सीएम योगी की संवेदनशीलता से पूर्व मेजर की बेटी को मिला न्याय, 24 घंटे में कब्जा मुक्त हुआ करोड़ों का मकान

सीएम योगी

सीएम योगी ने दिलाया न्याय

सीएम योगी की संवेदनशीलता से पूर्व सैनिक की बेटी को मिला न्याय

नए साल पर इंसाफ की शुरुआत, 24 घंटे में खाली हुआ कब्जा

मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर तुरंत हरकत में आया प्रशासन

लखनऊ। नए साल की पहली सुबह उत्तर प्रदेश में एक भावुक और इंसाफ से भरी कहानी लेकर आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। सेना के पूर्व मेजर की बेटी अंजना, जो वर्षों से दबंगों की प्रताड़ना का शिकार थीं, आखिरकार अपने ही घर में कदम रख सकीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर जमीन माफियाओं को गिरफ्तार कर अंजना को उनका पुश्तैनी मकान वापस दिलाया गया।

यह मामला न सिर्फ प्रशासन की तत्परता का उदाहरण बना, बल्कि यह भी साबित कर गया कि यदि पीड़ित की बात सीधे शासन तक पहुंचे, तो न्याय मिलने में देर नहीं होती।

सेना के मेजर की बेटी, अकेली और असहाय

जना के पिता स्वर्गीय बिपिन चंद्र भट्ट भारतीय सेना में मेजर थे। वे लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित मकान संख्या A-418 में परिवार के साथ रहते थे। वर्ष 1994 में मेजर भट्ट का निधन हो गया। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां थीं, लेकिन समय के साथ बेटे और एक बेटी का भी निधन हो गया। इस तरह अंजना परिवार की अकेली सदस्य रह गईं।


परिवार के सहारे के बिना अंजना मानसिक रूप से कमजोर होती चली गईं। दबंगों की लगातार धमकी और उत्पीड़न ने उनकी स्थिति और बिगाड़ दी। अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण अंजना स्किज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी की शिकार हो गईं और वर्ष 2016 में उन्हें निरवाना रिहैब सेंटर में भर्ती कराना पड़ा।

दबंगों ने किया करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा

अंजना की इस मजबूरी का फायदा उठाते हुए चंदौली निवासी बलवंत कुमार यादव और मनोज कुमार यादव ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे उनके मकान पर कब्जा कर लिया। घर पर अपना बोर्ड लगा दिया गया और अंजना को पूरी तरह बेदखल कर दिया गया।

जब अंजना को इस अवैध कब्जे की जानकारी मिली, तो उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में 6 दिसंबर को प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन कार्रवाई में देरी होती रही। न्याय की आस में अंजना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का निर्णय लिया।

सीएम योगी से मुलाकात, 24 घंटे में समाधान

31 दिसंबर की शाम अंजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलीं। उन्होंने अपने जीवन की पूरी पीड़ा मुख्यमंत्री के सामने रखी—पिता की सेना सेवा, अकेलापन, बीमारी और दबंगों द्वारा किए गए कब्जे की कहानी। मुख्यमंत्री योगी ने पूरे ध्यान से अंजना की बात सुनी और उन्हें आश्वासन दिया कि 24 घंटे के भीतर न्याय मिलेगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। दस्तावेजों की जांच की गई और आरोप सही पाए गए। इसके बाद गुरुवार 1 जनवरी 2026 को दोपहर से पहले अंजना को उनका मकान कब्जा मुक्त कराकर सौंप दिया गया।

घर में कदम रखते ही छलक पड़े आंसू

जब अंजना पुलिस और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में अपने घर के अंदर पहुंचीं, तो उनकी आंखों से आंसू रुक नहीं पाए। वे हर कमरे में गईं, दीवारों को चूमा और बीते दिनों की यादों में खो गईं। उन्होंने नारियल फोड़ा, दीये जलाए और फूलों से घर को सजाया।

पड़ोस की महिलाओं को गले लगाकर अंजना फूट-फूटकर रो पड़ीं। यह आंसू दुख के नहीं, बल्कि न्याय और सुकून के थे। अंजना बार-बार बस एक ही बात कहती रहीं—
“योगी अंकल महान हैं। भगवान आपको आशीर्वाद दे।”

रिहैब सेंटर ने भी की कार्रवाई की पुष्टि

निरवाना रिहैब सेंटर के डॉक्टर संतोष दुबे ने बताया कि अंजना वर्ष 2016 से इलाजरत थीं। हाल ही में मकान पर कब्जे की जानकारी मिलने के बाद प्रार्थना पत्र दिया गया और फिर मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने बेहद तेजी से कार्रवाई की और 24 घंटे में अंजना को न्याय दिलाया गया।

आरोपी गिरफ्तार, पुलिस की सख्त कार्रवाई

एसीपी गाजीपुर अनिंद्य विक्रम सिंह ने बताया कि मामले में आरोपी बलवंत कुमार यादव उर्फ बबलू (निवासी नारायणपुर, सैयदराजा, चंदौली) और मनोज कुमार यादव (निवासी दौदपुर, कोतवाली, चंदौली) को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों पर फर्जी दस्तावेज और अवैध कब्जे का मामला दर्ज किया गया है।

न्याय, संवेदनशीलता और सुशासन की मिसाल

यह मामला उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और सुशासन की एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता और प्रशासन की तत्परता ने एक पूर्व सैनिक की बेटी को उसका हक दिलाया। नए साल की यह शुरुआत न सिर्फ अंजना के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए न्याय की उम्मीद बनकर आई है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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