Form-6 पर राहुल गांधी का सवाल, TCS से पूछा- आदेश किसका था?, ज्ञानेश कुमार से मांगा जबाब
राहुल गांधी ने Form-6 विवाद में TCS और चुनाव आयोग से जवाब मांगा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( नई दिल्ली)। मतदाता पंजीकरण के Form-6 को लेकर चल रहे विवाद ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ऑनलाइन Form-6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर चुनाव आयोग और TCS यानी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा है कि इस बदलाव को लागू करने का आदेश आखिर किसने दिया था और TCS में इसे किसने मंजूरी दी।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ऑनलाइन Form-6 में बदलाव किया गया था और इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां दर्ज हुई थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि आयोग में किस अधिकारी ने TCS को बदलाव करने का निर्देश दिया और कंपनी में किसने इसे मंजूरी दी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कंपनी पर ऐसा करने के लिए कोई दबाव था।
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वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मूल वैधानिक Form-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था। आयोग के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान Form-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र लगाया गया था। आयोग ने इसे SIR से जुड़ी अतिरिक्त आवश्यकता बताया है।
राहुल गांधी ने TCS से मांगा जवाब
राहुल गांधी ने Form-6 विवाद में सीधे TCS की भूमिका पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि ऑनलाइन फॉर्म में कोई बदलाव लागू किया गया था तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसका आदेश किस स्तर से आया और उसे लागू करने की मंजूरी किसने दी।
उनके सवाल ऐसे समय पर आए हैं, जब Form-6 और SIR को लेकर विपक्ष तथा चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक और संस्थागत बहस तेज है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
Form-6 विवाद में चुनाव आयुक्तों की आपत्ति
इस विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट भी रही है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form-6 से जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर विभिन्न फैसलों को लेकर दोनों आयुक्तों की आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया था।
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रिपोर्ट सामने आने के बाद Form-6 में जोड़े गए अतिरिक्त हिस्से को लेकर सवाल और तेज हुए। हालांकि चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर यह स्पष्ट किया कि Form-6 में मूल रूप से कोई संशोधन नहीं किया गया था।
Form-6 पर चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग के मुताबिक नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला वैधानिक Form-6 अपनी मूल स्थिति में बरकरार रहा। SIR के दौरान इसके साथ अलग से Annexure-D यानी अतिरिक्त घोषणा-पत्र की आवश्यकता रखी गई थी।
आयोग ने बताया कि यह अतिरिक्त घोषणा SIR से संबंधित निर्देशों के तहत लाई गई थी। इसमें आवेदक को अपने या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी के पुराने मतदाता सूची से जुड़े विवरण के संबंध में जानकारी देनी होती थी।
आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद यह भी स्पष्ट किया था कि SIR की अवधि समाप्त होने के बाद Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।
अब कई राज्यों में हटाया गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने SIR पूरा कर चुके राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऑनलाइन Form-6 से अतिरिक्त SIR घोषणा-पत्र हटा दिया है। यह बदलाव ECINET पोर्टल और संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर किया गया है।
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इसका मतलब है कि जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित वैधानिक Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं जिन क्षेत्रों में SIR अभी चल रहा है, वहां अतिरिक्त घोषणा-पत्र की व्यवस्था बनी रह सकती है।
आयोग ने सिस्टम की समीक्षा भी शुरू की
Form-6 और मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल सिस्टम की समीक्षा की प्रक्रिया भी शुरू की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ECINET प्रणाली में कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कामकाज की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसमें वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारी और स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य डिजिटल प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी या प्रक्रियागत समस्या की पहचान करना और उसे नियमों के अनुरूप रखना बताया गया है।
राहुल गांधी के सवालों के बीच विपक्ष की बैठक
Form-6 विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों की गतिविधियां भी तेज हुई हैं। दिल्ली में INDIA गठबंधन के नेताओं की बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च और व्यापक आंदोलन की बात भी सामने आई है। हालांकि किसी भी राजनीतिक आंदोलन की दिशा और उसका स्वरूप संबंधित दलों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

राहुल गांधी ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर साथ मिलकर आगे बढ़ने की अपील की है। उनके बयानों के मुताबिक, उनका जोर चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को सामूहिक रूप से उठाने पर है।
खरगे ने भी उठाया मतदाता सूची का मुद्दा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में कर्नाटक की गुलबर्गा सीट से अपनी हार का जिक्र करते हुए मतदाता सूची में नाम हटाए जाने का दावा किया।
खरगे का कहना है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। यह उनका राजनीतिक आरोप है और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के आधार पर नहीं की गई है।
विवाद के बीच दो अलग-अलग दावे
पूरे विवाद में फिलहाल दो प्रमुख पक्ष सामने हैं। राहुल गांधी और विपक्षी नेता Form-6 के ऑनलाइन संस्करण में अतिरिक्त घोषणा को लेकर सवाल उठा रहे हैं और प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मूल Form-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था और अतिरिक्त घोषणा-पत्र SIR की प्रक्रिया के लिए अलग से जोड़ा गया था। आयोग ने SIR पूरा होने वाले क्षेत्रों में इस अतिरिक्त घोषणा को ऑनलाइन Form-6 से हटा भी दिया है।
इसलिए अब विवाद का मुख्य केंद्र यह है कि अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लागू करने की प्रक्रिया क्या थी, उसका तकनीकी क्रियान्वयन किस स्तर पर हुआ और चुनाव आयोग की आंतरिक आपत्तियों का इस प्रक्रिया पर क्या असर पड़ा।
चुनाव आयोग की ओर से अतिरिक्त घोषणा हटाने और डिजिटल सिस्टम की समीक्षा की कार्रवाई के बाद मामला तकनीकी, कानूनी और राजनीतिक—तीनों स्तरों पर चर्चा में बना हुआ है। राहुल गांधी के TCS से पूछे गए सवालों के बाद इस विवाद में कंपनी की भूमिका और ऑनलाइन Form-6 में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक बहस आगे बढ़ने के संकेत हैं।
राज कुमार की रिपोर्ट
