बिहार में आयुष्मान घोटाले का खुलासा, पटना का अस्पताल ब्लैकलिस्ट, 120 अस्पतालों को नोटिस

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आयुष्मान योजना में कथित गड़बड़ी, पटना का अस्पताल ब्लैकलिस्ट

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने वाली आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के दावों में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। अस्पतालों की ओर से आयुष्मान से इलाज के नाम पर किए जा रहे क्लेम की जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों की पहचान होने के बाद बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति ने कार्रवाई की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पटना के एक अस्पताल को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है, जबकि तीन अन्य अस्पतालों का योजना के पैनल से नाम हटा दिया गया है। इसके अलावा 120 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

आयुष्मान कार्रवाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल निगरानी प्रणाली और एंटी-फ्रॉड यूनिट की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है। शुरुआती जांच में कुछ मामलों में मरीजों की बीमारी और इलाज से जुड़े दस्तावेजों में कथित विसंगतियां सामने आईं। अब संबंधित अस्पतालों के रिकॉर्ड, क्लेम और चिकित्सा दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

आयुष्मान योजना में कार्रवाई, पटना का अस्पताल ब्लैकलिस्ट

रिपोर्ट के अनुसार, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति ने पटना स्थित रवि सेवा सदन को ब्लैकलिस्ट किया है। इसके साथ ही श्री राज ट्रस्ट अस्पताल, खुसरूपुर स्थित जीवन अस्पताल और मियाद अस्पताल का एम्पैनलमेंट तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है।

एम्पैनलमेंट का अर्थ है कि किसी अस्पताल को योजना के तहत पात्र मरीजों का इलाज करने और निर्धारित नियमों के अनुसार भुगतान का दावा करने की अनुमति मिली हुई है। पैनल से नाम हटाए जाने के बाद अस्पताल की योजना के तहत मरीजों को इलाज देने की पात्रता प्रभावित होती है। संबंधित आदेश की शर्तों और प्रभावी तारीख के आधार पर इसकी स्थिति स्पष्ट होती है।

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इस मामले में 120 अन्य अस्पतालों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के जरिए उनसे कथित अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। अस्पतालों के जवाब मिलने के बाद समिति आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है।

AI ने कैसे पकड़े आयुष्मान के संदिग्ध क्लेम?

आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल इलाज के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पोर्टल पर क्लेम अपलोड करते हैं। इन दावों में मरीज की बीमारी, भर्ती रहने की अवधि, किए गए उपचार और जरूरी जांच रिपोर्ट जैसी जानकारियां शामिल होती हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पतालों के क्लेम के पैटर्न की निगरानी के लिए इस्तेमाल की जा रही AI आधारित प्रणाली ने कुछ असामान्य गतिविधियों की पहचान की। इसके बाद संदिग्ध मामलों को जांच के लिए एंटी-फ्रॉड यूनिट के पास भेजा गया।

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डिजिटल निगरानी प्रणाली बड़ी संख्या में रिकॉर्ड का विश्लेषण करके ऐसे पैटर्न की पहचान कर सकती है, जिनकी सामान्य प्रक्रिया से जांच करना मुश्किल हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, किसी अस्पताल की ओर से बार-बार एक जैसे असामान्य क्लेम जमा करना या मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेजों में अंतर होना जांच का आधार बन सकता है।

हालांकि, AI से मिलने वाला अलर्ट अपने आप में धोखाधड़ी का अंतिम प्रमाण नहीं होता। इसके आधार पर संबंधित दस्तावेजों की जांच और तथ्यों का सत्यापन करना जरूरी है। इस मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध प्रमाणों पर निर्भर करेगा।

मरीजों की केस हिस्ट्री और जांच रिपोर्ट पर सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ संदिग्ध मामलों में मरीजों की केस हिस्ट्री में गंभीर बीमारी का उल्लेख था, लेकिन उससे संबंधित जरूरी जांच रिपोर्ट या दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले। कुछ मामलों में सामान्य या कम गंभीर बीमारी वाले मरीजों को गंभीर बीमारी की श्रेणी में भर्ती दिखाए जाने की आशंका भी जताई गई।

ऐसी स्थिति में यह जांचना जरूरी होता है कि मरीज को वास्तव में किस बीमारी के लिए भर्ती किया गया, कौन-सा उपचार दिया गया और अस्पताल ने किस पैकेज के तहत भुगतान का दावा किया। चिकित्सा रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, भर्ती से जुड़े दस्तावेज और उपचार का विवरण इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि किसी क्लेम के साथ आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलते, तो संबंधित अस्पताल से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। वहीं, यदि रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां मिलती हैं, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल सामने आई जानकारी को जांच के शुरुआती निष्कर्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

120 अस्पतालों को नोटिस, अब जवाब का इंतजार

बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति की कार्रवाई का एक बड़ा हिस्सा 120 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी करना है। नोटिस मिलने का उद्देश्य संबंधित अस्पतालों से उन क्लेम और दस्तावेजों के बारे में जवाब मांगना है, जिनमें जांच के दौरान सवाल उठे हैं।

अब संबंधित अस्पतालों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना पक्ष रखना होगा। वे इलाज के रिकॉर्ड, मरीजों की रिपोर्ट और भुगतान से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके बाद समिति यह तय कर सकती है कि क्लेम स्वीकार किया जाए, भुगतान रोका जाए या नियमों के तहत अन्य कार्रवाई की जाए।

अस्पतालों के जवाब और जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने मामलों में वास्तविक अनियमितता पाई गई और कितने मामलों में दस्तावेजों या प्रक्रिया से जुड़ी कमियां थीं। इसलिए सभी 120 अस्पतालों को दोषी मानना सही नहीं होगा।

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य क्या है?

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। बिहार में भी इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित शर्तों के अनुसार प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है। योजना का मकसद गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

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इस व्यवस्था में अस्पतालों के क्लेम की जांच बेहद अहम है। अगर इलाज के नाम पर गलत दावे किए जाते हैं, तो सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है। इससे योजना के संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है और जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी भी कठिन हो सकती है।

दूसरी ओर, जांच प्रक्रिया निष्पक्ष होना भी जरूरी है। किसी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसके रिकॉर्ड और जवाब का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक गड़बड़ी और सामान्य दस्तावेजी कमी के बीच अंतर किया जा सके।

एंटी-फ्रॉड यूनिट की निगरानी से क्या बदलेगा?

रिपोर्ट में बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के सीईओ अरविंद कुमार वर्मा के हवाले से बताया गया है कि सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए AI आधारित प्रणाली और एंटी-फ्रॉड यूनिट सक्रिय हैं। इस व्यवस्था के जरिए संदिग्ध क्लेम की पहचान कर उनकी विस्तृत जांच की जा सकती है।

यदि डिजिटल निगरानी के साथ अस्पतालों के रिकॉर्ड का नियमित सत्यापन किया जाता है, तो गलत भुगतान के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जरूरी है कि जांच समयबद्ध हो, कार्रवाई के कारण स्पष्ट हों और अस्पतालों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।

इस मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित अस्पतालों के जवाब और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। फिलहाल पटना के एक अस्पताल को ब्लैकलिस्ट करने, तीन अस्पतालों का एम्पैनलमेंट रद्द करने और 120 अस्पतालों को नोटिस देने की खबर ने बिहार में आयुष्मान योजना के तहत क्लेम की निगरानी को चर्चा में ला दिया है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट