देवेश चंद्र ठाकुर के MP फंड से CCTV प्रोजेक्ट विवादों में, लागत और पारदर्शिता पर सवाल
देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद निधि खर्च पर सवाल
देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद निधि खर्च पर सवाल
सीतामढ़ी में सांसद देवेश चंद्र ठाकुर की MP फंड से लगे CCTV कैमरों पर पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कैमरों की ऊंची कीमत, एक ही कंपनी को टेंडर और जियोटैग्ड फोटो न होने से विवाद गहराया है।

सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत लगाए गए CCTV कैमरों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर की सांसद निधि से किए गए इस प्रोजेक्ट में न केवल लागत को लेकर बल्कि कार्य प्रक्रिया, दस्तावेजों और पारदर्शिता को लेकर भी कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 28 जुलाई 2025 से 18 नवंबर 2025 के बीच सीतामढ़ी जिले के विभिन्न थाना परिसरों और चौक-चौराहों पर कुल 182 CCTV कैमरे लगाए गए। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 2 करोड़ 27 लाख 50 हजार रुपये खर्च दिखाया गया है। यानी औसतन एक CCTV कैमरे की कीमत लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये दर्शाई गई है, जो मौजूदा बाजार दरों की तुलना में कई गुना अधिक बताई जा रही है।
कैमरे की कीमत पर सवाल

आज के समय में अच्छी क्वालिटी के CCTV कैमरे, इंस्टॉलेशन और रिकॉर्डिंग सिस्टम के साथ भी, बाजार में कहीं कम कीमत पर उपलब्ध हैं। ऐसे में प्रति कैमरा 1.25 लाख रुपये की लागत कई सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी ऊंची कीमत तभी जायज मानी जा सकती है जब अत्याधुनिक तकनीक, सर्वर, कंट्रोल रूम और मेंटेनेंस शामिल हो, लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों में इस तरह का कोई स्पष्ट विवरण नहीं मिलता।
एक ही कंपनी को सभी टेंडर
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि CCTV से संबंधित सभी कार्यों का टेंडर एक ही कंपनी – AV ENTERTAINMENT को दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस कंपनी के बारे में इंटरनेट या सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। न तो यह स्पष्ट है कि कंपनी का मालिक कौन है, न ही यह जानकारी मिलती है कि कंपनी ने पहले किन-किन सरकारी परियोजनाओं पर काम किया है।
आमतौर पर सरकारी परियोजनाओं में शामिल कंपनियों का एक स्पष्ट ट्रैक रिकॉर्ड होता है, लेकिन इस मामले में कंपनी की पृष्ठभूमि को लेकर रहस्य बना हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर दर्जनों कार्य एक ही योजना के तहत एक ही कंपनी को क्यों दिए गए।
जियोटैग्ड फोटो गायब, नियमों का उल्लंघन?
इस पूरे CCTV प्रोजेक्ट का सबसे गंभीर पहलू जियोटैग्ड फोटो का न होना है। MPLADS नियमों के अनुसार किसी भी कार्य को पूर्ण दिखाने के लिए Before & After की जियोटैग्ड तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होता है, ताकि यह साबित हो सके कि कार्य वास्तव में जमीन पर हुआ है।
लेकिन सीतामढ़ी में लगाए गए CCTV कैमरों के मामले में जियोटैग्ड तस्वीरें लगभग पूरी तरह गायब हैं। पोर्टल पर जो फाइलें अपलोड की गई हैं, उनमें से कई खुलती ही नहीं हैं। केवल दो फाइलें ही उपलब्ध हैं, जिनमें महज 67 CCTV कैमरों की प्राप्ति का उल्लेख है, वह भी विभिन्न थानों के नाम पर। बाकी 115 कैमरों के न तो फोटो हैं और न ही इंस्टॉलेशन से जुड़ा कोई ठोस सबूत।
इस स्थिति में यह सवाल उठना लाजिमी है कि करोड़ों रुपये खर्च दिखाकर लगाए गए कैमरे वास्तव में जमीन पर मौजूद हैं या नहीं।
सांसद निधि के अन्य कार्यों पर भी सवाल

MPLADS पोर्टल के अनुसार, 18वीं लोकसभा में सीतामढ़ी सांसद के लिए कुल 9 करोड़ 80 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से अब तक करीब 2 करोड़ 32 लाख रुपये खर्च दिखाया गया है। कुल 193 कार्यों की अनुशंसा की गई है, लेकिन इनमें से केवल 81 कार्यों को पूर्ण बताया गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि 2025 की शुरुआत में सड़क, आधारभूत संरचना और स्थानीय जरूरतों से जुड़े कई कार्यों की अनुशंसा की गई थी, लेकिन अब तक केवल CCTV से जुड़े कार्यों को ही पूर्ण दिखाया गया है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जिले की बुनियादी जरूरतें प्राथमिकता में नहीं हैं और क्या सांसद निधि का फोकस सिर्फ एक ही तरह की परियोजना तक सीमित कर दिया गया है।
पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
जब एक तरफ प्रति कैमरा लागत बाजार दर से कई गुना अधिक दिखाई दे रही है, दूसरी ओर सभी काम एक ही कंपनी को दिए गए हैं और सबसे अहम बात – किसी भी कार्य की जियोटैग्ड तस्वीरें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं – तो यह मामला सिर्फ प्रशासनिक चूक का नहीं लगता।
इस पूरे प्रकरण ने सांसद निधि के उपयोग और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि सांसद देवेश चंद्र ठाकुर इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करें। साथ ही जिला प्रशासन और MPLADS विभाग यह बताए कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद CCTV कैमरों से जुड़ा जमीनी साक्ष्य कहां है और जिले की बाकी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता कब दी जाएगी।
सीतामढ़ी के लोगों को अब जवाब चाहिए — पैसा खर्च हुआ, लेकिन क्या काम भी हुआ?
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
