बिहार पंचायत चुनाव 2026: पुराने परिसीमन पर ही होगा मतदान, बदलेगा आरक्षण रोस्टर, पहली बार M-3 EVM से वोटिंग

बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तैयारी, पुराने परिसीमन और बदले हुए आरक्षण रोस्टर के साथ मतदान

बिहार पंचायत चुनाव 2026

बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तैयारी शुरू

पटना। बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार चुनाव 30 साल पुराने परिसीमन के आधार पर ही कराए जाएंगे। यानी वार्ड, ग्राम पंचायत और पंचायत समिति की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, आरक्षण रोस्टर में बड़ा बदलाव किया जाएगा, जिससे कई सीटों की कैटेगरी बदल सकती है।


राज्य भर में कुल 2,55,379 पदों के लिए पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। इनमें मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य, सरपंच और पंच शामिल हैं।

क्या होता है पंचायत परिसीमन?

पंचायत परिसीमन (Panchayat Delimitation) वह प्रक्रिया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत, वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद की भौगोलिक सीमाएं तय की जाती हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रत्येक निर्वाचित प्रतिनिधि लगभग समान जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करे।

लोकसभा और विधानसभा की तरह ही पंचायत स्तर पर भी परिसीमन बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।

नया परिसीमन क्यों नहीं हो सका?

पहले माना जा रहा था कि पंचायत चुनाव 2026 नए परिसीमन के आधार पर होंगे, लेकिन जनगणना 2021 नहीं होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। फिलहाल राज्य के पास पंचायतों की अद्यतन जनसंख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

यदि अभी परिसीमन कराया जाता, तो 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करना पड़ता, जो करीब 15 साल पुराने हैं। इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग ने पुराने परिसीमन पर ही चुनाव कराने का फैसला किया है।

30 साल पुराना है पंचायत परिसीमन

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, बिहार में पंचायतों का अंतिम पूर्ण परिसीमन 1994-95 में 1991 की जनगणना के आधार पर हुआ था। इसके बाद 2001, 2011, 2016 और 2021 में पंचायत चुनाव हुए, लेकिन परिसीमन नहीं बदला गया।

इस दौरान कई ग्रामीण इलाके शहरी निकायों में शामिल हुए, जिन्हें ध्यान में रखते हुए छोटे-मोटे प्रशासनिक संशोधन किए गए।

आरक्षण रोस्टर में होगा बड़ा बदलाव

पंचायत चुनाव 2026 में आरक्षण रोस्टर बदलेगा। बिहार पंचायत राज अधिनियम की धाराओं (13, 38, 65 और 91) के अनुसार, प्रत्येक दो क्रमिक चुनावों के बाद आरक्षण रोस्टर बदलना अनिवार्य है।

इसका मतलब यह है कि:

  • जो सीट अभी SC के लिए आरक्षित है, वह सामान्य हो सकती है
  • सामान्य सीट आरक्षित श्रेणी (SC, ST, EBC) में जा सकती है
  • कुल सीटों का 50% आरक्षण के दायरे में रहेगा।

महिलाओं को 50% आरक्षण बरकरार

पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को पहले की तरह 50% आरक्षण मिलेगा। खास बात यह है कि महिलाओं को “आरक्षण के भीतर आरक्षण” दिया जाता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी वर्ग के लिए 50 सीटें आरक्षित हैं, तो उनमें से 25 सीटें उसी वर्ग की महिलाओं के लिए होंगी।

आरक्षण तय करने का फॉर्मूला

  • SC और ST को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण
  • लगभग 20% आरक्षण EBC वर्ग को
  • कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं
  • पदों का आरक्षण जिलाधिकारी (DM) तय करेंगे

मुखिया, पंचायत समिति, प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्ष पदों के लिए अलग-अलग स्तर पर आरक्षण तय होता है।

पहली बार M-3 EVM से होंगे पंचायत चुनाव

बिहार पंचायत चुनाव 2026 में पहली बार M-3 (थर्ड जनरेशन) EVM का इस्तेमाल होगा। इसके लिए 32,000 से अधिक नई EVM खरीदी जा रही हैं, जिन पर 64 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे।

सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए कुल 200 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।

M-3 EVM क्यों है खास?

  • 24 बैलेट यूनिट तक जोड़ने की सुविधा
  • एक मशीन से 384 उम्मीदवारों तक मतदान
  • एक कंट्रोल यूनिट + 6 पदों के लिए 6 बैलेट यूनिट
  • EVM की आपूर्ति करेगी ECIL, बेंगलुरु

राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव में VVPAT का उपयोग नहीं किया जाएगा। पहले की तरह टोटलाइजर सिस्टम लागू रहेगा।

2021 की तुलना में कम चरणों में होगा चुनाव

पंचायत चुनाव 2021 में 11 चरणों में मतदान हुआ था, जो करीब ढाई महीने चला। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 2026 में कम चरणों में चुनाव कराए जाएंगे।

इसके साथ ही:

  • 100% वेबकास्टिंग
  • रियल-टाइम रिपोर्टिंग
  • टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी
  • जैसी सुविधाएं लागू की जाएंगी।

निष्कर्ष

बिहार पंचायत चुनाव 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। जहां एक ओर पुराने परिसीमन पर चुनाव होंगे, वहीं दूसरी ओर आरक्षण रोस्टर में बदलाव और M-3 EVM का इस्तेमाल इस चुनाव को खास बनाएगा। इससे पंचायत स्तर पर सत्ता संतुलन और नेतृत्व में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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