बिहार में बाढ़ का कहर, 10,671 करोड़ की तबाही; 11 जिलों में फसल बर्बाद

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बिहार बाढ़ से 10,671 करोड़ का नुकसान, 11 जिलों में फसल प्रभावित

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में इस साल बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। गंगा, गंडक, सोन और कोसी समेत कई नदियों में जलस्तर बढ़ने से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जनजीवन और बुनियादी ढांचे पर असर पड़ा। दो चरणों में आई बाढ़ से अब तक करीब 10,671 करोड़ रुपये के नुकसान का शुरुआती अनुमान लगाया गया है। सबसे ज्यादा क्षति जल संसाधन विभाग के तटबंधों को पहुंची है। वहीं, 11 जिलों में 82,186 हेक्टेयर में लगी फसल प्रभावित हुई है और 26 लोगों की मौत हुई है।

राज्य सरकार की ओर से जारी शुरुआती आकलन के मुताबिक, नुकसान का अंतिम आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। ऊर्जा, डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभागों की रिपोर्ट का इंतजार है। इन विभागों के नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद कुल क्षति की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल तटबंधों की मरम्मत, प्रभावित किसानों को राहत और मृतकों के परिजनों को सहायता देना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।

बिहार में बाढ़ से दो चरणों में हुई भारी तबाही

बिहार में बाढ़ का पहला चरण 26 अगस्त से 10 सितंबर के बीच आया था। इस दौरान राज्य के बाहर नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण बिहार की प्रमुख नदियों में पानी तेजी से बढ़ा। पहले चरण में 9,617 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

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इसके बाद 24 से 30 सितंबर के बीच बाढ़ का दूसरा चरण आया। इस बार नेपाल में भारी बारिश के कारण गंडक नदी में पानी का बहाव काफी बढ़ गया। इससे पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सारण के कुछ इलाकों में तटबंधों को नुकसान पहुंचा। दूसरे चरण में करीब 1,054 करोड़ रुपये की क्षति का आकलन किया गया है।

दोनों चरणों के आंकड़ों को जोड़ने पर कुल नुकसान 10,671 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। यह राशि अभी प्रारंभिक आकलन पर आधारित है। संबंधित विभागों की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद इसमें बदलाव संभव है।

बाढ़ के पहले चरण में 9,617 करोड़ रुपये का नुकसान

26 अगस्त से 10 सितंबर के बीच आई बाढ़ ने राज्य के कई इलाकों में रिकॉर्ड जलस्तर की स्थिति पैदा की। इस चरण में जल संसाधन विभाग ने तटबंधों को हुए नुकसान का अनुमान 5,472 करोड़ रुपये लगाया है। आपदा प्रबंधन विभाग को 2,710 करोड़ रुपये, ग्रामीण कार्य विभाग को 1,062 करोड़ रुपये और कृषि विभाग को 270 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है।

इसके अलावा पथ निर्माण विभाग को 76 करोड़ रुपये और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को 27 करोड़ रुपये के नुकसान की जानकारी दी गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बाढ़ का असर केवल खेतों और घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों, तटबंधों और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है।

इस दौरान बिहार के बाहर नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। 30 वर्षामापी केंद्रों पर औसतन 225 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद गंगा नदी के दानापुर, गांधीघाट, बंकाघाट, पंडारक, सुल्तानगंज और एकचारी में जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया। दरधा नदी के कोल्हाचक में भी अब तक का सबसे ऊंचा जलस्तर दर्ज किया गया।

गंडक नदी में उफान से छह जगह तटबंध क्षतिग्रस्त

बाढ़ का दूसरा चरण 24 से 30 सितंबर के बीच सामने आया। नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक नदी में पानी का बहाव तेजी से बढ़ा। उपलब्ध आकलन के मुताबिक, नदी में 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी बहा।

पानी का दबाव बढ़ने से बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में नदी का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया। गंडक नदी के किनारे छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। इनमें पश्चिम चंपारण के बगहा-एक, बैरिया और योगापट्टी, गोपालगंज के बैकुंठपुर तथा सारण के मकेर और पानापुर प्रखंड शामिल हैं।

