक श्याम रजक ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बख्तियारपुर के नामकरण से ज्यादा बिहार के विकास और नीतीश कुमार के विजन को महत्वपूर्ण बताया है। श्याम रजक ने कहा कि नीतीश कुमार का सम्मान किसी जगह का नाम बदलने से नहीं, बल्कि उनके विकास के विजन को आगे बढ़ाने से होगा।
बख्तियारपुर का नाम बदलने पर क्या बोले सम्राट चौधरी?
दरअसल, एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर सवाल पूछा गया था। उनसे पूछा गया कि क्या बिहार सरकार इस शहर का नाम बदलने पर विचार कर रही है। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उनकी राय में बख्तियारपुर का नाम बदला जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इसके पीछे ऐतिहासिक वजह का भी उल्लेख किया। उन्होंने बख्तियारपुर नाम को बख्तियार खिलजी से जोड़ते हुए कहा कि इतिहास में बख्तियार खिलजी का नाम नालंदा विश्वविद्यालय के विनाश से जोड़ा जाता है। इसी आधार पर उन्होंने बख्तियारपुर का नाम बदलने की जरूरत बताई।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। NDA के सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के नेता की ओर से बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुरम’ किए जाने का सुझाव भी दिया गया।
श्याम रजक ने नामकरण की राजनीति पर क्या कहा?
इस पूरे विवाद के बीच JDU विधायक श्याम रजक ने नाम बदलने की चर्चा को लेकर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार को समझना है तो केवल उनके नाम या जन्मस्थान को देखने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार को उनके विजन और बिहार के लिए किए गए विकास कार्यों के जरिए समझना चाहिए।
श्याम रजक ने कहा कि नीतीश कुमार की पहचान सिर्फ इस वजह से नहीं है कि उनका जन्म बख्तियारपुर में हुआ है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पूरे बिहार के विकास के लिए काम किया है। उनके अनुसार, एक समय बिहार की स्थिति खराब मानी जाती थी, लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य ने विकास की दिशा में लंबा सफर तय किया।
‘नीतीश कुमार का सम्मान विकास के काम से’
श्याम रजक ने नीतीश कुमार को ‘इतिहास पुरुष’ बताते हुए कहा कि किसी अनुमंडल या स्थान का नाम उनके नाम पर रख देने से उनके सम्मान में कोई बड़ी वृद्धि नहीं होगी। उनका कहना है कि नीतीश कुमार को देश में उनके काम और विजन के लिए जाना जाता है।
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JDU विधायक के बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि नाम बदलने के बजाय बिहार के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के लिए जो सपना देखा है, उसे पूरा करना ही उनके प्रति वास्तविक सम्मान होगा।
बख्तियारपुर के नाम पर सियासत के बीच विकास की बात
बख्तियारपुर के नाम को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस को श्याम रजक ने विकास के मुद्दे से जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि किसी स्थान का नाम बदलना अपने आप में विकास का पैमाना नहीं हो सकता। इसके बजाय राज्य को बेहतर बनाने के लिए काम किया जाना जरूरी है।
उन्होंने बिहार की ऐतिहासिक विरासत का भी जिक्र किया और राज्य को सम्राट अशोक की विरासत से जोड़ते हुए बड़े लक्ष्य की बात कही। श्याम रजक के मुताबिक, बिहार को ऐसा विकसित राज्य बनाया जाना चाहिए, जो भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
उनका कहना था कि राजनीतिक बहस को छोटे मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय बिहार को माध्यम बनाकर बड़े विकास लक्ष्य हासिल करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
बख्तियारपुर नाम बदलने की चर्चा में अब आगे क्या?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान के बाद बख्तियारपुर का नाम बदलने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर नाम बदलने के पक्ष में ऐतिहासिक कारण सामने रखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर JDU विधायक श्याम रजक ने नामकरण के बजाय विकास और विजन को प्राथमिकता देने की बात कही है।

ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बख्तियारपुर का नाम बदलने को लेकर सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है या नहीं। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में भी इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं होने की बात कही थी। इसलिए अभी यह मामला मुख्य रूप से राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के स्तर पर है।
नाम बदलने की चर्चा से जुड़ी सियासत आगे भी गरमाने की संभावना है। अलग-अलग दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाती है।
फिलहाल श्याम रजक ने साफ कर दिया है कि उनकी नजर में नीतीश कुमार का सम्मान किसी स्थान के नामकरण से नहीं, बल्कि उनके विकास के विजन को आगे बढ़ाने से जुड़ा है। बख्तियारपुर के नाम को लेकर शुरू हुई बहस अब इतिहास, राजनीति और विकास के मुद्दों के बीच पहुंच गई है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
