पटना में दुर्गा पूजा पर सुरक्षा सख्त, 2 हजार पुलिसकर्मी और 14 कंपनियां तैनात, भीड़भाड़ वाले इलाकों में सख्ती
पटना में दुर्गा पूजा पर सुरक्षा सख्त, 2 हजार पुलिसकर्मी और 14 कंपनियां तैनात
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। पटना में दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। कोलकाता के चोरबागान में पूजा पंडाल में भगदड़ और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में ट्रक की चपेट में आने से श्रद्धालुओं के साथ हुए हादसे के बाद राजधानी में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पूजा पंडालों, प्रमुख चौराहों, जुलूस मार्गों और प्रतिमा विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 2,000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों और विशेष पुलिस बल एवं अर्धसैनिक बलों की 14 कंपनियों की तैनाती की गई है। प्रशासन का लक्ष्य भीड़ को नियंत्रित करना, यातायात व्यवस्था सुचारू रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है।
पटना में दुर्गा पूजा पर 2 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती
राजधानी के प्रमुख पूजा स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। डाकबंगला चौराहा, गांधी मैदान, बोरिंग रोड, बेली रोड और पटना सिटी जैसे क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों के साथ दंडाधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडालों में दर्शन करने पहुंचते हैं। शाम और रात के समय भीड़ बढ़ने से सड़कों पर दबाव भी बढ़ जाता है। ऐसे में पुलिस को भीड़ नियंत्रण, वाहनों की आवाजाही और लोगों के सुरक्षित आवागमन पर एक साथ ध्यान देना पड़ रहा है।
प्रशासन की कोशिश है कि पूजा पंडालों के आसपास अनावश्यक भीड़ जमा न हो और श्रद्धालुओं को आने-जाने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की तैनाती के साथ गश्त बढ़ाने की भी व्यवस्था की गई है।
पटना के 53 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर CCTV से निगरानी
पूजा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रमुख चौराहों, पूजा पंडालों और विसर्जन मार्गों पर ड्रोन कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, 53 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
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जानकारी के अनुसार, निगरानी व्यवस्था के लिए डीएसपी स्तर के 25 अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंट्रोल रूम से भीड़ की स्थिति और संवेदनशील इलाकों की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है।
पुलिस छिनतई, छेड़खानी और अफवाह फैलाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विशेष टीमों को सक्रिय रख रही है। भीड़ के बीच सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती और मोबाइल गश्ती भी सुरक्षा योजना का हिस्सा है।
ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए भीड़ के दबाव वाले स्थानों की पहचान कर समय रहते जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, तकनीकी निगरानी के साथ मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
पटना में भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती
ग्वालियर में ट्रक से हुए हादसे के बाद पटना में भीड़भाड़ वाले इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ट्रक, हाइवा, मिक्सर डंपर और निर्माण सामग्री ढोने वाले भारी वाहनों के शहर के प्रमुख आंतरिक मार्गों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।

यातायात व्यवस्था के तहत डाकबंगला चौराहे से कोतवाली, भट्टाचार्या चौराहा, इनकम टैक्स गोलंबर और अशोक राजपथ की ओर जाने वाले मार्गों पर भारी वाहनों के परिचालन को विजयादशमी तक रोकने की व्यवस्था की गई है।
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दानापुर, खगौल और बाइपास की ओर से आने वाले भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने और उनके परिचालन को निर्धारित समय के अनुसार नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है।
त्योहार के दौरान सड़कों पर पैदल श्रद्धालुओं, दोपहिया वाहनों, कारों और सार्वजनिक परिवहन की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही दुर्घटना का जोखिम बढ़ा सकती है। यातायात प्रतिबंधों का उद्देश्य पूजा पंडालों के आसपास वाहनों का दबाव कम करना और लोगों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है।
पटना के करीब 1,500 पूजा पंडालों की सुरक्षा जांच
कोलकाता में भगदड़ की घटना के बाद पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित निकास व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पटना में करीब 1,500 पूजा पंडालों में सुरक्षा मानकों की जांच तेज किए जाने की जानकारी दी गई है।
पंडालों में प्रवेश और निकास के रास्ते, बिजली के तारों की स्थिति और अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण है। अधिक भीड़ होने पर रास्ते बंद हो जाना या निकास द्वार तक पहुंचने में परेशानी होना गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
आयोजकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि श्रद्धालुओं के आने और बाहर निकलने के लिए पर्याप्त जगह हो। बिजली की असुरक्षित वायरिंग, ज्वलनशील सामग्री और आपातकालीन रास्तों में रुकावट जैसी समस्याओं को समय रहते दूर करना जरूरी है।
पुलिस और प्रशासन की निगरानी के साथ पूजा समितियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। भीड़ को एक ही रास्ते से प्रवेश कराने या बाहर निकालने के बजाय निर्धारित व्यवस्था का पालन कराने से अव्यवस्था की आशंका कम की जा सकती है।
पटना में प्रतिमा विसर्जन के दौरान घाटों पर रहेगी निगरानी
दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन के दौरान गंगा घाटों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान पानी में डूबने और अन्य दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को नावों और गोताखोरों के साथ तैनात रखने की व्यवस्था की जा रही है।
विसर्जन के दौरान घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करना, खतरनाक स्थानों पर लोगों को जाने से रोकना और जरूरत पड़ने पर तत्काल बचाव अभियान चलाना महत्वपूर्ण होगा। प्रशासन को घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ लोगों की आवाजाही के लिए स्पष्ट रास्ते बनाए रखने पर भी ध्यान देना होगा।
श्रद्धालुओं से अपील है कि वे निर्धारित विसर्जन स्थलों का ही इस्तेमाल करें और पानी में उतरने के दौरान सावधानी बरतें। बच्चों को घाटों पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। किसी भी आपात स्थिति में पुलिस और बचाव दल को तुरंत सूचना देना जरूरी है।
पटना पुलिस की अपील, अफवाहों से बचें और नियमों का करें पालन
त्योहारों के दौरान किसी भी अफवाह से अचानक भीड़ का व्यवहार बदल सकता है। इसलिए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सतर्क रहने, धक्का-मुक्की नहीं करने और निर्धारित रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
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लोगों को किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर खुद कार्रवाई करने के बजाय पुलिस को सूचित करना चाहिए। सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के संदेश और वीडियो साझा करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि भ्रामक जानकारी भीड़ में घबराहट पैदा कर सकती है।
वाहन चालकों को यातायात प्रतिबंधों का पालन करने और पुलिस के निर्देशों के अनुसार वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। पूजा समितियों और स्थानीय नागरिकों का सहयोग भी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
कोलकाता और ग्वालियर की घटनाओं के बाद पटना में अलर्ट
कोलकाता और ग्वालियर में हुए हादसों ने त्योहारों के दौरान भीड़ नियंत्रण और यातायात सुरक्षा की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। पटना में बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी संभावित खतरे को समय रहते पहचानना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है।
करीब 2,000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों, 14 कंपनियों की तैनाती, ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी और भारी वाहनों पर नियंत्रण जैसे उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो सकती है। हालांकि, इसके लिए प्रशासन, पुलिस, पूजा समितियों और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
दुर्गा पूजा आस्था और उत्सव का पर्व है। ऐसे में सभी की जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और किसी भी तरह की लापरवाही से बचें। प्रशासन की सतर्कता और नागरिकों के सहयोग से त्योहार को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने में मदद मिलेगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