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दूसरे चरण में जल संसाधन विभाग को 1,027.34 करोड़ रुपये और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को 26.81 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। तटबंधों को नुकसान पहुंचने से भविष्य में नदी का जलस्तर बढ़ने पर दोबारा खतरा पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे में समय पर मरम्मत और मजबूतीकरण जरूरी माना जा रहा है।

तटबंधों की मरम्मत के लिए करीब 1,027 करोड़ की मांग

क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत और उन्हें मजबूत बनाने के लिए जल संसाधन विभाग ने करीब 1,027 करोड़ रुपये की मांग की है। इसमें क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत के लिए 28.65 करोड़ रुपये, चंपारण, तिरहुत और अन्य तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए 973.69 करोड़ रुपये तथा बाढ़ से पहले मरम्मत कार्यों के लिए 25 करोड़ रुपये शामिल हैं।

तटबंधों की मजबूती बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई जिलों में बड़ी आबादी नदियों के आसपास रहती है। बरसात के दौरान नदी में पानी बढ़ने पर तटबंधों पर दबाव बढ़ जाता है। यदि कमजोर हिस्सों की समय पर मरम्मत नहीं होती, तो आसपास के गांवों, खेतों और सड़कों को नुकसान पहुंच सकता है।

हालांकि, मरम्मत के लिए मांगी गई राशि और वास्तव में स्वीकृत या खर्च की जाने वाली राशि अलग हो सकती है। काम कब शुरू होगा और कितना समय लगेगा, यह संबंधित विभागों की स्वीकृति, संसाधनों की उपलब्धता और कार्ययोजना पर निर्भर करेगा।

बिहार के 11 जिलों में 82,186 हेक्टेयर फसल प्रभावित

बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार, बिहार के 11 जिलों में 82,186 हेक्टेयर में लगी फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने और लंबे समय तक जलजमाव रहने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों की आमदनी पर असर पड़ने की आशंका है।

फसल क्षति का वास्तविक आकलन खेतों से पानी निकलने और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण पूरा होने के बाद अधिक स्पष्ट हो सकेगा। इसके बाद ही प्रभावित किसानों की संख्या और सहायता की जरूरत का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा।

ऊर्जा, डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभागों की रिपोर्ट अभी बाकी है। इन क्षेत्रों में हुए नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद राज्य में बाढ़ से हुई कुल आर्थिक क्षति का अंतिम आंकड़ा सामने आ सकता है।

बाढ़ से 26 लोगों की मौत, सारण में सबसे ज्यादा नुकसान

दोनों चरणों की बाढ़ में बिहार में कुल 26 लोगों की मौत हुई है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, पहले चरण में आठ और दूसरे चरण में 18 लोगों की जान गई। जिलेवार आंकड़ों में सारण सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 15 लोगों की मौत दर्ज की गई। मुंगेर में चार, पश्चिम चंपारण में तीन तथा भोजपुर और भागलपुर में दो-दो लोगों की मौत हुई।

राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता दे रही है। यह सहायता प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से दी जा रही है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत, जलनिकासी और पुनर्वास से जुड़े कार्य भी अहम हैं।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ से हुई क्षति की विस्तृत रिपोर्ट जल्द तैयार करने और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। सरकारी समीक्षा में नुकसान के आकलन और जरूरी पुनर्स्थापन कार्यों पर जोर दिया गया है।

नुकसान का अंतिम आंकड़ा बढ़ने की आशंका

बिहार में बाढ़ से 10,671 करोड़ रुपये की क्षति का आंकड़ा फिलहाल शुरुआती अनुमान है। कुछ विभागों की रिपोर्ट आने के बाद कुल नुकसान में बदलाव हो सकता है। इसके साथ ही तटबंधों की मरम्मत, किसानों की फसल क्षति का आकलन और प्रभावित परिवारों को राहत देने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

बाढ़ के बाद चुनौती केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं रहती। क्षतिग्रस्त सड़कों और तटबंधों को दुरुस्त करना, जलजमाव से निपटना और भविष्य में ऐसी स्थिति में नुकसान कम करने के उपाय करना भी जरूरी है। आने वाले दिनों में विभागीय रिपोर्ट और मरम्मत कार्यों की प्रगति से स्पष्ट होगा कि बिहार सरकार इस नुकसान की भरपाई और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को सामान्य स्थिति में लाने के लिए क्या कदम उठाती है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट