राहुल गांधी अदूरदर्शी नेता, वंदे मातरम विवाद पर JDU नेता बोले- एक समय कांग्रेस भी छोड़ देगी

राहुल गांधी

वंदे मातरम विवाद के बीच JDU ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। राहुल गांधी को लेकर JDU ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। वंदे मातरम विवाद के बीच जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अदूरदर्शी नेता करार दिया। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की नीतियों और राजनीतिक फैसलों के कारण कांग्रेस के कई पुराने और भरोसेमंद सहयोगी उससे दूरी बना चुके हैं।

पटना में एक मीडियाकर्मी से बातचीत के दौरान राजीव रंजन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति में लगातार बदलाव आया है। उनके मुताबिक, पार्टी के कई सहयोगी दलों के साथ उसके रिश्तों में खटास आई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां कांग्रेस के लिए चिंता का विषय हैं।

राहुल गांधी पर JDU का सीधा हमला

JDU प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व के फैसलों का असर उसके सहयोगी दलों के साथ संबंधों पर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की अदूरदर्शिता के कारण कई ऐसे दल, जो कभी कांग्रेस के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते थे, अब उससे दूरी बनाने लगे हैं।

राजीव रंजन ने कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी आ सकता है, जब पार्टी के भीतर राहुल गांधी के अलावा कोई बड़ा सहयोगी नहीं बचेगा। उन्होंने यहां तक दावा किया कि अंततः कांग्रेस भी राहुल गांधी का साथ छोड़ देगी।

सहयोगी दलों से दूरी का मुद्दा

जदयू नेता ने अपने बयान में कांग्रेस के सहयोगी दलों के साथ संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में कांग्रेस को अपने राजनीतिक सहयोगियों के साथ कई स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

राजीव रंजन ने डीएमके का उदाहरण देते हुए कहा कि राहुल गांधी की ओर से समय पर दूरदर्शी राजनीतिक फैसले नहीं लिए जाने के कारण कांग्रेस के कई सहयोगियों में असंतोष पैदा हुआ। हालांकि, यह बयान जदयू की ओर से कांग्रेस और उसके नेतृत्व को लेकर किया गया राजनीतिक दावा है।

वंदे मातरम विवाद पर JDU का रुख

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच जारी विवाद पर भी जदयू प्रवक्ता ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद में मूल सवाल यह है कि संसद से पारित कानून का सम्मान किया जाए या नहीं।

राजीव रंजन ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच किसी मुद्दे को लेकर वैचारिक और राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग मुद्दों पर अलग राय रखना स्वाभाविक है, लेकिन उनके अनुसार जब किसी विषय पर संसद से कानून पारित हो जाता है तो उसका सम्मान और पालन करना जरूरी होता है।

राहुल गांधी को कानून के सम्मान की नसीहत

जदयू नेता ने राहुल गांधी से कानून और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे पर असहमति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन कानून बनने के बाद उसके प्रावधानों का पालन करना सभी के लिए आवश्यक है।

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राजीव रंजन के मुताबिक, संसद से पारित कानून किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के लिए अलग-अलग नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का सम्मान प्रत्येक व्यक्ति और राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।

कांग्रेस की राजनीति पर उठाए सवाल

राजीव रंजन ने कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक दिशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने पुराने सहयोगियों के साथ संबंधों पर विचार करने की जरूरत है। उनके अनुसार, गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दलों का भरोसा बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

जदयू प्रवक्ता ने दावा किया कि कांग्रेस के साथ लंबे समय तक खड़े रहने वाले कई राजनीतिक दल अब अलग रुख अपना रहे हैं। उन्होंने इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति और फैसलों को जिम्मेदार बताया।

बयान के सियासी मायने

वंदे मातरम विवाद के बीच जदयू की ओर से राहुल गांधी पर किया गया यह हमला बिहार की सियासत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजीव रंजन ने एक ओर राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के सहयोगी दलों से उसके रिश्तों को लेकर भी निशाना साधा।

जदयू नेता का बयान ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय राजनीति में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है। ऐसे में वंदे मातरम जैसे विषय पर कानून और उसके सम्मान का सवाल उठाकर जदयू ने कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की है।

फिलहाल राजीव रंजन प्रसाद के बयान के बाद वंदे मातरम विवाद को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी राजनीतिक गलियारों की नजर रहेगी।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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