सरकारी जमीन के म्यूटेशन पर नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, 90 दिनों की डेडलाइन तय
सरकारी जमीन के म्यूटेशन पर नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, 90 दिनों की डेडलाइन तय
बिहार में सरकारी जमीन से जुड़े मामलों को लेकर नीतीश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने सरकारी भूमि के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए 90 दिनों की डेडलाइन तय कर दी है। इस फैसले का मकसद लंबे समय से अटके पड़े मामलों का जल्द निपटारा करना और जमीन से जुड़े विवादों पर लगाम लगाना है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, अब सरकारी जमीन के म्यूटेशन से जुड़े सभी मामलों का निपटारा अधिकतम 90 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि तय समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो संबंधित अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही पर रोक लगेगी, बल्कि आम लोगों को भी बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और गलत तरीके से म्यूटेशन किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। अब हर स्तर पर म्यूटेशन प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की जाएगी और ऑनलाइन रिकॉर्ड के जरिए इसकी नियमित समीक्षा होगी इस फैसले को राज्य सरकार की भू-माफियाओं के खिलाफ चल रही सख्त नीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पहले ही सरकार अवैध कब्जों को हटाने और सरकारी संपत्ति को सुरक्षित करने के लिए कई अभियान चला चुकी है। 90 दिनों की डेडलाइन तय होने से ऐसे मामलों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस निर्णय को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो यह बिहार में भूमि प्रशासन सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। वहीं, आम जनता को भी इससे राहत मिलने की संभावना है।
नीतीश सरकार का यह फैसला साफ संकेत देता है कि सरकारी जमीन के मामलों में अब किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पटना से भूमि आर्य की रिपोर्ट
