गंगोत्री-मानसरोवर के जल से होगा विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग का अभिषेक, हेलीकाप्टर से होगी पुष्पवर्षा

मोतिहारी के कैथवलिया में स्थापित होने वाला विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग

मोतिहारी के कैथवलिया में स्थापित होने वाला विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग

मोतिहारी में स्थापित होगा विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग

मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी अंतर्गत कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया खेत में 17 जनवरी को एक ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। यहां विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग की भव्य स्थापना की जाएगी। यह आयोजन न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। खास बात यह है कि शिवलिंग का अभिषेक गंगोत्री, मानसरोवर, यमुनोत्री, हरिद्वार समेत पांच पवित्र नदियों के जल से किया जाएगा और इसके लिए हेलिकॉप्टर की मदद ली जाएगी।

33 फीट ऊंचा, 210 टन वजनी शिवलिंग

इस विशाल शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट है और इसका वजन लगभग 210 मीट्रिक टन बताया जा रहा है। इसे एक ही ग्रेनाइट पत्थर से तराशा गया है। शिवलिंग के निर्माण पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसका निर्माण तमिलनाडु के प्रसिद्ध शिल्प क्षेत्र महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में किया गया, जहां बीते करीब 10 वर्षों से इस पर काम चल रहा था। इसके मुख्य शिल्पकार लोकनाथ हैं, जिनकी टीम ने इस अद्भुत कृति को आकार दिया।

भोपाल से मंगाई गईं विशाल क्रेन

इतने विशाल शिवलिंग को स्थापित करना भी अपने आप में एक तकनीकी चुनौती है। इसके लिए भोपाल से 750 टन क्षमता वाली दो विशाल क्रेन मंगाई गई हैं। ये क्रेन 15 जनवरी तक कैथवलिया पहुंच जाएंगी, जिनकी मदद से शिवलिंग को विधिवत खड़ा किया जाएगा। स्थापना के दौरान सुरक्षा को देखते हुए शिवलिंग के चारों ओर छह फीट का घेरा बनाया गया है, जहां आम लोगों की एंट्री प्रतिबंधित रहेगी।

विशेष तिथि, विशेष धार्मिक महत्व

17 जनवरी की तिथि को लेकर भी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इस दिन को शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए चुना गया है। पटना स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के सचिव सायन कुणाल के अनुसार, इस पावन अवसर के लिए हरिद्वार और पाटन से विशेष आचार्यों को आमंत्रित किया गया है। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।

हेलिकॉप्टर से जलाभिषेक और फूलों की बारिश

पूरे आयोजन का सबसे आकर्षक क्षण वह होगा, जब देश की प्रमुख तीर्थ नदियों से लाए गए पवित्र जल को हेलिकॉप्टर के माध्यम से शिवलिंग पर अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही श्रद्धालुओं पर और शिवलिंग पर पुष्पवर्षा भी की जाएगी। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय होने वाला है

प्रसाद और पूजा का समय

शिवलिंग स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8 बजे से होगी। सुबह 8 से 10 बजे तक मुख्य पूजा होगी, इसके बाद 10 से साढ़े 10 बजे तक विशेष अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा। दोपहर साढ़े 12 बजे विधिवत रूप से शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए दो क्विंटल से अधिक बताशे का प्रसाद तैयार किया जा रहा है, जिसे पूजा के बाद वितरित किया जाएगा।

साधु-संतों और वीआईपी मेहमानों की मौजूदगी

इस भव्य आयोजन में बिहार और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख साधु-संतों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा शिवलिंग स्थापना समारोह में बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के आने की भी संभावना जताई जा रही है। प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारी की गई है।

विराट रामायण मंदिर से जुड़ा है शिवलिंग

यह शिवलिंग विराट रामायण मंदिर परिसर का हिस्सा होगा। विराट रामायण मंदिर का निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति की ओर से किया जा रहा है। मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग स्थल, गर्भगृह की पाइलिंग समेत कई अहम कार्य पहले ही पूरे हो चुके हैं।

यह मंदिर आकार में 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर प्रस्तावित हैं। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी, जबकि अन्य शिखरों की ऊंचाई 180 फीट, 135 फीट, 108 फीट और 90 फीट तय की गई है। पटना से इस भव्य मंदिर की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है।

आस्था और पर्यटन का नया केंद्र

विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग की स्थापना के साथ ही मोतिहारी और पूर्वी चंपारण क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर और मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। यह आयोजन न सिर्फ आस्था का प्रतीक बनेगा, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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