बिहार कांग्रेस ने बागी नेता पर की कार्रवाई, मीडिया प्रभारी बदला, हटाए गए राजेश राठौर
बिहार कांग्रेस ने बदला मीडिया प्रभारी, अजय पासवान को मिली बड़ी जिम्मेदारी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव का सिलसिला जारी है। पार्टी ने मीडिया एवं प्रचार विभाग की जिम्मेदारी अब अजय कुमार पासवान को सौंप दी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सहमति से यह नियुक्ति की गई है। अजय कुमार पासवान अब तक बिहार कांग्रेस में प्रवक्ता की भूमिका में सक्रिय रहे हैं। वे इससे पहले कांग्रेस के एससी-एसटी विभाग में राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर भी रह चुके हैं।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी के मीडिया विभाग के चेयरपर्सन रहे राजेश राठौड़ ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। दोनों घटनाओं के समय को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर तेज हुई है। हालांकि, पार्टी की ओर से कहा गया है कि मीडिया विभाग के नए चेयरपर्सन की नियुक्ति की प्रक्रिया पहले से चल रही थी और इसका राजेश राठौड़ के MLC चुनाव लड़ने से कोई संबंध नहीं है।
बिहार कांग्रेस ने अजय कुमार पासवान को दी कमान
अजय कुमार पासवान मूल रूप से जहानाबाद के रहने वाले हैं। पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे पासवान को अब मीडिया और प्रचार विभाग की जिम्मेदारी मिलने से उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। उनकी जिम्मेदारी राज्य में कांग्रेस के आधिकारिक पक्ष को मीडिया तक पहुंचाने, पार्टी के कार्यक्रमों और नीतियों को सामने रखने तथा संगठन की प्रचार गतिविधियों को समन्वित करने की होगी।
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पार्टी की ओर से इस नियुक्ति को संगठन को मजबूत करने की कवायद का हिस्सा बताया जा रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद बिहार कांग्रेस में कई स्तरों पर संगठनात्मक फेरबदल किया जा रहा है। इसी क्रम में मीडिया विभाग को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।
राजेश राठौड़ ने तिरहुत शिक्षक सीट से भरा पर्चा
मीडिया विभाग में बदलाव से ठीक पहले राजेश राठौड़ ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने शनिवार को पर्चा भरा। राठौड़ ने अपने नामांकन को किसी दलगत टकराव के रूप में देखने से इनकार किया था। उनका कहना था कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग होता है और यहां शिक्षक अपने मुद्दों तथा उम्मीदवार के काम को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं।
राजेश राठौड़ के मुताबिक, वह पिछले करीब 10 वर्षों से शिक्षकों की समस्याओं और उनकी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों की ओर से लगातार चुनाव लड़ने का आग्रह किया जा रहा था। इसी वजह से उन्होंने तिरहुत शिक्षक सीट से मैदान में उतरने का फैसला किया।
बिहार कांग्रेस के फैसले पर सियासी चर्चा तेज
राठौड़ के निर्दलीय नामांकन और उसके अगले दिन मीडिया विभाग की जिम्मेदारी बदले जाने से दोनों घटनाओं को जोड़कर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नए चेयरपर्सन की नियुक्ति की प्रक्रिया पहले से चल रही थी।
तिरहुत शिक्षक सीट पर राठौड़ के उतरने से चुनावी मुकाबला भी बहुकोणीय हो गया है। इस सीट पर अलग-अलग दलों के प्रत्याशियों के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होनी है।
महागठबंधन के बीच भी MLC चुनाव की हलचल
बिहार विधान परिषद चुनाव इस बार सिर्फ उम्मीदवारों की लड़ाई तक सीमित नहीं दिख रहा है। सहयोगी दलों के बीच सीटों को लेकर अलग-अलग दावेदारी ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ाई है। तिरहुत शिक्षक सीट को लेकर कांग्रेस और सहयोगी दलों के समीकरण की चर्चा पहले से होती रही है।
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राजेश राठौड़ के निर्दलीय उतरने के बाद इस सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। हालांकि राठौड़ ने इसे महागठबंधन में दरार के तौर पर देखने से इनकार किया और कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुद्दे और उम्मीदवार की भूमिका ज्यादा मायने रखती है।
बिहार कांग्रेस ने पहले ही शुरू कर दिया था मीडिया विभाग का पुनर्गठन
मीडिया विभाग में चेयरपर्सन बदलने का फैसला अचानक हुआ बदलाव नहीं है। बिहार कांग्रेस ने पहले ही मीडिया और प्रचार से जुड़े संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। पार्टी ने नेशनल टैलेंट हंट के तहत मीडिया विभाग के लिए पदाधिकारियों के चयन की प्रक्रिया शुरू की थी।
इस प्रक्रिया में राज्य और जिला स्तर पर मीडिया से जुड़े कई पद बनाए गए। पार्टी का मकसद मीडिया संचार को अधिक व्यवस्थित करना और संगठन के संदेश को राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना बताया गया है।
असित नाथ तिवारी को राज्य मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में असित नाथ तिवारी को राज्य मीडिया संयोजक बनाया गया है। वहीं ज्ञान रंजन और पंकज यादव को राज्य मीडिया विभाग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। डॉ. तबरेज हसन, राजीव मेहता और अमित कुमार को क्षेत्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है। इससे साफ है कि कांग्रेस ने मीडिया विभाग को केवल एक चेयरपर्सन तक सीमित रखने के बजाय राज्य, क्षेत्र और जिला स्तर पर जिम्मेदारियों का अलग-अलग ढांचा तैयार किया है।
19 राज्य प्रवक्ता और 22 मीडिया पैनलिस्ट
पार्टी की नई मीडिया टीम में 19 राज्य प्रवक्ताओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा 22 नेताओं को राज्य मीडिया पैनलिस्ट की जिम्मेदारी दी गई है। इनके जरिए अलग-अलग राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष सामने रखने की तैयारी है।
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कांग्रेस ने मीडिया विभाग में शोध और प्रचार के लिए भी अलग टीम बनाई है। 15 राज्य शोधकर्ताओं, 11 राज्य प्रचार समन्वयकों और 20 जिला प्रवक्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह पार्टी ने शोध, प्रचार, मीडिया संवाद और जिला स्तर की संचार व्यवस्था को अलग-अलग जिम्मेदारियों में बांटा है।
फरवरी में शुरू हुई थी चयन प्रक्रिया
बिहार कांग्रेस ने इस साल फरवरी में नेशनल टैलेंट हंट के तहत मीडिया और संगठन से जुड़े पदों के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की थी। पटना में इसके लिए ऑडिशन और इंटरव्यू भी आयोजित किए गए थे। प्रक्रिया में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम समेत पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी रही थी।

अब नई टीम के गठन के बाद राज्य से लेकर जिला स्तर तक कांग्रेस के आधिकारिक संचार की जिम्मेदारी नए पदाधिकारियों के पास होगी। मीडिया विभाग में अजय कुमार पासवान की नियुक्ति इसी व्यापक संगठनात्मक बदलाव की अगली कड़ी मानी जा रही है।
दलित और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर फोकस
अजय कुमार पासवान को जिम्मेदारी मिलने के पीछे सामाजिक समीकरण की चर्चा भी हो रही है। कांग्रेस बिहार में दलित और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक संवाद का अहम हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है। पासवान की संगठनात्मक पृष्ठभूमि और एससी-एसटी विभाग में काम करने के अनुभव को भी उनकी नई भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।
सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि नई मीडिया टीम आने वाले दिनों में बिहार कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों को किस तरह जनता तक पहुंचाती है। वहीं दूसरी ओर तिरहुत शिक्षक MLC चुनाव में राजेश राठौड़ की उम्मीदवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में चुनावी अभियान और पार्टी संगठन की गतिविधियों से तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
राज कुमार की रिपोर्ट
