मराठा आरक्षण पर जरांगे का बड़ा ऐलान, 15 सितंबर को मुंबई मार्च, ‘आखिरी लड़ाई’की बड़ी तैयारी
मराठा आरक्षण पर जरांगे का ऐलान, 15 सितंबर से मुंबई मार्च
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (मुंबई)। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने एक बार फिर बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने 15 सितंबर को अंतरवाली सरती से मुंबई की ओर मार्च शुरू करने की घोषणा की है। जरांगे ने समर्थकों से राय लेने के बाद यह फैसला किया। उन्होंने मौजूद लोगों से पूछा कि वे मुंबई जाना चाहते हैं या अंतरवाली सरती में ही आंदोलन जारी रखना चाहते हैं। समर्थकों ने मुंबई जाने के पक्ष में नारे लगाए, जिसके बाद जरांगे ने इसे अंतिम फैसला बताया।
जरांगे ने आंदोलन को मराठा समुदाय की आखिरी लड़ाई बताते हुए समर्थकों से पूरी तैयारी के साथ मुंबई पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य समुदाय के बच्चों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है।
जरांगे ने 15 सितंबर की तारीख तय की
मनोज जरांगे पाटिल ने कहा कि मुंबई मार्च 15 सितंबर को अंतरवाली सरती से शुरू होगा। आंदोलन में बड़ी संख्या में समर्थकों और वाहनों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए उन्होंने माना कि एक ही दिन में मुंबई पहुंचना संभव नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि भीड़ के आकार को देखते हुए मार्च को चरणों में आगे बढ़ाना पड़ेगा। रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर पड़ाव की योजना बनाई गई है। जरांगे ने समर्थकों से अपील की कि वे अनुशासन बनाए रखें और निर्धारित मार्ग के जरिए मुंबई की ओर बढ़ें।
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उनके अनुसार, आंदोलनकारियों का लक्ष्य किसी भी स्थिति में मुंबई पहुंचना है। उन्होंने कहा कि समर्थकों को मुंबई पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाना होगा।
जरांगे के मार्च का क्या होगा रूट?
घोषित कार्यक्रम के अनुसार, अंतरवाली सरती से शुरू होने वाला मार्च पहले बीड जिले के पटोदा पहुंचेगा। इसके बाद आंदोलनकारी अहिल्यानगर जिले के श्रीगोंडा की ओर बढ़ेंगे। मार्च का अगला प्रमुख पड़ाव पुणे का हड़पसर होगा। इसके बाद आंदोलनकारी रायगढ़ जिले के खोपोली पहुंचेंगे। खोपोली से आगे जरांगे पाटिल और उनके समर्थक मुंबई की ओर बढ़ेंगे।

इस तरह प्रस्तावित मार्ग में पटोदा, श्रीगोंडा, हड़पसर और खोपोली प्रमुख पड़ाव होंगे। जरांगे ने बताया कि कई अन्य क्षेत्रों के समर्थकों ने भी अपने इलाके को मार्च के रूट में शामिल करने का अनुरोध किया है। ऐसे में आगे चलकर मार्ग में बदलाव या अतिरिक्त पड़ाव जोड़े जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
19 सितंबर को आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन
मुंबई पहुंचने के बाद आंदोलन का अगला चरण 19 सितंबर से शुरू करने का ऐलान किया गया है। जरांगे ने कहा कि वह मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। इस घोषणा से साफ है कि आंदोलन को केवल मुंबई मार्च तक सीमित रखने की योजना नहीं है। मुंबई पहुंचने के बाद भी आरक्षण की मांग को लेकर धरना और भूख हड़ताल जारी रखने की तैयारी है।
जरांगे ने समर्थकों से इस मुद्दे पर अपना ध्यान केंद्रित रखने को कहा है। उनका कहना है कि आंदोलन का मकसद मराठा समुदाय के बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाना और उनके लिए अधिकार सुनिश्चित करना है।
भूख हड़ताल के 15वें दिन बोले जरांगे
मुंबई मार्च की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब जरांगे पाटिल अपनी भूख हड़ताल के 15वें दिन थे। समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वह केवल सलाइन ड्रिप की वजह से उनसे बात कर पा रहे हैं। उन्होंने आंदोलन को समुदाय के लिए जीवन-मरण का संघर्ष बताते हुए कहा कि वे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। जरांगे ने अपने समर्थकों से उन लोगों की सोच को भी ध्यान में रखने की अपील की, जो उनके आंदोलन के खिलाफ काम कर रहे हैं।
लंबी भूख हड़ताल के बीच मुंबई मार्च का ऐलान आंदोलन को और बड़ा रूप देने की दिशा में कदम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के मुंबई पहुंचने की स्थिति में प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
समर्थकों ने मुंबई जाने पर जताई सहमति
मुंबई मार्च का फैसला लेने से पहले जरांगे ने वहां मौजूद समर्थकों से राय ली। उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वे मुंबई जाना चाहते हैं या अंतरवाली सरती में ही आंदोलन जारी रखना चाहते हैं। इसके जवाब में समर्थकों ने मुंबई जाने के समर्थन में नारे लगाए। इसके बाद जरांगे ने कहा कि फैसला अंतिम है और अब मुंबई की ओर मार्च किया जाएगा।
जरांगे के इस ऐलान के साथ ही आंदोलन की आगे की रणनीति भी सामने आ गई है। अब समर्थकों को निर्धारित तारीख से मार्च शुरू करने की तैयारी करनी होगी। आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए इसे कई चरणों में आगे बढ़ाने की योजना है।
बड़ी भीड़ के कारण चरणों में आगे बढ़ेगा मार्च
जरांगे ने कहा कि बड़ी संख्या में वाहन और प्रदर्शनकारी एक साथ मुंबई पहुंचेंगे तो एक दिन में यात्रा पूरी करना मुश्किल होगा। इसी वजह से मार्च को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है।
रास्ते में चार प्रमुख पड़ाव निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक पड़ाव पर आंदोलनकारियों के ठहरने और आगे की यात्रा की तैयारी की जाएगी। जरांगे ने कहा कि जहां भी आंदोलनकारी जाएं, उनका अंतिम लक्ष्य मुंबई पहुंचना और अपनी मांग के लिए संघर्ष जारी रखना होना चाहिए।

आंदोलन में शामिल होने वाले समर्थकों की संख्या और अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाले समर्थन के आधार पर मार्च का आकार बढ़ने की संभावना है। कई इलाकों के लोगों ने पहले ही मार्च को अपने क्षेत्र से गुजारने की मांग की है।
मराठा आरक्षण आंदोलन फिर चर्चा में
मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। आरक्षण की मांग को लेकर समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं। मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व में भी इस मांग को लेकर कई बड़े आंदोलन सामने आए हैं। अब 15 सितंबर से मुंबई मार्च और 19 सितंबर से आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा ने इस मुद्दे को फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जरांगे के मुताबिक, यह आंदोलन मराठा समुदाय के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
अब मुंबई मार्च पर सबकी नजर
15 सितंबर को अंतरवाली सरती से शुरू होने वाले मार्च पर अब सभी की नजरें हैं। पटोदा, श्रीगोंडा, हड़पसर और खोपोली के रास्ते मुंबई पहुंचने की योजना बनाई गई है। इसके बाद 19 सितंबर को आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गई है। आंदोलन का आकार कितना बड़ा होगा और इसमें कितने लोग शामिल होंगे।
यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल जरांगे पाटिल ने समर्थकों की सहमति के बाद मुंबई मार्च की तारीख और प्रस्तावित रूट घोषित कर दिया है। अब 15 सितंबर से शुरू होने वाला यह मार्च मराठा आरक्षण आंदोलन की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
