बिहार में बनेंगी 12 नई टाउनशिप, पटना में 81 हजार एकड़ में ग्रीनफील्ड टाउनशिप; 10 लाख करोड़ निवेश का दावा

टाउनशिप

प्रतीकात्मक चित्र

पटना: बिहार सरकार राज्य में शहरी विकास और औद्योगिक विस्तार को नई दिशा देने की तैयारी में है। राज्य में 12 नई टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई गई है। इन प्रस्तावित टाउनशिप के लिए करीब साढ़े छह लाख एकड़ जमीन का उपयोग किए जाने की बात कही गई है। इनमें पटना में लगभग 81 हजार एकड़ में ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इससे राज्य में निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने यह बातें पटना के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहीं, जहां बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में सफल 2027 नवनियुक्त पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

पटना की ग्रीनफील्ड टाउनशिप में 10 लाख करोड़ निवेश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, पटना में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड टाउनशिप के विकास में करीब 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। सरकार का लक्ष्य टाउनशिप के माध्यम से आधुनिक शहरी सुविधाओं, आवास, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर ढांचा तैयार करना है।

ग्रीनफील्ड टाउनशिप का विकास ऐसे क्षेत्रों में किया जाएगा जहां नए सिरे से शहरी बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सके। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं के आकार और संभावित निवेश से बिहार में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।

2027 नवनियुक्त अधिकारियों को मिले नियुक्ति पत्र

कार्यक्रम में BPSC की 70वीं परीक्षा में सफल 2027 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। मुख्यमंत्री ने कुछ चयनित अभ्यर्थियों को स्वयं नियुक्ति पत्र सौंपे। नियुक्ति पाने वालों में करीब 200 अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) और 136 पुलिस उपाधीक्षक (DSP) भी शामिल हैं।

नवनियुक्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनसे निष्पक्ष और भयमुक्त होकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के फैसलों का सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। अधिकारियों को कानून और संविधान के अनुरूप निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों की कलम से लिए गए फैसलों से आम नागरिक का सम्मान बढ़ सकता है और उनके जीवन में आगे बढ़ने के अवसर पैदा हो सकते हैं।

औद्योगिक कॉरिडोर और स्टील हब पर सरकार का जोर

बिहार में औद्योगिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कई योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब 51 हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावित स्टील हब के लिए सात बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू किया गया है। सरकार का मानना है कि बड़े औद्योगिक निवेश से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

स्टील और अन्य उद्योगों के लिए विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की योजना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

PPP मॉडल से आधुनिक होंगे जिला मुख्यालयों के बस स्टैंड

राज्य सरकार विकास परियोजनाओं में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल का अधिक इस्तेमाल करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिला मुख्यालयों में PPP मोड पर आधुनिक बस स्टैंड और टाउनशिप विकसित किए जाएंगे।

सरकार परिवहन से जुड़ी कुछ व्यवस्थाओं को भी PPP मॉडल से जोड़ने की योजना बना रही है। इनमें पुलिसिंग, चेक पोस्ट और टोल वसूली जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का इस्तेमाल कर सार्वजनिक सुविधाओं को आधुनिक बनाना है।

पटना से बोधगया की दूरी अब करीब डेढ़ घंटे

मुख्यमंत्री ने बिहार में सड़क और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे के कारण पटना से बोधगया का सफर अब काफी कम समय में पूरा हो रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले पटना से बोधगया पहुंचने में चार से पांच घंटे तक लगते थे, जबकि अब सड़क मार्ग से यह यात्रा करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकती है। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

बिहार का बजट बढ़कर 3.47 लाख करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार का बजट पहले करीब छह हजार करोड़ रुपये था। वर्ष 2005 में यह बढ़कर 23 हजार करोड़ रुपये हुआ और अब राज्य का बजट 3.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि बढ़ते बजट के साथ सरकार का ध्यान बुनियादी ढांचे, उद्योग, रोजगार और शहरी विकास पर है। नई टाउनशिप और औद्योगिक परियोजनाओं को इसी व्यापक विकास योजना का हिस्सा बताया गया।

2030 तक एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार का लक्ष्य

बिहार सरकार ने 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2020 से 2025 के दौरान 10 लाख सरकारी नौकरियों के लक्ष्य के मुकाबले करीब 12 लाख सरकारी नौकरियां दी गईं। इसके अलावा 50 लाख लोगों को रोजगार से जोड़ने का भी दावा किया गया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले आठ-नौ महीनों में करीब दो लाख सरकारी नौकरियां और छह लाख से अधिक रोजगार दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में उद्योग, टाउनशिप, बुनियादी ढांचे और निजी निवेश के जरिए रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाएगा।

शहरीकरण और रोजगार को साथ बढ़ाने की तैयारी

बिहार में 12 नई टाउनशिप की योजना को सरकार राज्य के तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य से जोड़कर देख रही है। पटना में प्रस्तावित बड़े पैमाने की ग्रीनफील्ड टाउनशिप, औद्योगिक कॉरिडोर, स्टील हब और आधुनिक परिवहन सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की योजना है।

अब इन योजनाओं के क्रियान्वयन, भूमि उपयोग, निवेश और समयसीमा पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं तय योजना के अनुसार जमीन पर उतरती हैं, तो बिहार के शहरी ढांचे, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट