लैंड फॉर जॉब घोटाला: लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय, 29 जनवरी से ट्रायल शुरू
लैंड फॉर जॉब घोटाला
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला? समझिए पूरा मामला
लैंड फॉर जॉब घोटाला: दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी समेत 40+ आरोपियों पर आरोप तय किए। जानिए केस की पूरी कहानी, सीबीआई के आरोप और आगे की सुनवाई की अपडेट।

दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। सीबीआई की विशेष अदालत ने बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती समेत 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि इस मामले में ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अब अगली प्रक्रिया के तहत नियमित सुनवाई शुरू होगी, जिसमें सीबीआई अपने गवाहों और सबूतों को पेश करेगी। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को तय की गई है।
क्या है कोर्ट का रुख
राउस एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला एक व्यापक आपराधिक साजिश की ओर इशारा करता है। अदालत के अनुसार, आरोपियों ने एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम किया। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए हैं, जबकि उनके परिवार के सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं में मुकदमा चलेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए मामले की विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।

सीबीआई का आरोप क्या है
सीबीआई के अनुसार, यह घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई। यह जमीन अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से बहुत कम कीमत पर या गिफ्ट के तौर पर लेकर लालू परिवार, उनके करीबी लोगों या बाद में उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम कराई गई।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि चार्जशीट में नामजद कुल 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है। शेष आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा।
जमीन के बदले नौकरी घोटाले की पूरी कहानी
जांच एजेंसियों का दावा है कि कई उम्मीदवारों को रेलवे में नौकरी तभी मिली, जब उन्होंने या उनके परिवार ने अपनी जमीनें मार्केट रेट से बेहद कम कीमत पर लालू यादव के परिवार को ट्रांसफर कीं। कुछ मामलों में जमीनें सीधे गिफ्ट डीड के जरिए दी गईं। बताया जा रहा है कि कई जमीनें बाजार मूल्य के एक-चौथाई या एक-पांचवें हिस्से में ली गईं।
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, लगभग 1 लाख स्क्वायर फीट जमीन महज 26 लाख रुपये में ली गई, जबकि उसकी वास्तविक सरकारी कीमत 4.39 करोड़ रुपये से अधिक थी। ये जमीनें पटना और आसपास के इलाकों में स्थित थीं।
राबड़ी देवी और कंपनियों की भूमिका

जांच में सामने आया है कि अधिकांश जमीनें सीधे या परोक्ष रूप से राबड़ी देवी से जुड़ी हुई पाई गईं। ईडी ने इन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में अपराध से अर्जित संपत्ति माना है। इसके अलावा, एक कंपनी AK Infosystems का भी जिक्र चार्जशीट में है। आरोप है कि इस कंपनी के पास कीमती जमीन थी, जिसके शेयर बाद में बहुत कम कीमत पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम ट्रांसफर कर दिए गए, ताकि असली मालिकाना छुपाया जा सके।
एजेंसियों का कहना है कि जिन लोगों ने जमीन दी, उनके रिश्तेदारों को कुछ ही समय में रेलवे में नौकरी मिल गई, जिससे सीधा लाभ-लेनदेन (quid pro quo) का संकेत मिलता है।
आरोपियों का पक्ष
इस मामले में लालू यादव और अन्य सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। आरोपियों के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि जमीन और नौकरी के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और ट्रायल चलाने का आदेश दिया।
आगे क्या

अब इस केस में सीबीआई अपने गवाहों से जिरह करेगी और दस्तावेजी व मौखिक सबूत पेश करेगी। वहीं ईडी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं पर अपनी जांच आगे बढ़ाएगी। आने वाले महीनों में यह मामला बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर गर्माने की पूरी संभावना है।
लैंड फॉर जॉब घोटाला न केवल लालू परिवार के लिए बल्कि राजद के लिए भी एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। 29 जनवरी से शुरू होने वाला ट्रायल इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
